इस्लामाबाद: पहलगाम में हुए हिंदू नरसंहार के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है. 26 लोगों की बेरहमी से हत्या ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. इस हमले के बाद भारत के सख्त रवैये से पाकिस्तान डरा हुआ है. सुबह-शाम सोते-जागते उसे भारत के हमले का डर बना है. पाकिस्तानी नेता और जनरल लगातार गीदड़भभकी दे रहे हैं. पूरी दुनिया में उन्हें समर्थन नहीं मिल रहा है. मुस्लिम देश भी भारत के साथ खड़े हैं, वहीं पाकिस्तान के नेता समर्थन जुटाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं. पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ओमान पहुंचे हैं, जहां वे भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को लेकर पाकिस्तान का पक्ष रखेंगे. वहीं, उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने मलेशिया के विदेश मंत्री से फोन पर बात की. डार ने भारत के सिंधु जल संधि को निलंबित करने के फैसले पर जहर उगला.
भारतीय सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब, यूएई, कतर जैसे खाड़ी देश भारत के साथ अपने आर्थिक और भू-राजनीतिक हितों को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं. ये देश पाकिस्तान का खुला समर्थन करने से बच रहे हैं, क्योंकि भारत उनके लिए बड़ा व्यापारिक साझेदार है. सऊदी अरब ने पहलगाम हमले पर कोई तीखा बयान नहीं दिया और कश्मीर को भारत-पाक का आपसी मसला मानता है. कतर भी तटस्थ रुख अपनाए हुए है. यूएई ने भी पाकिस्तान का साथ देने से परहेज किया. ईरान ने मध्यस्थता का प्रस्ताव रखकर खुद को न्यूट्रल दिखाने की कोशिश की है. वो भारत के साथ चाबहार बंदरगाह जैसे प्रोजेक्ट्स की वजह से पाकिस्तान का खुलकर समर्थन नहीं कर रहा.
सिर्फ चार दिन युद्ध में टिक सकता है पाकिस्तान
पाकिस्तान लगातार भारत को गीदड़ भभकी दे रहा है. लेकिन सच्चाई तो ये है कि उसके लिए युद्ध में टिक पाना सच्चाई से कोसों दूर है. खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के पास अब इतना गोला-बारूद नहीं बचा कि वह एक बड़े युद्ध में चार दिन टिक पाए. पाकिस्तान की तैयारियां बेहद कमजोर हैं. इसका सबसे बड़ा कारण हथियारों का निर्यात है. फरवरी से मार्च 2023 के बीच, पाकिस्तान ने करीब 42,000 बीएम-21 रॉकेट, 60 हजार 155 एमएम हॉवित्जर शेल्स और 1.3 लाख 122 एमएम रॉकेट रुस से लड़ने के लिए यूक्रेन को भेजे. पाकिस्तान को इससे 36.4 करोड़ डॉलर की कमाई हुई.