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दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल एलन मस्क भारत के सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में अपनी कंपनी स्टारलिंक की एंट्री चाहते हैं. नियामकीय मंजूरी का इंतजार कर रहे मस्क ने इसे लेकर भारत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है. तो दूसरी तरफ अमेरिका में उनके राजनीतिक चंदे को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है.
भारत में कथित कारोबारी एकाधिकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले मस्क खुद अमेरिका में राजनीतिक चंदे और अरबपतियों के बढ़ते प्रभाव को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं. अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने आरोप लगाया है कि मस्क ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को चुनाव में फायदा पहुंचाने के लिए भारी रकम खर्च कर रहे हैं.
सैंडर्स के मुताबिक, मस्क ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की जीत के लिए करीब 29 करोड़ डॉलर खर्च किए थे. सैंडर्स ने दावा किया कि ट्रंप की जीत के बाद मस्क की संपत्ति में भारी इजाफा हुआ. उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि मस्क ने ट्रंप को जिताने के लिए 29 करोड़ डॉलर खर्च किए और इसके बाद उनकी संपत्ति 696 अरब डॉलर बढ़ गई. सैंडर्स ने यह भी दावा किया कि मस्क अब दुनिया के पहले खरबपति बन गए हैं.
सैंडर्स ने आगे आरोप लगाया कि मस्क 3 नवंबर को होने वाले 2026 के मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद के लिए 36.6 करोड़ डॉलर खर्च कर रहे हैं. उन्होंने अपनी पोस्ट में अरबपतियों के राजनीतिक प्रभाव के खिलाफ आवाज उठाते हुए लिखा, ‘मस्क को रोको, कुलीनतंत्र को रोको.’ रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मस्क ने 2026 के अमेरिकी चुनाव चक्र में लगभग 36.6 करोड़ डॉलर का राजनीतिक चंदा दिया है. इसमें जुलाई के बाद से कम से कम 27.6 करोड़ डॉलर शामिल हैं.
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रिपब्लिकन उम्मीदवारों के समर्थन में कहां-कहां खर्च हुआ पैसा?
मस्क के राजनीतिक चंदे का बड़ा हिस्सा उन संगठनों को मिला है, जो अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों- सीनेट और प्रतिनिधि सभा के चुनावों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, मस्क ने रिपब्लिकन सीनेट उम्मीदवारों के समर्थन में काम करने वाले सीनेट लीडरशिप फंड को 15.8 करोड़ डॉलर दिए. वहीं, उनके अपने राजनीतिक संगठन अमेरिका पीएसी को 7.6 करोड़ डॉलर का योगदान दिया गया. प्रतिनिधि सभा के चुनावों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करने वाले कांग्रेसनल लीडरशिप फंड को भी 2 करोड़ डॉलर दिए गए.
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों को ट्रंप के राजनीतिक प्रभाव की अहम परीक्षा माना जा रहा है. ईरान के साथ युद्ध के बाद पैदा हुए हालात के बीच रिपब्लिकन पार्टी के सामने कांग्रेस में अपना बहुमत बनाए रखने की चुनौती है. वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में दोबारा नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रही है.
क्या है कुलीनतंत्र, जिस पर सैंडर्स ने उठाए सवाल?
कुलीनतंत्र यानी ओलिगार्की ऐसी व्यवस्था को कहा जाता है, जिसमें राजनीतिक शक्ति कुछ गिने-चुने अमीर या प्रभावशाली लोगों के हाथों में केंद्रित हो जाती है. सैंडर्स लंबे समय से तर्क देते रहे हैं कि अरबपतियों की विशाल संपत्ति उन्हें चुनावों और सरकारी नीतियों पर आम लोगों की तुलना में कहीं अधिक प्रभाव डालने की क्षमता देती है.
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उनकी आलोचना का आधार यह है कि कोई एक बेहद अमीर व्यक्ति चुनावी अभियानों पर इतनी बड़ी रकम खर्च कर सकता है, जिससे विज्ञापन, मतदाताओं तक पहुंच और दूसरे प्रचार कार्यों को भारी मदद मिलती है. इससे बड़े दानदाताओं के समर्थन वाले उम्मीदवारों और मुद्दों को बढ़त मिल सकती है.
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