महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक-2 तैयार करा रही राज्य सरकार उद्यमिता, रोजगार, कौशल विकास और आजीविका में महिलाओं की भागीदारी का जिलावार मूल्यांकन
लखनऊ, विशेष संवाददाता
राज्य सरकार महिला आर्थिक सशक्तिकरण सूचकांक-दो तैयार करेगी। इसके तहत महिलाओं के सामाजिक अध्ययन का पता लगाया जाएगा। उद्यमिता, रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास, आजीविका, सुरक्षा तथा आवागानम सुविधाओं का जिले स्तर पर आकलन किया जाएगा। सर्वेक्षण आंकड़ों के आधार पर महिलाओं की आर्थिक भागीदारी का पता लगाया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी नियोजन विभाग को सौंपी गई है। यह जानकारी बुधवार को नियोजन विभाग के अधिकारियों ने दी।
इसके लिए 15 विभागों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर 49 संकेतक निर्धारित किए गए हैं। इनमें महिलाओं की भागीदारी से संबंधित योजनाओं के परिणामों को प्रमुखता दी गई है। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2024-25 में सर्वे कराया गया था। रिपोर्ट के आधार पर सरकारी योजनाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत तय की गई है।
पांच क्षेत्रों में होगा मूल्यांकन
महिला आर्थिक सशक्तीकरण सर्वेक्षण में शिक्षा एवं कौशल विकास को 22.4 प्रतिशत, उद्यमिता को 22.1 प्रतिशत, रोजगार को 21.9 प्रतिशत, आजीविका को 17.4 प्रतिशत तथा आवागमन, सुरक्षा एवं समावेशी बुनियादी ढांचे को 16.1 प्रतिशत वेटेज दिया गया है। इसके तहत ओडीओपी, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना, पीएम स्वनिधि, स्वयं सहायता समूहों, आईटीआई, पॉलीटेक्निक, रोजगार मेलों और अन्य योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी का आकलन शुरू किया गया है।
स्वयं सहायता समूहों में महिला हिस्सेदारी बढ़ी
पहली रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण परिवारों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने का अनुपात भी 24.9 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत पहुंचा है। उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत महिला उद्यमियों की संख्या 2023-24 के 1.87 लाख से बढ़कर 2025-26 में 2.90 लाख हो गई। ओडीओपी प्रशिक्षण एवं टूलकिट कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी 58.2 प्रतिशत से बढ़कर 63.1 प्रतिशत तथा विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना में 49.5 प्रतिशत से बढ़कर 63.3 प्रतिशत हो गई।
स्ट्रीट वेंडर्स के डिजिटल सशक्तीकरण में भी प्रगति
पीएम स्वनिधि योजना के तहत महिला स्ट्रीट वेंडर्स की डिजिटल भागीदारी में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में महिला लाभार्थियों में 54 प्रतिशत डिजिटल रूप से सक्रिय थीं, जो 2025-26 में बढ़ कर 69 प्रतिशत हो गईं। वहीं तीसरी किस्त का ऋण प्राप्त करने वाली महिला लाभार्थियों का अनुपात 12 प्रतिशत से बढ़ कर 17 प्रतिशत पहुंचा है।
27 संकेतकों में सकारात्मक रुझान
इंडेक्स में शामिल 45 संकेतकों के रुझानों के विश्लेषण में 27 में सकारात्मक प्रगति, 15 में नकारात्मक रुझान और तीन में स्थिति स्थिर पाई गई। एमएसएमई विभाग के सभी पांच संकेतकों में सकारात्मक रुझान दर्ज किया गया। शहरी विकास विभाग के तीनों और संस्थागत वित्त विभाग के दोनों संकेतकों में भी सकारात्मक प्रगति सामने आई है।
जिलावार समीक्षा और जवाबदेही पर जोर
वूमेन इकोनॉमिक एंपावरमेंट इंडेक्स के माध्यम से जिलों के प्रदर्शन की तुलना कर कमजोर क्षेत्रों की पहचान की जा रही है। विभागीय स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, नियोजन विभाग के प्लेटफॉर्म पर डैशबोर्ड और क्षेत्रवार जेंडर एक्शन प्लान तैयार करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। परिवहन और व्यावसायिक शिक्षा के लिए क्षेत्र-विशिष्ट कार्ययोजनाएं भी विकसित की गई हैं।
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