India Pakistan Tension: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को एक संसदीय समिति को बताया कि भारतीय सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) ने पाकिस्तान को उनके क्षेत्र में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले करने के बाद ही उन्हें सूचित किया था. जयशंकर ने यह भी कहा कि उन्होंने पाकिस्तान से कभी बात नहीं की. विदेश मंत्री ने भारत-पाक सीजफायर में अमेरिका की भूमिका पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सीजफायर का फैसला पाकिस्तान की ओर से अनुरोध के बाद द्विपक्षीय रूप से लिया गया था.
मंत्री ने विदेश मामलों की सलाहकार समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को तभी रोका गया जब पाकिस्तान के डीजीएमओ ने इसे रोकने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि दोनों के बीच अमेरिकी मध्यस्थता का कोई सवाल ही नहीं है. कांग्रेस और राहुल गांधी, जयशंकर पर निशाना साधते हुए आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने आतंकी शिविरों पर भारतीय हमलों के बारे में पाकिस्तान को पहले ही सूचित कर दिया था.
भारत ने पाकिस्तान को दी थी चेतावनी
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बैठक में सांसदों को बताया कि केवल दोनों देशों के डीजीएमओ ने एक-दूसरे से बात की और किसी अन्य भारतीय अधिकारी ने पाकिस्तानी पक्ष से बात नहीं की. उन्होंने कहा कि भारत से पाकिस्तान से बात करने का आग्रह करने वाले अमेरिका को बताया गया कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती.
भारत ने आतंकी ठिकानों को बनाया था निशाना
विदेश मंत्री ने बैठक के दौरान सांसदों द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने और अमेरिकी ‘हस्तक्षेप’ के बारे में पूछे गए कई सवालों के जवाब में बताया कि डीजीएमओ ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष को सूचित किया था कि अगर वे गोलीबारी करेंगे, तो भारत जवाबी गोलीबारी करेगा. उन्होंने कहा, ”पाकिस्तान में आतंकी शिविरों पर लक्षित हमलों ने पाकिस्तानी सेना के मनोबल को भी चोट पहुंचाई है.”
जयशंकर ने ‘एक्स’ पर विदेश मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए तस्वीरें साझा कीं. उन्होंने यह भी कहा, “ऑपरेशन सिंदूर’ और आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ भारत की शून्य-सहिष्णुता नीति पर चर्चा की. इस संबंध में एक मजबूत और एकजुट संदेश भेजने के महत्व को रेखांकित किया.”
इनपुट – भाषा
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