देशभर की अदालातों में करोड़ों मुकदमों के पहाड़ को खत्म करने के लिए मध्यस्थता एक बेहद शक्तिशाली और प्रभावी हथियार साबित हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले कुछ समय से अदालतों के बजाए मुकदमों का निपटारे के लिए ‘वैकल्पिक विवाद समाधान’ (एडीआर) तरीकों के अपनाने की जोरदार वकालत के मद्देनजर मध्यस्थता के जरिए विवादों के निपटारे में काफी तेजी आई है। पिछले एक साल में मध्यस्थता के जरिए अदालतों के बाहर मध्यस्थता के जरिए मुकदमों को निपटारा करने की दर में दो गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसका खुलासा, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की ओर से जारी रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक मध्यस्थता के जरिए देशभर में 2025-26 में 2 लाख 25 हजार से अधिक मामलों का निपटारा किया गया है जबकि 2024-25 में एक लाख से भी कम मुकदमों का निपटारा हुआ था। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के पिछले कई सालों के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि हर साल मध्यस्थता के जरिए 52 हजार से एक लाख तक मामलों का निपटारा होता है। लेकिन 2025-26 में इसमें अचानक काफी बढ़ोतरी हुई और विवाद निपटाने की दर में 2 गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी हुई। कानून के जानकारों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगातार मुकदमों के निपटारे के लिए वैकल्पिक तरीकों को अपनाने के प्रोत्साहन की वजह से यह बढ़ोतरी हुई है।
पिछले तीन सीजेआई ने भी मध्यस्थता की वकालत की
देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत पिछले साल पद संभालने के बाद से ही हर मौके पर अदालतों में बढ़ते मुकदमों का बोझ कम करने के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) को अपनाने की वकालत कर रहे हैं। सीजेआई ने कई मौकों पर मुकदमों के निपटारे के लिए एडीआर को अपनाने की वकालत करते रहे हैं। इससे पूर्व के सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना और बी.आर. गवई भी लगातार मुकदमों के निपटारे के लिए वैकल्पिक विवाद समाधान के तरीकों को अपनाने पर जोर देते रहे हैं।
किस साल कितने मामलों का निपटारा
वर्ष निपटाए गए मामले
2025-26 225647
2024-25 98406
2023-24 99033
2022-23 92446
2021-22 52968
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सबसे अधिक मुकदमों का निपटारा करने वाले राज्य
राज्य निपटाए गए मामले
राजस्थान 41823
केरल 33851
महाराष्ट्र 29212
उत्तर प्रदेश 20933
एमपी- 18143
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