अरनोद उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत चुपना में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया। स्कूल खेल मैदान में आयोजित इस कथा के अंतिम दिन राष्ट्रीय संत पंडित प्रीतम महाराज ने धर्म और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश दिए।
कथा के समापन अवसर पर सुबह से ही कथा पांडाल में श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। बच्चों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने मृदंग की थाप और शंख की पवित्र ध्वनि के बीच संत प्रीतम महाराज के वचनों का श्रवण किया।
संत प्रीतम महाराज ने इस अवसर पर कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए एक दीपक के समान है। यह जीवन को मर्यादा, धर्म और लोक कल्याण की राह दिखाती है।
महाराज ने कथा के दौरान श्रीकृष्ण के पार्थिव शरीर त्याग के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने इसे नश्वर देह और अमर आत्मा का संदेश बताया। उन्होंने कहा कि जीवन का मूल्य वर्षों में नहीं, बल्कि आचरण और भावना में निहित है।
महाराज ने उद्धव को दिए गए ज्ञान का भी उल्लेख किया। इसमें श्रीकृष्ण ने भक्ति से जुड़े ज्ञान को अहंकार मिटाने और सेवा भाव जगाने का माध्यम बताया था। संत प्रीतम महाराज ने पांडवों को धर्म पालन और परिवार में एकता के श्रीकृष्ण के उपदेश को सामाजिक समरसता और ग्रामीण एकजुटता का सशक्त सूत्र बताया।
उन्होंने वसुदेव को दिए गए उपदेश का भी जिक्र किया, जिसमें श्रीकृष्ण ने परिवार में प्रेम, बुजुर्गों के सम्मान और भक्ति से संकटों को सरल बनाने की सीख दी थी।
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