भारत ने बुधवार को इस्लामाबाद में शुरू किए गए पाकिस्तान-चीन सीमा आयोग को खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत का अभिन्न हिस्सा है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच कोई सीमा मौजूद नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, यह आयोग बिना किसी कानूनी आधार के बनाया गया है।
भारत ने कहा कि पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्र से जुड़े किसी भी समझौते में शामिल होने का अधिकार नहीं है। उसने पाकिस्तान से अवैध कब्जे वाले इलाके खाली करने को कहा।
मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के अवैध और जबरन कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र से जुड़े किसी भी समझौते में शामिल होने का पाकिस्तान को कोई अधिकार नहीं है।
1963 के समझौते को भी अवैध बताया
भारत ने 2 मार्च 1963 को कथित ‘चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते’ को भी अवैध और अमान्य बताया। यह समझौता शिनजियांग और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के बीच सीमा तय करने के लिए हुआ था।
भारत ने कहा कि भारतीय क्षेत्रों से जुड़े चीन-पाकिस्तान के सीमा सहयोग को पूरी तरह अस्वीकार्य माना जाएगा।
भारत ने पाकिस्तान से कहा कि वह इस तरह की “थिएट्रिक्स” यानी दिखावे की गतिविधियां बंद करे। साथ ही, पाकिस्तान अपने अवैध और जबरन कब्जे वाले इलाके खाली करे।
पाकिस्तान का दावा- आयोग ने नए रास्ते खुलेंगे
पाकिस्तान के मुताबिक, दोनों देशों के बीच यह सीमा आयोग आपसी सहयोग बढ़ाने का रास्ता खोलेगा। इससे संयुक्त सीमा सर्वे, व्यापारिक आवाजाही और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने X पर लिखा कि आयोग की पहली बैठक इस्लामाबाद स्थित विदेश मंत्रालय में हुई।
बैठक की सह-अध्यक्षता चीन के विदेश मंत्रालय के सीमा और समुद्री मामलों के विभाग के उप महानिदेशक ली या और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में चीन मामलों के महानिदेशक बिलाल महमूद चौधरी ने की।
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