अंग्रेजों ने हंसी-खुशी नहीं बसाये थे ये हिल स्टेशन्स, भयंकर गर्मी से बहाल होकर भागने लगे थे पहाड़ों की तरफ। …और पढ़ें
भारत में अंग्रेजों के बसाये गए हिल स्टेशन्स (Image Source: AI Generated)
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अंग्रेज भारत में बेहतर जीवन की तलाश में आए थे, उन्होंने भारत को वैसा बनाने की पूरी कोशिश की थी जैसा इंग्लैंड हुआ करता था। विदेशी जीवनशैली के आदि गोरों को व्यापार के लिए तो परिस्थितियां अनुकूल लगीं लेकिन भयंकर गर्मी वो बर्दाश्त नहीं कर पाए। विविधता वाले इस भारत में हर तरह का मौसम होता है, यह उन्हें मालूम था। ऐसे में उन्होंने ठंडे और बर्फीले इलाकों का रुख किया। यहीं से हमारे देश में हिल स्टेशनों की कहानी शुरू हुई।
आइए समय से थोड़ा पीछे चलते हुए जानते हैं कि अंग्रेजों ने भारत के किन इलाकों को छुट्टियां बिताने के लिए ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया था:
अंग्रेजों ने साल 1823 में मसूरी की खोज की थी, उस समय ब्रिटिश अधिकारी कैप्टन फ्रेड्रिक यंग और मिस्टर शोर देहरादून में शिकार पर निकले थे। तब पहाड़ों की चढ़ाई करते हुए उन्हें मसूरी की खूबसूरती दिखी। पर ऐसा नहीं कि उन्होंने ही पहली बार खोजा हो। उनसे पहले गोरखा सैनिक उमेर थापा मसूरी का पता लगा चुके थे।
दार्जिलिंग पहले सिक्किम और नेपाल का हिस्सा हुआ करता था जिसे सिक्किम के राजा ने साल 1835 में ईस्ट इंडिया कंपनी को एक उपहार के रूप में दे दिया था। इसके पीछे कहानी कुछ ऐसी थी कि सिक्किम और नेपाल के गोरखाओं में युद्ध हुआ था, इस युद्ध में अंग्रेजों ने नेपाल की मदद की। इसी वजह से 1835 की सुगोली की संधि में उपहार स्वरूप यह क्षेत्र अंग्रेजों को मिला। इसके बाद अंग्रेजों ने इसे हिल स्टेशन बनाने के लिए पूरी प्लानिंग से काम किया था।
शिमला भी भारत का वो इलाका था जिसमें अंग्रेजों को अपने देश की छवि दिखती थी। इस शहर में आज भी कुछ-कुछ इंग्लैंड जैसा दिखता है। इतिहास पर नजर डालें तो साल 1832 में ब्रिटिश सरकार के गवर्नर जनरल लॉर्ड पीटर ऑरोनसन ने शिमला की जमीन महाराजा रणजीत सिंह से ली थी। फिर 1864 में शिमला को अपनी ऑफिशियल समर कैपिटल घोषित कर दिया था।
तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में बसा ऊटी उस समय मद्रास प्रेजिडेंसी का हिस्सा हुआ करता था। इसे अंग्रेजों ने साल 1799 में श्रीरंगपट्टनम की संधि के तहत मैसूर के शासक टीपू सुल्तान से लिया था। बता दें कि इसका नाम पहले उधगमंडलम था जिसे आज शॉर्ट ऊटी कर दिया गया है।
मध्य प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन को ब्रिटिश सेना के कैप्टन जेम्स फोर्सिथ ने साल 1857 में खोजा था। पचमढ़ी का जिक्र उनकी किताब द हाइलैंड्स ऑफ सेंट्रल इंडिया में भी मिलता है। जिसे बाद में साल 1862 में ब्रिटिश सेना की छावनी के तौर पर तैयार किया गया।
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