बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन हुआ। CJP फाउंडर अभिजीत दीपके, यूट्यूबर ध्रुव राठी और एक्टर प्रकाश राज SIR रद्द करने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन में शामिल हुए।
दीपके ने ‘नरेंद्र मोदी वोट चोर’ और ‘SIR रद्द करो’ के नारे लगवाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम मोदी ने वोट चोरी करके चुनाव जीता और जिंदा लोगों को मृत घोषित किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा का मकसद ‘वन नेशन, वन पार्टी’ बनाना है।
दीपके ने इसकी तुलना हिटलर से की। उन्होंने कहा- 2024 में BJP और कांग्रेस के बीच वोट शेयर का अंतर सिर्फ 2% था। भाजपा 400 पार का दावा कर रही थी। इसलिए चुनाव के रिजल्ट से वह हैरान हो गई। दीपके ने आगे कहा- नेहरू भारत की रीढ़ थे और उन्होंने उन लोगों को भी वोट देने का अधिकार दिया, जिन्हें इसकी जानकारी नहीं थी।
वहीं, प्रदर्शन के बाद CJP ने दावा किया कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में आने वाले लोगों को रोकने के लिए देशभर में 10 हजार लोगों को हिरासत में लिया गया है। भारतीय किसान यूनियन ने प्रदर्शन को समर्थन दिया है। राकेश टिकैत ने किसानों और समर्थकों से दिल्ली पहुंचने की अपील की है।
प्रकाश राज बोले- ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केस दर्ज हो
वहीं, एक्टर प्रकाश राज ने अपने संबोधन में कहा- SIR के जरिए चुनाव आयोग ने पूरे देश का अपमान किया है। पहले चुनाव अधिकारी नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए घर-घर जाते थे, लेकिन अब मतदाताओं को अपना नाम हटाए जाने से बचाने के लिए अधिकारियों के सामने गुहार लगानी पड़ रही है।
प्रकाश राज ने कहा कि पहले लोग तय करते थे कि सरकार कौन बनाएगा, लेकिन SIR के जरिए सरकार तय कर रही है कि कौन वोट देगा। नाम हटाना महज आंकड़ा नहीं है और इसमें एक पैटर्न दिखाई देता है, जिसमें अल्पसंख्यक, आदिवासी और मुस्लिम मतदाता शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन का मकसद सिर्फ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाना नहीं है, क्योंकि उनके जाने के बाद कोई और उनकी जगह लेगा। हमारी मांग SIR को खत्म करने और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मामला दर्ज करने की है। जब तक ये मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
दीपके का आरोप- दिल्ली में प्रदर्शन से पहले लोगों को हिरासत में लिया जा रहा
अभिजीत दीपके ने बेंगलुरु में प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा- सत्ता आपके पास हो सकती है, लेकिन सड़कें हमारी हैं। यहीं से हम अपना लोकतंत्र वापस लेंगे।
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने लिखा- मोदी को लगता है कि लोगों को जेल में डालकर विरोध की आवाज को दबाया जा सकता है। जितने ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जाएगा, उतने ही ज्यादा लोग प्रदर्शन में शामिल होंगे।
10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच पार्टी 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन करेगी। दीपके ने 2 अक्टूबर की रात एक्स पर पोस्ट कर कहा था कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो देशभर से कॉकरोच दिल्ली पहुंचेंगे।
उन्होंने यह भी कहा था कि अगर दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर तक पहुंचने से रोका, तो जहां उन्हें रोका जाएगा, वहीं पर जंतर-मंतर बनेगा।
जुलाई के प्रदर्शन में क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों की पहचान हुई
CJP ने जुलाई में शिक्षा के मुद्दों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था। आंदोलन की शुरुआत 6 जून को हुई थी। यह 36 दिन चला और 25 जुलाई को खत्म हुआ। उसी दिन तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस्तीफा दिया था।
पुलिस के मुताबिक, जुलाई में CJP के प्रदर्शन में शामिल या उसके आसपास मौजूद 2,873 लोगों की पहचान क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले लोगों के तौर पर हुई थी। इनमें करीब 989 लोग गंभीर अपराधों से जुड़े थे।
पुलिस का दावा है कि इनमें 101 लोग हत्या के मामलों में आरोपी रहे हैं। इनमें 42 ऐसे लोग थे, जिन पर दो या उससे ज्यादा हत्या के मामले दर्ज होने की बात कही गई है। 12 लोगों पर 10 या उससे ज्यादा हत्या के मामले दर्ज होने का दावा किया गया है।
दावा- SIR को लेकर चुनाव आयुक्तों ने उठाए सवाल
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। दोनों ने आरोप लगाया कि कुछ फैसले उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना लिए गए। इन आपत्तियों की कॉपी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने वोटर लिस्ट में नए नाम जोड़ने, नाम हटाने और दोबारा बहाल करने की प्रक्रिया के साथ-साथ चुनावी डेटा और उसे संभालने वाले सॉफ्टवेयर से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए थे। एक मामले में वोटर बनने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से जुड़ा सवाल जोड़े जाने पर भी आपत्ति जताई गई थी।
दोनों आयुक्तों ने चुनावी रोल के सॉफ्टवेयर और डेटा तक पहुंच को लेकर भी चिंता जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने इस मामले में कैबिनेट सचिव को भी पत्र लिखा था। इसके अलावा, काम के बंटवारे से जुड़े एक आदेश पर भी दोनों ने आपत्ति दर्ज की थी और इसे नियमों का उल्लंघन बताया था।
चुनाव आयोग ने कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए
चुनाव आयोग ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर कहा था कि सदस्यों की अलग-अलग राय और सुझाव किसी भी संस्थान की निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, पिछले एक साल में SIR समेत सभी बड़े फैसले और निर्देश पूरी कमिशन की सर्वसम्मति से लिए गए।
रिपोर्ट सामने आने के बाद SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ा। विपक्षी दलों और CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। इसी मामले को लेकर अदालत में भी याचिकाएं दायर की गई हैं।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 7 बड़े प्रदर्शन
2 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक देशभर में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए 7 बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं।
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CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि भाजपा अपने कार्यकर्ताओं को बोल रही है कि दिल्ली पहुंचकर पत्थरबाजी करो। लाठियां चलाओ। क्या सरकार देश में गृहयुद्ध चाहती है? हम सरकार को चेतावनी देते हैं कि सुधर जाइए। देश का युवा जवाबदेही मांग रहा है। पिछली गलती को मत दोहराइए। पूरी खबर पढ़ें…
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