भारतीय रेल के AC कोच में चोरी: 4 साल में 1.27 करोड़ चादरें-तौलिए, कंबल-तकिए गायब, कीमत ₹104 करोड़ से ज्यादा – India.Com

Published By: Farha Fatima | Updated: Jul 13, 2026, 7:57 AM
भारतीय रेलवे की AC कोचों में हर रात लगभग 8 लाख यात्री सफर करते हैं. हर यात्री को टिकट के साथ बेडरॉल (लिनेन) सेवा मिलती है, जिसमें आमतौर पर दो चादरें, एक कंबल, एक तकिया, तकिया कवर और एक फेस तौलिया शामिल होता है. लेकिन सफर खत्म होने पर कुछ यात्री इनमें से एक या ज्यादा सामान लेकर चले जाते हैं.
ट्रेन में सफर के दौरान यात्रियों को मिलने वाली बेडरॉल सुविधा अब रेलवे और ठेकेदारों के लिए भारी नुकसान का कारण बन रही है. चार साल में चोरी हुए सामान की कीमत ₹104 करोड़ से ज्यादा आंकी गई है.
द इंडियन एक्सप्रेस ने RTI (सूचना का अधिकार) दाखिल करके पूरे देश के 69 डिवीजनों से जानकारी मांगी. 54 डिवीजनों से जवाब मिला. इनके मुताबिक, जनवरी 2022 से कोविड के बाद पूरी तरह सेवा शुरू होने के बाद से मई 2026 तक कुल 1.27 करोड़ बेडरॉल आइटम्स चोरी हो गए. यह चोरी मुख्य रूप से यात्रियों द्वारा की गई है. 2022 से 2025 तक चोरी में 56% बढ़ोतरी हुई है. औसतन हर 1000 में से 1 यात्री कुछ न कुछ लेकर जाता है.
फेस तौलिए सबसे ज्यादा चोरी होते हैं (46.54 लाख) — क्योंकि ये छोटे और आसानी से छिपाए जा सकते हैं. उसके बाद चादरें (41.13 लाख). तकिया कवर (23.59 लाख). कंबल (12.95 लाख). तकिए (2.76 लाख). कुल नुकसान करीब ₹104.51 करोड़ तक होने का अनुमान है. यह पैसा बेडरॉल ठेकेदारों (कॉन्ट्रैक्टर्स) को उठाना पड़ता है.
10 डिवीजनों में कुल चोरी का 67% हिस्सा है. बीकानेर में सबसे ज्यादा, 25.76 लाख आइटम चोरी हुए, रांची में 9.31 लाख, दिल्ली में 8.21 लाख, मुंबई में 8.17 लाख, जोधपुर में 8.09 लाख, अहमदाबाद, दानापुर आदि जगहें भी शामिल हैं.
बीकानेर में चादरें सबसे ज्यादा चोरी होती हैं. दिल्ली, रांची, मुंबई आदि में तौलिए सबसे ज्यादा गायब. जोधपुर में कंबल सबसे ज्यादा चोरी होते हैं. सोनपुर और बिलासपुर में तकिया कवर सबसे ज्यादा चोरी. कुछ डिवीजनों में चोरी बहुत बढ़ी है, जैसे बीकानेर में 4 गुना बढ़ोतरी. वहीं दिल्ली में चोरी 79% कम हुई है. दक्षिण के दो डिवीजनों (तिरुचिरापल्ली और पलक्कड़) में बिल्कुल चोरी नहीं हुई.
रेलवे के प्रवक्ता ने कहा कि यह गंभीर समस्या है. चोरी रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं और दोषियों पर कार्रवाई होती है. स्टाफ की मिलीभगत साबित नहीं हुई है. लेकिन चोरी की वजह से अतिरिक्त लिनेन खरीदना पड़ता है. ठेकेदारों और अटेंडेंट्स (जो कोच में लिनेन देते हैं) पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ता है. चोरी होने पर उनके बिल से या सैलरी से पैसा काट लिया जाता है.
एक सुपरवाइजर ने बताया कि हर चोरी पर तय दर से रिकवरी होती है — जैसे चादर ₹198, कंबल ₹343, तौलिया ₹48 आदि. एक अटेंडेंट ने कहा कि उसकी मासिक सैलरी ₹21,000 होनी चाहिए, लेकिन चोरी की वजह से हर महीने ₹2,000-3,000 कट जाते हैं. कई ठेकेदारों ने कहा कि इस समस्या की वजह से उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट छोड़ दिया.
लिनेन यात्री उतरने के बाद अटेंडेंट्स इकट्ठा करते हैं. कमी होने पर ठेकेदारों से वसूली की जाती है. 2015 के सर्कुलर के अनुसार, लिनेन की उम्र के आधार पर रिकवरी होती है. एक्सप्रेस की रिपोर्ट में लिखा है RTI में सभी डिवीजनों से पूरी जानकारी नहीं मिली, इसलिए असली नुकसान इससे भी ज्यादा हो सकता है. रेलवे अब RFID जैसी टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है ताकि चोरी रोकी जा सके.
Subscribe to Our Newsletter Today!
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.
© 1998-2026 INDIADOTCOM DIGITAL PRIVATE LIMITED, ALL RIGHTS RESERVED

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News