नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र से पहले तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में टूट ने ‘इंडिया गठबंधन’ की चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के रुख ने भी घटक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। विपक्ष को भरोसा है कि एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार भाजपा की अगुवाई वाले एनडीए के तरफ नहीं झुकेंगे। हालांकि, महाराष्ट्र कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) पवार की उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मुलाकात को लेकर हमलावर हैं। विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि शरद पवार एनडीए में नहीं जाएगें। वह विपक्ष का बड़ा चेहरा हैं और उनकी पार्टी एनसीपी (एसपी) इंडिया गठबंधन का मजबूत घटक दल है। पर पिछले कुछ माह पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और महाराष्ट्र में शिवसेना (यूबीटी) में जो कुछ हुआ है, उसको देखते हुए कुछ डर जरूर है। महाराष्ट्र कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण का कहना है कि एनसीपी (एसपी) के भी कुछ सांसद पाला बदलने की फिराक में हैं। ऐसे में शरद पवार की शिंदे से मुलाकात अहम हो जाती है。
वरिष्ठ नेता ने कहा कि इंडिया गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता शरद पवार के संपर्क में हैं। एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले का बयान इन कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है। सुप्रिया ने इन खबरों से साफ इनकार किया है कि उनकी पार्टी एनडीए में शामिल होने जा रही है। इसके साथ एनसीपी और एनसीपी (एसपी) के विलय की खबरों को भी उन्होंने नकार दिया। सुले ने कहा कि इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। शरद पवार की उपमुख्यमंत्री शिंदे से मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट थी।
एनसीपी (एसपी) अध्यक्ष शरद पवार काफी दिनों से एनसीपी के आपस में विलय की कोशिश करते रहे हैं। एनसीपी अध्यक्ष अजीत पवार की मौजूदगी में भी इस तरह की खबरें आई थीं, पर उनके निधन के बाद चर्चा बंद हो गई। महाराष्ट्र कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि अजीत पवार के निधन के बाद प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और प्रफुल पटेल उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के तौर तरीकों से बहुत खुश नहीं है। इन नेताओं का मानना है कि अजीत पवार की अनुपस्थिति में पार्टी को एकजुट रखना भी मुश्किल है।
ऐसे में एनसीपी के दोनों धड़े एक हो जाते हैं, तो प्रदेश और केंद्र की राजनीति में पार्टी की अहमियत बढ़ जाएगी। सूत्रों का कहना है कि एनसीपी विधायकों का एक बड़ा हिस्सा भी विलय को लेकर सकारात्मक है। पर वह इंडिया गठबंधन में शामिल होकर विपक्ष की राजनीति करने के बजाए एनडीए के साथ रहना चाहते हैं। ऐसे में शरद पवार का रुख बहुत अहम होगा। एनसीपी (एसपी) के लोकसभा में आठ सांसद और 10 विधायक हैं। वहीं एनसीपी का एक लोकसभा सांसद और 41 विधायक हैं।
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