मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए महाराष्ट्र में पहले स्टील ब्रिज को सोमवार (28 सितंबर, 2026) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया है. रेल मंत्रालय ने स्टील ब्रिज के लॉन्च को भारत की बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है. यह 1,405 मीट्रिक टन के वजन वाला और 100 मीटर लंबा स्टील का बना पुल है, जो महाराष्ट्र के ठाणे जिले में स्थित भिवंडी के दिघे-अंजूर गांव में नेशनल हाईवे-3 (नासिक हाईवे) के ऊपर बनाया गया है.
1,300 KM दूर त्रिची के वर्कशॉप में तैयार की गई पुल की संरचना
इस संबंध में नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने सोमवार (28 सितंबर, 2026) को आधिकारिक बयान जारी कर इस स्टील ब्रिज के बारे में पूरी जानकारी साझा की. बयान में कहा गया, ‘यह महाराष्ट्र के मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए पूरा किया गया पहला स्टील ब्रिज है. इस पुल की खास बात यह है कि इसे लॉन्चिंग की जगह से करीब 1,300 किलोमीटर दूर तमिलनाडु के त्रिची स्थित एक वर्कशॉप में तैयार किया गया है. इसके बाद स्टील पुल के पूरे स्ट्रक्टर को ट्रेलरों के जरिए महाराष्ट्र लाया गया और साइट पर असेंबल कर स्थापित किया गया.’
स्टील ब्रिज के बारे में NHSRCL ने दी जानकारी
A landmark milestone for India’s Bullet Train Project! 🚄🇮🇳
A 100-metre, 1,405 MT steel bridge has been successfully launched over NH-3 at Dive-Anjur, Bhiwandi, the first steel bridge completed for the Mumbai–Ahmedabad Bullet Train Project in Maharashtra.#BulletTrain pic.twitter.com/U30bK9Hn40
First Steel Bridge launched in Maharashtra for Mumbai-Ahmedabad Bullet Train Project.
A 100 m long steel bridge weighing 1405 MT and standing 14 meter high, has been launched over the Mumbai–Nashik Highway in Thane, launched for the project.
The bridge reflects the growing use… pic.twitter.com/a0mDQn34Ti
NHSRCL ने कहा, ‘यह सिर्फ एक जगह पर तैयार करने के बाद दूसरी जगह पर स्थापित किया गया स्टील स्ट्रक्चर नहीं है, बल्कि यह देश की सबसे तकनीकी रूप से सबसे एडवांस रेल प्रोजेक्ट्स में से एक के लिए कॉम्प्लेक्स इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और उसे तय जगह पर पहुंचाने में भारतीय इंडस्ट्री की बढ़ती क्षमता को दिखाता है.’
बयान में कहा गया, ‘पुल के निर्माण में डिजाइन, ड्रॉइंग और विशेषताओं के अनुसार सटीक कटिंग, ड्रिलिंग, वेल्डिंग और पेटिंग का काम किया गया. स्टील के हर एक प्रोडक्शन बैच की अल्ट्रासॉनिक टेस्टिंग (UT) की गई. वेल्डरों और सुपरवाइजरों को इंटरनेशनल वेल्डिंग एक्सपर्ट्स की तरफ से सर्टिफाइड किया गया. यह प्रोजेक्ट भारत की लगातार मजबूत होती स्वदेशी तकनीकी और मेटेरियल निर्माण क्षमता को दिखाती है. साथ ही, यह देश के हाई-स्पीड रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में मेक इन इंडिया के विजन को भी दर्शाती है.’
100 मीटर लंबे स्टील पुल को कैसे किया गया स्थापित?
NHSRCL ने कहा, ‘साइट पर 100 मीटर लंबे पुल को जमीन से करीब 17.5 मीटर की ऊंचाई पर अस्थायी ट्रेस्टल्स के ऊपर असेंबल किया गया. इसके लिए 22 स्किड अरेंजमेंट और 54,076 टॉर-शियर टाइप हाई स्ट्रेंथ बोल्ट (TTHSB) का इस्तेमाल किया गया. पुल की मजबूती और वाइब्रेशन को कंट्रोल करने के लिए इसमें C5 प्रोटेक्टिव पेंटिंग सिस्टम और इलास्टोमेरिक बेयरिंग भी लगाए गए हैं. इसके बाद तैयार किए गए पुल को दो खोखले जैक लगे ऑटोमैटिक मेकेनिज्म की मदद से उसके तय पॉजिशन तक खींचकर स्थापित किया गया. हर एक की क्षमता 150 मीट्रिक टन थी. इसके साथ, प्री-टेंशन वाले मैककॉय बार का भी इस्तेमाल किया गया.’
बयान में यह भी बताया गया है कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए कुल 28 स्टील ब्रिज प्रस्तावित किए गए हैं, जिसमें से अब तक 16 का निर्माण पूरा हो चुके हैं.
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पिछले करीब पांच सालों से भारतीय मीडिया का हिस्सा हैं. अक्टूबर, 2024 से एबीपी न्यूज नेटवर्क में बतौर हिंदी कंसल्टेंट राइटर के तौर पर भूमिका निभा रहे हैं. प्रिंट मीडिया के साथ अपने पत्रकारिता सफर की शुरुआत की है और आज डिजिटल मीडिया में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेस्क पर लेखन कार्य कर रहे हैं. साल 2020 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की. क्षेत्रीय से लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति, चुनाव और सामाजिक विषयों पर खबरें लिखते रहे हैं. तथ्यों की गहराई और भाषा की संवेदनशीलता पर हमेशा बेहतर करने की कोशिश है. स्केचिंग, पेटिंग, फिल्में देखना, शायरी-कविताएं लिखना और घूमना बहुत ज्यादा पसंद है.
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