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राजस्थान में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में पिछले 33 महीनों से लगभग 4500 करोड़ रुपये का भुगतान अटका होने को लेकर प्रदेशभर के ठेकेदार अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं. जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठेकेदारों और औद्योगिक संगठनों ने सरकार को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए ‘भुगतान नहीं तो काम नहीं’ और ‘पानी रोको आंदोलन’ शुरू करने की चेतावनी दी है. ठेकेदारों का कहना है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो शहरों से लेकर गांवों तक पेयजल सप्लाई बाधित की जा सकती है.
कॉन्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई ने कहा कि सरकार ने समय पर भुगतान नहीं किया तो जल सप्लाई रोकने तक की स्थिति बन सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और विभाग की होगी. उन्होंने बताया कि आंदोलन को अब हर जिले तक फैलाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन भी किए जाएंगे.
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उद्योग संगठनों ने भी इस आंदोलन का समर्थन किया है और चेतावनी दी है कि भुगतान नहीं होने से प्रदेश में जल संकट जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है.
पाइप इंडस्ट्री पर असर
प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन राजस्थान के पूर्व अध्यक्ष सुमेर सिंह शेखावत ने बताया कि भुगतान अटकने से पाइप इंडस्ट्री पर गंभीर असर पड़ा है. करीब 1000 करोड़ रुपये उद्योग में फंसे हुए हैं, जिससे उत्पादन और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. इस संकट से हजारों लोगों के रोजगार पर खतरा मंडरा रहा है.
ठेकेदारों का कहना है कि भुगतान संकट का असर केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं है बल्कि करीब 5 लाख लोगों के रोजगार पर सीधा खतरा पैदा हो गया है. सरकारी नियमों के अनुसार 15 दिन में भुगतान होना चाहिए, लेकिन 33 महीनों से भुगतान लंबित रहने के कारण कई ठेकेदार कर्ज में डूब चुके हैं और मजदूरों को वेतन देना तक मुश्किल हो गया है. इस स्थिति के चलते निर्माण और सप्लाई से जुड़े कई काम प्रभावित हो रहे हैं.
बड़े प्रोजेक्ट ठप
ठेकेदारों ने बताया कि जल जीवन मिशन और पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) जैसे बड़े प्रोजेक्ट लगभग ठप हो गए हैं. जल भवन में ठेकेदारों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है, जिसमें उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं. ठेकेदारों का आरोप है कि सरकार लगातार आश्वासन दे रही है, लेकिन भुगतान नहीं किया जा रहा.
ठेकेदारों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा, जिससे औद्योगिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं. गर्मी के मौसम में जल आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी जताई गई है.
सरकार के साथ बैठक
गुरुवार शाम 5:30 बजे PHED के एसीएस हेमंत गैरा और जल जीवन मिशन के एमडी रंजन के साथ संघर्ष समिति की महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार से 200 से 300 करोड़ रुपये की राशि शीघ्र उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है ताकि ठेकेदारों को आंशिक भुगतान किया जा सके.
अधिकारियों ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार का बजट मई माह में मिलने की संभावना है, जिसके बाद उपलब्ध राशि का वितरण किया जाएगा. हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि केंद्र से कितना बजट मिलेगा या कब तक मिलेगा. वर्तमान में लगभग 3500 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित होने से ठेकेदारों में गहरी चिंता और असंतोष बना हुआ है.
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