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उत्तर कर्नाटक के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायक भरमगौड़ा (राजू) कागे ने गुरुवार को विधानसभा में एक बार फिर उत्तर कर्नाटक को अलग राज्य बनाने की मांग दोहराई. कागवाड़ से विधायक कागे ने यह मुद्दा उत्तर कर्नाटक के विकास पर चल रही चर्चा के दौरान उठाया.
इससे पहले नवंबर में कागे ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस क्षेत्र के 15 जिलों- बिदर, कलबुर्गी, विजयपुरा, यादगीर, बागलकोट, बेलगावी, धारवाड़, गदग, कोप्पल, रायचूर, उत्तर कन्नड़, हावेरी, विजयनगर, बल्लारी और दावणगेरे- के लिए अलग राज्य की मांग की थी. उन्होंने प्रशासनिक सुविधा और समग्र विकास को इसका कारण बताया.
‘कडूर को 16 करोड़ तो कागवाड़ को क्यों नहीं?’
कागे ने विधानसभा में कहा, ’25 सितंबर की कैबिनेट बैठक में कडूर तालुका (चिकमगलूर जिला) के लिए पेयजल परियोजना में 16 करोड़ रुपये मंजूर किए गए. वही बढ़ोतरी मेरे कागवाड़ तालुका के लिए क्यों नहीं की गई? मैं इस व्यवस्था को समझ नहीं पा रहा हूं.’
बीजेपी ने किया समर्थन
विपक्ष में बैठे कुछ बीजेपी सदस्यों ने मेज थपथपाकर इसका समर्थन किया. कागे ने उन्हें रोकते हुए कहा, ‘टीवी पर ऐसा लगेगा कि राजू कागे सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं. मैं सरकार के पक्ष या विपक्ष में नहीं, सिर्फ अपने क्षेत्र की समस्या उठा रहा हूं.’
बीजेपी के कई विधायकों ने कहा कि वे इसलिए तालियां बजा रहे हैं क्योंकि कागे सच्चाई साहस के साथ बोल रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘जब सत्ताधारी दल का विधायक ही फंड की कमी से जूझ रहा है, तो विपक्ष की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है.’
‘आखिरी सांस तक अलग राज्य की मांग उठाता रहूंगा’
समान फंडिंग की मांग करते हुए कागे ने पूछा कि कडूर के लिए 16 करोड़ दिए गए, तो उनके क्षेत्र के लिए क्यों नहीं? उन्होंने कहा, ‘यह भेदभाव क्यों? उत्तर कर्नाटक के लोगों ने क्या पाप किया है? इसी वजह से हम अलग राज्य की मांग कर रहे हैं.’ कागे ने कहा, ‘चाहे सभी 224 विधायक और कितने भी संगठन विरोध करें, मैं अलग राज्य के लिए लड़ता रहूंगा. चाहे मैं जिंदा रहूं या मर जाऊं, आखिरी सांस तक यह मांग उठाता रहूंगा.’
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