मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में आज भी जिंदा है हिंदू विरासत! PM Modi के दौरे के बीच चर्चा में आया 1170 साल पु – India.Com

PM Modi Indonesia Visit: इन दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों के दौरे पर हैं और पहले चरण में वे मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया पहुंचे हैं. वैसे तो भारतीय टूरिस्ट के लिए इंडोनेशिया एक फेवरेट डेस्टिनेशन में से एक हैं लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी इस देश में आज भी प्राचीन हिंदू विरासत पूरी भव्यता के साथ जीवंत है. इन दिनों इंडोनेशिया का लगभग 1170 साल पुराना शिव मंदिर अचानक दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है. इस ऐतिहासिक मंदिर का भारत से बेहद गहरा और अटूट सांस्कृतिक रिश्ता माना जाता है. इंडोनेशिया के प्रम्बानान (Prambanan) में स्थित यह विशाल मंदिर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सदियों पहले भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म की जड़ें यहां बहुत गहरी थी. लेकिन एक सवाल मन में बार-बार आता है कि मुस्लिम बहुल देश में हिंदू धर्म कैसे पहुंचा? आइए जानते हैं इंडोनेशिया के इस प्राचीन शिव मंदिर का भारत से क्या है रिश्ता?

इंडोनेशिया एक मुस्लिम बहुल देश है और वहां हिंदू धर्म की जड़े काफी मजबूत हैं. यह एक ऐसा देश है जो कि मुस्लिम बहुल होने के बाद भी अपने देश में हिंदू संस्कृति पर गर्व महसूस करता है. अब आप ये सोच रहे होंगे कि आखिर इस देश में हिंदू धर्म कैसे पहुंच गया? यूट्यूब चैनल Defence Watch Hindi पर इस बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है. इसके अनुसार इंडोनेशिया में हिंदू धर्म में पहुंचाने का श्रेय भारतीय व्यापारियों का जाता है. भारत के व्यापारी मसाले, कपड़े और सोने—चांदी का व्यापार करने इंडोनेशिया जाते थे. उन्हीं के माध्यम से हिंदू संस्कृति भी वहां पहुंच गई. भारतीय धर्म ग्रंथां में राजा को भगवान का अवतार माना जाता था और यह बात इंडोनेशिया के राजाओं को अच्छी लगी. ऐसे में उन्होंने अपने देश में भी इसी भावना को फैलाने का प्रयास किया. इसके लिए उन्होंने अपने सलाहकार के तौर ब्राह्मणों को नियुक्त किया जिन्हें भारत से बुलवाया गया. इसी तरह हिंदू धर्म व भारतीय संस्कृति ने इंडोनेशिया में अपनी जड़े फैला ली.

इंडोनेशिया में द नेदरलैंड्स का राज होता था. एशिया के अलग-अलग देशों पर युरोप के देशों ने राज किया. जैसे भारत में अंग्रेज़ों को राज हो गया था, तो इंडोनेशिया पर डच लोगों का राज हो गया था. तो 1733 में एक डच अधिकारी नें इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर घूमते जंगल में एक विशाल पत्थरों का ढेर देखा. वहां के लोकल लोग उस पहाड़ जैसे पत्थरों के ढेर को जानते तो थे लेकिन उनको पता नहीं था कि वो क्या है. तो उन्होंने उसपर एक कहानी बना दी थी. एक राजकुमारी की कहानी. राजकुमारी का नाम बताया ‘रोरो जोंग्रांग’. कहां से ये कहानी शुरू हुई ये तो पता नहीं लेकिन शॉर्ट में कहानी ये थी कि एक राजकुमार एक राजकुमारी से शादी करना चाहता था. राजकुमारी ने शर्त रख दी कि एक रात में 1000 मंदिर बना दोगे, तब तुमसे शादी करूंगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों इंडोनेशिया के दौरे पर हैं और ऐसे में यहां का सदियों पुराना शिव मंदिर दुनियाभर में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस मंदिर का निर्माण 9वीं सदी में संजय वंश के राजा रकाई पिकातन ने करवाया था. हालांकि, बाद में आने वाले राजाओं ने इस मंदिर को अपने तरीके से कई बार बदला और विस्तृत कराया. 19वीं व 20वीं शताब्दी में हुई खुदाई में कुछ अवशेष मिले जिसमें मंदिर की दीवारों व पत्थरों पर संस्कृत भाषा में लिखे शिलालेख मिले. इन शिलालेखों पर नाम व तारीख अंकित है जिससे पता चलता है कि यह एक शिव मंदिर है और 1100 साल पुराना है. यह मंदिर इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर स्थित है.
इंडोनेशिया के शिव मंदिर की बात करें तो यहां भगवान शिव के साथ ही ब्रह्मा जी और विष्णु जी का भी मंदिर है. यही वजह है कि इस मंदिर को त्रिमूर्ति मंदिर भी कहा जाता है. मंदिर परिसर में करीब 250 मंदिर बने हुए हैं और इसमें सबसे ऊंचा शिव मंदिर है जिसकी ऊंचाई करीब 47 मीटर है. इसके एक तरफ भगवान विष्णु का मंदिर और दूसरी तरफ ब्रह्मा जी का मंदिर स्थित है. मंदिर की दीवारों के पत्थरों पर रामायण की पूरी कहानी उकेरी गई है.

20वीं सदी में डच सरकार द्वारा अनास्टाइलोसिस तकनीक के जरिए इस मंदिर का निर्माण फिर से शुरू किया गया और इधर-उधर पड़े पत्थरों को मैच करें उन्हीं जोड़कर मंदिर बनाया गया. जब इंडोनेशिया आजाद हुआ तो वहां की सरकार ने मंदिर के निर्माण कार्य को जारी रखा और 1953 में यह मंदिर पूरी तरह बनकर तैयार हो गया. 1991 में UNESCO ने पूरे प्राम्बानन परिसर को विश्व धरोहर घोषित कर दिया.
सवाल 1: पीएम मोदी इन दिनों किन देशों के दौरे पर हैं?
जवाब: इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड
सवाल 2: इंडोनेशिया का प्राचीन शिव मंदिर कितना पुराना है?
जवाब: इंडोनेशिया में 1170 साल पुराना शिव मंदिर है.
सवाल 3. क्या इस मंदिर में केवल भगवान​ शिव की मूर्ति विराजमान है?
जवाब: नहीं, यहां भगवान शिव के साथ ही भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी का मंदिर भी मौजूद है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां अलग-अलग वेबसाइट्स व यूट्यूब चैनल से ली गई हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.
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रेनू यादव, India.Com हिंदी में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के पद कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में करीब 15 वर्षों के अनुभव के दौरान उन्हें टेक्नोलॉजी, धर्म, लाइफस्टाइल, हेल्थ व अन्य विषयों … और पढ़ें
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