भास्कर एक्सप्लेनर- HMPV वायरस के भारत में 8 केस: कितना खतरनाक है कोरोना जैसा वायरस, चीन के वायरस से जुड़े ह… – Dainik Bhaskar

कोरोना महामारी के 5 साल बाद चीन में फिर एक नई बीमारी सामने आई है। इसके वायरस का नाम है- HMPV। भारत में कोरोना जैसे HMPV वायरस के अब तक कुल 8 मामले सामने आए हैं।
भास्कर एक्सप्लेनर में जानते हैं कि क्या HMPV कोरोना जितना जानलेवा है। इसका इलाज कैसे होगा। क्या फिर से लॉकडाउन लगेगा। वो सबकुछ जो आप जानना चाहते हैं…
सवाल-1: HMPV वायरस क्या है और क्या ये कोरोना जैसा ही है?
जवाब: HMPV यानी ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस इंफेक्शन और सांस से जुड़ा वायरस है। इसमें मरीजों को खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ और नाक बहने जैसी समस्याएं होती हैं।
HMPV एक RNA वायरस है, जो आमतौर पर सर्दी जैसे लक्षण पैदा करता है। इसका जोखिम ठंड के मौसम में ज्यादा होता है। अमेरिका के सेंटर्स फॉर डीजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक, ये वायरस न्यूमोविरिडे वायरस फैमिली से जुड़ा है, जिसमें रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) भी शामिल है।
रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) से फेफड़ों और सांस नली में इंफेक्शन होता है। ये इतना आम है कि 2 साल तक की उम्र के ज्यादातर बच्चे इस वायरस से प्रभावित हो जाते हैं।
कोरोना यानी कोविड-19 महामारी के लिए SARS-CoV-2 वायरस जिम्मेदार था, जो कोरोनाविरिडे वायरस फैमिली से जुड़ा है। HMPV और कोरोना अलग-अलग वायरल फैमिली से आते हैं, लेकिन COVID-19 और HMPV के लक्षण भी लगभग समान हैं।
HMPV से जुड़े आम लक्षणों में खांसी, बुखार, नाक बंद होना और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं जो COVID-19 में भी हो रहे थे।
अमेरिकी CDC के मुताबिक, कोविड-19 पर टेंप्रेचर का इफेक्ट होने की वजह से सीजनल था, लेकिन एमपीवी पर टेंप्रेचर का ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, जिसके चलते अलग-अलग मौसम में फैल रहा है। अमेरिका में सर्दी से लेकर बसंत के मौसम में इसके केस पीक पर पर होते हैं।
सवाल-2: क्या HMPV वायरस कोरोना की तरह फैलता है और इसके फैलने की दर क्या है?
जवाब: HMPV वायरस का ट्रांसमिशन रेट यानी फैलने की दर कोरोना वायरस की तुलना में कम है। लेकिन इसके फैलने का तरीका लगभग एक जैसा है…
सवाल-3: क्या कोरोना की तरह इससे भी मौतें हो सकती है?
जवाब: चीन के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताबिक, HMPV वायरस से गंभीर मेडिकल कंडीशन वाले और ज्यादा सेंसिटिव लोगों की मौत हो सकती है।
सवाल-4: इसका सबसे ज्यादा असर किन लोगों पर होगा?
जवाब: इसका सबसे ज्यादा असर 5 साल से कम उम्र के बच्चों और 65 साल से ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को होगा, खासकर समय से पहले जन्मे बच्चे यानी प्री-मैच्योर चाइल्ड में। साथ ही जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर है या जिन्हें अस्थमा जैसी सांस से जुड़ी बीमारी है।
सवाल-5: HMPV वायरस की जांच कैसे होती है और इसे कब करानी चाहिए?
जवाब: लक्षण दिखने पर HMPV वायरस की जांच कराई जा सकती है। इसी जांच भी कोरोना वायरस जैसी ही सरकारी अस्पतालों या प्राइवेट लैब में कराई जा सकती है।
सैंपल प्रोसेस
टेस्ट के तरीके
सवाल-6: क्या कोरोना की तरह इससे बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सैनेटाइजर का इस्तेमाल करना होगा?
जवाब: मौजूदा जानकारी के मुताबिक, HMPV वायरस से बचने के लिए कोरोना जैसे उपाय ही इस्तेमाल किए जा रहे हैं…
सवाल-7: क्या इसे फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन लग सकता है?
जवाब: इस वायरस के कारण कहीं भी लॉकडाउन नहीं लगा है। भारत में भी ऐसी कोई स्थिति नहीं है।
सवाल-8: क्या इससे बचने के लिए कोई वैक्सीन या इलाज है?
जवाब: नहीं, एचएमपीवी वायरस से बचाव के लिए अभी तक कोई टीका नहीं है। न ही कोई विशिष्ट एंटीवायरल थेरेपी है।
सवाल- 9ः क्या एंटीबायोटिक्स दवाइयों से HMPV का इलाज कर सकता है?
जवाबः एंटीबायोटिक्स दवाइयां HMPV वायरस पर काम नहीं करती हैं। एंटीबायोटिक्स केवल बैक्टीरिया का इलाज करते हैं, जबकि HMPV एक वायरस है।
सवाल-10: HMPV वायरस में भारत में कहां-कहां और कितने केस मिले हैं?
जवाब: HMPV के भारत में अब तक 8 केस सामने आ चुके हैं। अहमदाबाद में सोमवार को 2 महीने के बच्चे में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) का संक्रमण मिला। यह बच्चा राजस्थान का है और इलाज के लिए अहमदाबाद पहुंचा है।
इससे पहले, 6 जनवरी की सुबह कर्नाटक में 3 महीने की बच्ची और 8 महीने के बच्चे में यह वायरस मिला था। दोनों बच्चों की जांच बेंगलुरु के एक अस्पताल में की गई थी। पश्चिम बंगाल में भी पांच महीने के बच्चे में इस बीमारी के लक्षण मिले हैं। इसका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। उधर, तमिलनाडु के चेन्नई में भी दो बच्चे संक्रमित मिले हैं। अभी इनके बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।
वहीं 7 जनवरी को महाराष्ट्र के नागपुर में 2 केस सामने आए हैं। इनमें एक 13 साल की लड़की और एक 7 साल का लड़का संक्रमित मिला।
सवाल-11: क्या कोरोना की तरह इसके लिए ऑक्सीजन और हॉस्पिटल में एडमिट होने की जरूरत पड़ेगी?
जवाब: सामान्य मामलों में कोरोना की तरह घर पर ही लोग ठीक हो सकते हैं। यदि पहले से कोई गंभीर रूप से किसी बीमारी पीड़ित है। वो इसकी चपेट में आ जाता है तो अस्पताल में भर्ती होना होगा। अगर पहले से किसी को अस्थमा है तो उसकी हालत इस वायरस से बिगड़ सकती है। ऐसे में उस पेशेंट को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ सकती है।
सवाल-12: भारत सरकार इसको लेकर क्या तैयारी कर रही है?
जवाब: HMPV को लेकर स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि विशेषज्ञों ने यह कह दिया है कि HMPV कोई नया वायरस नहीं है। 2001 में इसकी पहली बार पहचान हुई थी। इसके बाद ये दुनिया में फैला। ये सांस लेने और हवा के माध्यम से फैलता है। ये सभी एज ग्रुप के लोगों पर असर करता है। WHO हालात पर नजर बनाए हुए है और हमसे जल्द ही रिपोर्ट शेयर की जाएगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अलग से बयान जारी करते हुए कहा कि
भारत में ICMR और IDSP के जरिए इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (ILI) और इन्फ्लूएंजा के लिए गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी (SARI) के लिए मजबूत निगरानी सिस्टम मौजूद है। दोनों एजेंसियों के आंकड़ों से पता चलता है कि ILI और SARI मामलों में कोई चिंताजनक बढ़त नहीं है।
सवाल-13: HMPV वायरस कहां से आया और फैलना शुरू हुआ?
जवाब: HMPV वायरस की पहली बार पहचान 2001 में में हुई थी, नीदरलैंड्स के वैज्ञानिकों के एक ग्रुप ने बच्चों में इस वायरस के होने का पता लगाया था। रॉयटर्स के मुताबिक, 2011-12 में अमेरिका, कनाडा और यूरोप में एचएमपीवी के मामले सामने आए थे। वर्तमान में मीडिया रिपोट्र्स के अनुसार ये चीन से ट्रैवल करते हुए भारत पहुंचा है।
सवाल-14: क्या HMPV वायरस कोरोना की तरह एक से ज्यादा बार हो हो सकता है?
जवाब: हां, HMPV कोरोना की तरह दोबारा या अधिक बार भी प्रभावित कर सकता है। दोबारा होने की कंडीशन उन मरीजों के लिए है जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर हैं या वो दूसरी किसी बीमारी से पीड़ित हैं। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्ति को छोड़कर दोबारा होने का खतरा कम है। अगर दोबारा ये वायरस लगता है तो घबराने की जरूरत नहीं है। दवाओं से ठीक हो जाएगा।
सवाल-15: इससे इन्फैक्टेड व्यक्ति को भविष्य में हेल्थ इशू हो सकते हैं?
जवाब: पीसीएम वायरस से इन्फैक्टेड व्यक्ति पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। यदि कोई व्यक्ति निमोनिया से पीड़ित रहा हो और उसके बाद इस वायरस के संपर्क में आया हो तो उसे भविष्य में सांस संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। यदि पहले से किसी मरीज को अस्थमा है तो उसकी स्थिति और बिगड़ सकती है।
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रिसर्च सहयोग- आयुष अग्रवाल
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