मीनाक्षी नटराजन के नामांकन विवाद पर फैसला जल्द! EC ले रहा कानून विशेषज्ञों से सलाह – AajTak

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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के मामले में निर्वाचन आयोग जल्द फैसला ले सकता है. आयोग कांग्रेस की आपत्तियों पर कानूनी और संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक, आयोग अपने कानूनी पैनल के वरिष्ठ वकीलों और चुनावी प्रक्रिया के विशेषज्ञों से सलाह-मशविरा कर रहा है. उनकी राय मिलने के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
निर्वाचन आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि नामांकन वापस लेने की अंतिम समय सीमा समाप्त होने से पहले ही आयोग अपना फैसला सार्वजनिक कर सकता है. राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने से पहले इस मामले पर स्पष्टता आने की संभावना है. इस बीच बुधवार को कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात के बाद कहा कि उन्हें अब भी देश की संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर पूरा भरोसा है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपना पक्ष आयोग के सामने रख दिया है और अब फैसले का इंतजार कर रही है. मीनाक्षी नटराजन ने कहा, ‘हमें संवैधानिक संस्थाओं पर पूरा विश्वास है और इसी भरोसे के साथ हम यह लड़ाई लड़ रहे हैं. चुनाव आयोग ने आज हमारी बात सुनी है और अब हम उसके निर्णय का इंतजार कर रहे हैं. हमें अब भी विश्वास है कि लोकतंत्र में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होगी.’ उन्होंने बताया कि पार्टी की ओर से वरिष्ठ वकीलों ने आयोग के समक्ष कानूनी पक्ष रखा है और कांग्रेस पूरी मजबूती से अपना मामला लड़ रही है.
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निर्वाचन आयोग पहुंचा था कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल
इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन आयोग पहुंचा था. प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी और विवेक तन्खा समेत जयराम रमेश, रणदीप सिंह सुरजेवाला, दिग्विजय सिंह और भूपेश बघेल शामिल थे. नेताओं ने आयोग से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की. बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में अभिषेक मनु सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने के फैसले की कड़ी आलोचना की. उन्होंने इसे कानूनी रूप से पूरी तरह गलत और असंगत बताया.
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘हमने आयोग को विस्तार से बताया है कि रिटर्निंग ऑफिसर का आदेश पूरी तरह त्रुटिपूर्ण है. यह ऐसा है जैसे कोई 2+2 का जवाब 4 की जगह 7 लिख दे.’ उन्होंने तर्क दिया कि नामांकन खारिज करने का फैसला जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 33ए की गलत व्याख्या के आधार पर लिया गया. उनके मुताबिक, इस धारा के तहत उम्मीदवार को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों की जानकारी देनी होती है, जिनमें अदालत आरोप तय कर चुकी हो और जिनमें दो वर्ष से अधिक की सजा का प्रावधान हो.
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नामांकन रद्द करने का कानूनी आधार नहीं: सिंघवी
सिंघवी ने दावा किया कि जिस मामले का हवाला देकर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किया गया, वह अभी संज्ञान लेने के चरण तक भी नहीं पहुंचा है. ऐसे में नामांकन रद्द करने का आधार कानूनी रूप से टिक नहीं सकता. कांग्रेस ने चुनाव आयोग से संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल कर तत्काल राहत देने की मांग भी की है. पार्टी ने हरियाणा और गुजरात के कुछ पुराने मामलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में आयोग पहले भी हस्तक्षेप कर चुका है.
कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि वह पूरे मामले की जांच करेगा और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर फैसला लेगा. बता दें कि 9 जून को मध्य प्रदेश से राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया था. इस फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया. मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के चुनाव के लिए मतदान 18 जून को होना है.
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