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ईरान की जंग में खाड़ी देशों में रहे भारतीय भी डर के माहौल में रह रहे हैं. लेकिन, आस-पास गिरती मिसाइलों, लगातार हो रहे ब्लास्ट और बार-बार बज रहे सायरन के बीच भारत की नर्सें देवदूत बनकर काम कर रही हैं. वे जंग के इस डरावने माहौल में भी अपने दिन की शुरुआत हमेशा की तरह ही कर रही हैं. लेकिन, कुछ दिनों से वो जो माहौल देख रही हैं, वो वाकई डरा देने वाला है.
कुवैत से करीब 32 किलोमीटर इराक की सीमा के पास अल जहरा में काम कर रही एक नर्स ने बताया कि उनके क्लिनिक के ऊपर आसमान में मिसाइलें और ड्रोन मंडरा रहे थे. धमाके रुक-रुक कर हो रहे थे. एक समय वो और उनके साथी घबराकर इमारत से बाहर भागे, सुरक्षा के लिए इधर-उधर हाथ-पैर मारते हुए अपने हॉस्टल लौट गए. बाकी दिन वे अंदर ही रहे, सुनते रहे, इंतजार करते रहे. अब वे अपने काम पर लौट गई हैं.
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, वहां काम कर रही नर्स केरल की नर्स जैस्मीन थॉमस (नाम बदला हुआ) ने बताया कि जब वो काम पर लौटे तो क्लिनिक के दरवाजे खुले थे. वार्ड वैसे ही थे, लेकिन मरीज नहीं आए. मगर भारत की ये नर्से इस माहौल में डटकर स्थिति का सामना करते हुए अपना काम कर रही थीं. वैसे 1990 के दशक का कुवैत युद्ध हो, 2003 का इराक युद्ध हो, सीरिया या मिस्र में हुए गृहयुद्ध हों या वर्तमान पश्चिम एशिया युद्ध… भारतीय नर्सों ने इस स्थिति में भी अग्रिम पंक्ति की भूमिका निभाई है.
अनुमान है कि इस क्षेत्र में 400,000 से 500,000 भारतीय नर्सें कार्यरत हैं. अभी अधिकांश स्थानों पर वे सुरक्षित हैं. फिर भी, मिसाइलों से डर का माहौल है. अभी तक सिर्फ एक नर्स के फंसे होने की जानकारी सामने आई है. इस रिपोर्ट में एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि विदेश में रहने वाली नर्सों के बारे में कोई आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं.
सभी सुरक्षित हैं
ईरान में रह रही नर्सों के अलावा अन्य नर्सें अभी सुरक्षित हैं और यूएई में रह रही एक नर्स का कहना है कि वो सुरक्षित हैं. उन्हें रुक-रुक कर चेतावनी सायरन की आवाज सुनाई देती है, लेकिन इसके अलावा कोई तत्काल खतरा नहीं है. अस्पताल सामान्य रूप से काम कर रहे हैं. सरकार हमलों को बेअसर कर रही है.
रिपोर्ट के अनुसार, केरल माइग्रेशन सर्वे 2023 के आधार पर पश्चिम एशिया में लगभग दो मिलियन केरलवासी कार्यरत हैं. इनमें से करीब 20 प्रतिशत, यानी लगभग 4 लाख महिलाएं हैं. इनमें से लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं, यानी लगभग 2 लाख नर्सें हैं. पश्चिम एशिया में भारतीय नर्सों की संख्या 4 लाख से 5 लाख के बीच हो सकती है. कुछ ऑनलाइन अनुमानों के अनुसार, इस क्षेत्र में नर्सिंग स्टाफ की कुल संख्या लगभग दस लाख तक पहुंच सकती है.
बता दें कि रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान में अब तक लगभग 787 लोग मारे जा चुके हैं. कुवैत में ईरानी हमलों में तीन अमेरिकी सैनिक शहीद हो गए हैं और पांच गंभीर रूप से घायल हुए हैं. संयुक्त अरब अमीरात में तीन मौतें और 58 घायल, बहरीन में एक मौत और तीन घायल तथा कतर में 16 घायल दर्ज किए गए हैं.
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