मक्का: 'अनैतिक हरकत' के आरोप में मौत की सज़ा देने पर जमात-ए-इस्लामी की ये टिप्पणी और बांग्लादेश के मीडिया में ऐसी चर्चा – BBC

इमेज स्रोत, Getty Images
मक्का की एक मस्जिद में 'अनैतिक' हरकतें करने के आरोप में एक बांग्लादेशी कपल को मौत की सज़ा दिए जाने के बाद बांग्लादेश में आक्रोश से अधिक निराशा देखी जा रही है.
जेद्दा स्थित बांग्लादेशी दूतावास के सूत्रों ने पुष्टि की है कि सऊदी अधिकारियों ने दोनों नागरिकों की हिरासत, मुक़दमे की सुनवाई और उन्हें मौत की सज़ा दिए जाने के बारे में दूतावास को कोई जानकारी नहीं दी थी.
बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा है कि सऊदी अरब से जानकारी साझा करने में कुछ 'ख़ामियां' थीं, जिन पर संबंधित पक्ष से बातचीत हो रही है.
वहीं बांग्लादेश के विपक्ष नेता और जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफ़ीक़ुर रहमान ने सवाल किया है कि सज़ा पर अमल किए जाने के बाद सरकार को पता चला, तो क्या इस मामले में दूतावास और वाणिज्यिक दूतावास की कोई भूमिका थी.
कपल को सजा देने के निचली अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सर्वोच्च न्यायालय में अपील भी की गई थी. हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने फ़ैसले को बरकरार रखते हुए मौत की सज़ा कायम रखी.
इस फ़ैसले पर आगे की कार्रवाई करते हुए शाही आदेश भी जारी कर दिया गया. शाही आदेश पर अमल करते हुए 14 अक्टूबर को दोनों को मौत की सज़ा दे दी गई थी.
बांग्लादेश के मुख्यधारा की मीडिया और सोशल मीडिया में भी इस मामले को लेकर काफ़ी चर्चा है.
इमेज स्रोत, Getty Images
जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफ़ीक़ुर रहमान ने एक्स पर एक लंबी पोस्ट में पूछा है कि क्या बांग्लादेश के दूतावास ने अपनी ज़िम्मेदारियां निभाईं थीं?
समाप्त
देश – दुनिया की बड़ी ख़बरें जिन्होंने बटोरी सुर्खियां.
एपिसोड
समाप्त
उन्होंने लिखा, ''हाल ही में सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में दो बांग्लादेशी नागरिकों को दी गई मौत की सज़ा पर अमल किया गया है. इस मामले को लेकर देश के विभिन्न जनसंचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर चर्चा और आलोचना जारी है.
बांग्लादेश की बड़ी आबादी सऊदी अरब समेत मध्य-पूर्व के विभिन्न देशों में काम करती है. विदेशों में रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों की ज़िंदगी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर समय-समय पर चर्चा और आलोचना होती रही है.
विदेशों में रहने वाले नागरिकों के हितों की रक्षा करने के साथ-साथ देश की गरिमा और हितों की रक्षा के लिए विभिन्न देशों में हमारे दूतावास और वाणिज्यिक दूतावास मौजूद हैं.
यह जानना ज़रूरी है कि क्या इन दोनों व्यक्तियों की न्यायिक प्रक्रिया में हमारे दूतावास या वाणिज्यिक दूतावास की कोई भूमिका थी. बांग्लादेश के विभिन्न सरकारी अधिकारियों के बयानों से स्वाभाविक रूप से सवाल उठे हैं, क्योंकि उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी सज़ा पर अमल किए जाने के बाद ही मिली.
निस्संदेह, हर देश अपने मौजूदा क़ानूनों के तहत अदालतों में न्यायिक प्रक्रिया पूरी करता है. चूंकि ये दोनों बांग्लादेशी नागरिक थे और मामला मौत की सज़ा से जुड़ा है, इसलिए सरकार को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस मामले में दूतावास ने अपनी ज़िम्मेदारियां निभाई थीं या नहीं.
जिस अपराध के लिए इन दोनों को मौत की सज़ा दी गई है, उसके संबंध में उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह जानना भी ज़रूरी है कि अगर विदेशों में रहने वाले बांग्लादेशी नागरिकों के बीच इस तरह की गतिविधियों के मामले सामने आते हैं, तो सरकार या दूतावास उन्हें रोकने के लिए क्या पहल करता है. इस मुद्दे पर सरकार और बांग्लादेशी दूतावास को अपना रुख़ स्पष्ट करना चाहिए.
यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में किसी भी प्रवासी नागरिक को क़ानूनी प्रक्रिया से गुज़रते समय दूतावास से मिलने वाली सहायता से वंचित न रहना पड़े. साथ ही, विदेशों में रहने वाले नागरिकों को अपने देश की गरिमा की रक्षा करने और संबंधित देश की क़ानून-व्यवस्था का पालन करने के प्रति जागरूक करना सरकार की प्रमुख ज़िम्मेदारियों में से एक है.
जिन दो व्यक्तियों को मौत की सज़ा दी जा चुकी है, उनके मामलों पर चर्चा और समीक्षा करने के बजाय बेहतर होगा कि हर कोई अपने-अपने रुख़ और भूमिका की समीक्षा करे.''
समाप्त
इमेज स्रोत, Getty Images
बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इस घटना को बांग्लादेश के लिए 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है.
'प्रथम आलो' अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''पिछले बुधवार को सऊदी अरब और मध्य-पूर्व के अन्य हिस्सों के कई मीडिया संस्थानों ने ख़बर दी कि पवित्र शहर मक्का के मस्जिद परिसर में "अनैतिक कृत्य" करने के आरोप में बांग्लादेश के दो नागरिकों को मौत की सज़ा दे दी गई. इन ख़बरों के बाद बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका स्थित सऊदी दूतावास से संपर्क किया था.''
जानकारी मिलने में देरी पर हुमायूं कबीर ने 'निराशा' व्यक्त की, हालांकि उनके बयान से ज़ाहिर होता है कि बांग्लादेश सरकार को इस बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी.
हुमायूं कबीर ने कहा, "दोनों देशों ने जिनेवा कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए हैं. अगर हम यहां किसी सऊदी नागरिक को आपराधिक मामले में पकड़ते हैं, तो हम निश्चित रूप से सऊदी अधिकारियों को इसकी जानकारी देंगे. उस व्यक्ति को कांसुलर सेवाएं पाने का अधिकार होगा. यानी कम से कम सऊदी अधिकारियों को यह बताया जाएगा कि उनका एक नागरिक बांग्लादेश में आपराधिक मामले में शामिल रहा है."
"इसी तरह, हम उम्मीद करते हैं कि सऊदी अरब या कोई भी अन्य देश अपने यहां हमारे किसी नागरिक को हिरासत में लेने पर हमें इसकी जानकारी देगा. हमारी यही अपेक्षा है."
समाप्त
इमेज स्रोत, FAYEZ NURELDINE/AFP via Getty Images
बांग्लादेश की प्रमुख अंग्रेज़ी न्यूज़ वेबसाइट द डेली स्टार में ख़ान ख़ालिद अदनान ने लिखा है कि मौत की सज़ा दिए जाने की घटना ने कूटनीतिक दोस्ती की सीमाओं को सामने ला दिया है.
उन्होंने बांग्लादेश के राजनयिक मिशन भूमिका की भी समीक्षा की मांग की है.
ख़ान ख़ालिद अदनान ने अपने लेख में लिखा, "बांग्लादेश ने 2025 में सऊदी अरब में 7.5 लाख से अधिक कामगार भेजे. हज और उमरा जैसी धार्मिक यात्राएं भी दोनों देशों के बीच एक मज़बूत संबंध का आधार हैं. इन रिश्तों से यह अपेक्षा और मज़बूत होनी चाहिए कि दोनों देश कांसुलर सहयोग भरोसेमंद तरीक़े से निभाएं."
"ढाका को संबंधित व्यक्तियों की पहचान, अदालती फ़ैसले, गिरफ़्तारी और हिरासत की तारीख़ों के साथ-साथ क़ानूनी सहायता और अनुवाद की सुविधा मिलने से जुड़े रिकॉर्ड मांगने चाहिए. उसे अपनी जांच के निष्कर्ष संबंधित परिवारों को बताने चाहिए और निजी जानकारी की गोपनीयता बनाए रखते हुए संस्थागत स्तर पर हुई किसी भी चूक को सार्वजनिक करना चाहिए."
"अगर अधिकारियों को वास्तव में मामले की जानकारी नहीं थी, तो बिना जांच के उनकी लापरवाही मान लेना उचित नहीं होगा. जहां नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हो, वहां बांग्लादेश को जवाबदेही तय करने और उचित मुआवजे के लिए क़दम उठाने चाहिए."
"भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए बांग्लादेश को एक ऐसी व्यवस्था पर बातचीत करनी चाहिए, जिसके तहत हिरासत में लिए गए नागरिकों के बारे में समय पर दूतावास को सूचना देना अनिवार्य हो. यह सूचना संबंधित व्यक्ति की इच्छा को ध्यान में रखते हुए दी जानी चाहिए. साथ ही, मौत की सज़ा पर अमल करने से पहले भी सूचना देने की व्यवस्था होनी चाहिए."
"इसके साथ क़ानूनी सहायता के लिए पर्याप्त बजट और मौत की सज़ा वाले मामलों की नियमित निगरानी भी ज़रूरी है. तब तक बांग्लादेश को उन अन्य मामलों में सज़ा पर रोक लगाने की मांग करनी चाहिए, जिनमें कांसुलर सहायता की पुष्टि नहीं हुई है."
"किसी व्यक्ति को फांसी दिए जाने के बाद राजनयिक विरोध दर्ज कराने से उसे आरोपों को चुनौती देने, सज़ा के ख़िलाफ़ अपील करने या अपने प्रियजनों से आख़िरी बार मिलने का मौक़ा वापस नहीं मिल सकता. द्विपक्षीय संबंधों की असली कसौटी यह नहीं है कि दोनों देशों की सरकारें एक-दूसरे के बारे में कितनी अच्छी बातें कहती हैं, बल्कि यह है कि उनका सहयोग लोगों की सुरक्षा तब सुनिश्चित करता है या नहीं, जब ऐसा करना अभी संभव हो."
समाप्त
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने सऊदी अरब के मक्का में हाल ही में दो बांग्लादेशियों को फांसी दिए जाने के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए रविवार को ढाका में सऊदी राजदूत अब्दुल्ला बिन जाफर एच. बिन अबिया को बैठक के लिए तलब किया.
जिन दो बांग्लादेशियों को फांसी दी गई, उनमें से एक के परिवार ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि उसने एक हफ़्ते पहले जेल से अपने परिवार से संपर्क किया था, हालांकि उसने इस बात का कोई संकेत नहीं दिया था कि उसे मौत की सज़ा दी जा सकती है.
मृतक की मां ने पुष्टि की कि मौत की सज़ा पाने वाला व्यक्ति उनका बेटा है. उन्होंने अपने बेटे के शव को लाने की व्यवस्था करने का अनुरोध करते हुए बीबीसी बांग्ला को बताया, "मैंने तीन साल और तीन महीने से अपने बेटे का चेहरा नहीं देखा है. मैं उसे आख़िरी बार देखना चाहती हूं."
स्थानीय लोगों ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि जिस व्यक्ति को मौत की सज़ा सुनाई गई है, उसकी उम्र लगभग 22 साल है. उसके पिता पहले दिहाड़ी मज़दूर के रूप में दूसरों की ज़मीनों पर काम करते थे. अब बुढ़ापे के कारण वे काम करने में असमर्थ हैं.
पारिवारिक आर्थिक तंगी के कारण एक एजेंट ने उसे विदेश भेजा था. लेकिन सऊदी अरब जाने के महज छह महीने बाद, 2023 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
दो भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़ा, यह लड़का रियाद में सफाईकर्मी के रूप में काम करता था. ऐसा माना जाता है कि वह उसी मस्जिद में सफाईकर्मी के रूप में काम करता था, जहाँ उस पर 'अनैतिक' गतिविधियों का आरोप लगाया गया है.
परिवार का कहना है कि जेल जाने के बाद, वह लगभग हर हफ़्ते कम से कम संक्षिप्त रूप से अपने परिवार से फोन पर बात करता था. उस समय उसने कहा था कि उसका उस महिला के साथ प्रेम संबंध था.
व्यक्ति की मां ने बीबीसी बांग्ला को बताया, "शुरुआत में, भाषा की बाधा के कारण मेरा बेटा किसी को कुछ भी समझा नहीं पा रहा था."
उन्होंने फांसी से तीन दिन पहले, रविवार को आखिरी बार अपने परिवार से बात की थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट… सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
शॉर्ट वीडियो का अंत
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
© 2026 BBC. बाहरी साइटों की सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है. बाहरी साइटों का लिंक देने की हमारी नीति के बारे में पढ़ें.

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News