Bihar Panchayat Chunav 2026: बिहार में 2026 की शुरुआत में राज्यसभा चुनाव की चर्चा थी. अभी राज्य में विधान परिषद चुनाव की गहमागहमी तेज हो गई है और साल के अंत में पंचायत चुनाव का घमासान शुरू होने वाला है.
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बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और संवैधानिक बहस तेज हो गई है. पंचायत चुनाव, 2026 में 2022-23 की जाति आधारित जनगणना के आधार पर परिसीमन और आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. इस मुद्दे पर पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा न्यायालय में याचिका दायर की गई थी, जिस पर अदालत ने बिहार राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश देते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता चार सप्ताह के भीतर नया आवेदन प्रस्तुत करें, जिस पर आयोग दो महीने के भीतर निर्णय ले.
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इस पूरे मामले पर मुखिया संघ, बिहार के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार ने कहा कि पिछले 30 से 40 वर्षों से पंचायत परिसीमन और आरक्षण को लेकर अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ है, जबकि संविधान और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि पटना उच्च न्यायालय ने भी राज्य निर्वाचन आयोग को दो महीने के भीतर संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप निर्णय लेने का निर्देश दिया है.
मिथिलेश कुमार के अनुसार, यदि परिसीमन की प्रक्रिया लागू होती है तो इससे वर्षों से चुनावी प्रक्रिया से वंचित बड़ी आबादी को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा. उन्होंने ओबीसी आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की “थ्री-टियर” गाइडलाइन का भी जिक्र करते हुए कहा कि इसके पालन के लिए नए आयोग के गठन की आवश्यकता है.
उन्होंने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से अपील की कि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, क्योंकि पंचायत चुनाव इसी वर्ष प्रस्तावित हैं. उनका कहना है कि परिसीमन का निर्णय न केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करेगा, बल्कि आम जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच सरकार की सकारात्मक छवि भी बनाएगा.
रिपोर्ट: शिवम राज
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