भाजपा छोड़ने वाले शहजाद का असली सरनेम पूनावाला नहीं है, बताया किस धर्म से हैं – livehindustan.com

भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कह चुके शहजाद पूनावाला अब राजनीति से दूर हो चुके हैं। हालांकि, वह अपने निजी सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए मध्यवर्गीय जनता से जुड़ी बातों समेत कई मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने राजनीति छोड़ने के बाद निजी क्षेत्र में काम करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि वह आर्थिक कारणों से पार्टी छोड़ रहे हैं, लेकिन विचारधारा नहीं। क्या आप जानते हैं कि शहजाद का असली सरनेम पूनावाला नहीं है। उन्होंने खुद ही इस बात का खुलासा भी किया था।

16 जुलाई 2023 को मोजो स्टोरी के एक पॉडकास्ट में उन्होंने अपने नाम को लेकर बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने कहा था, ‘मैं शिया खानीस परिवार से आता हूं…। मेरा असली सरनेम पूनावाला नहीं है, जमादार है। कई लोगों को यह नहीं पता। पिता और उनके भाई साथ में थे और जमादार सरनेम लिखते थे, लेकिन मेरे पिता व्यापार में आ गए और 20-22 साल की उम्र में अपना खुद का कारोबार शुरू कर दिया था।’

उन्होंने तब पूनावाला सरनेम रखने की वजह भी बताई थी। पूर्व प्रवक्ता ने कहा था, ‘…व्यापार क्षेत्र में उन्हें लगा कि सरनेम होना अच्छा रहेगा और तो उन्होंने खुद ही पूनावाला नाम ले लिया। यह लिया हुआ सरनेम है। पुणे में कई पारसी और मुस्लिम कारोबार और जगहों के नाम पर नाम रख लेते हैं।’

अगस्त में उन्होंने भाजपा को दिए इस्तीफा भी पोस्ट किया था। उसमें लिखा था कि 30 जुलाई को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पत्र लिखकर ‘व्यक्तिगत और आर्थिक परिस्थितियों के कारण’ भाजपा में सभी पदों और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से ‘बिना किसी शर्त के इस्तीफा’ देने की पेशकश की थी। नवीन को लिखे पत्र में पूनावाला ने कहा कि इस्तीफा तुरंत स्वीकार नहीं करने और उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह करने के पार्टी के रुख से वह काफी भावुक हो गए हैं।

पूनावाला ने कहा था, ‘जैसा कि पहले बताया गया है, आपात आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के कारण मैं निजी क्षेत्र में काम करूंगा। लेकिन जहां भी और जिस भी रूप में संभव होगा मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के नजरिए और कामों का समर्थन करता रहूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘किसी और देश या किसी और पार्टी में मेरे जैसी कहानी, एक युवा, पसमांदा मुस्लिम और गैर-राजनीतिक परिवार से आने वाले व्यक्ति की कहानी शायद मुमकिन नहीं होती।’ पूनावाला कांग्रेस छोड़ने के बाद दिसंबर 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे।

उन्होंने लिखा था, ‘लेकिन लंबे और गहन विचार-विमर्श के बाद मैंने यह अंतिम निर्णय लिया है कि मैं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद और सक्रिय प्राथमिक सदस्यता की भूमिका से मुक्त किए जाने का आग्रह करना चाहता हूं। पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं और कुछ ऐसे लोगों की वजह से, जिनके बारे में मैंने आपको विस्तार से बताया है, मुझे अपने पहले के फैसले पर कायम रहने और उसे दोहराने के लिए मजबूर होना पड़ा है।’

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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