Published By: Anjali Karmakar | Updated: Aug 5, 2026, 9:03 PM
आधुनिक युद्ध अब सिर्फ सैनिकों और टैंकों के दम पर नहीं लड़े जाते. आज किसी भी देश की सैन्य ताकत का सबसे बड़ा पैमाना उसकी मिसाइल तकनीक मानी जाती है. खासतौर पर ऐसी मिसाइलें जो आवाज की गति से कई गुना तेज उड़ सकती हैं. इनकी रफ्तार इतनी अधिक होती है कि दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इन्हें समय रहते पहचानना और रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि अमेरिका, रूस, चीन, भारत और उत्तर कोरिया जैसे देश लगातार हाइपरसोनिक और लंबी दूरी की मिसाइलों पर निवेश कर रहे हैं. यहां जानिए दुनिया की 10 सबसे तेज मिसाइलों के बारे में.
AGM-183A ARRW (Air-Launched Rapid Response Weapon) अमेरिका का हाइपरसोनिक हथियार कार्यक्रम है। इसे B-52 जैसे बमवर्षक विमानों से लॉन्च करने के लिए विकसित किया गया। इसकी अनुमानित गति Mach 5 से अधिक मानी जाती है, जो इसे हाइपरसोनिक कैटेगरी में रखती है. ARRW ने अमेरिका के हाइपरसोनिक वेपन डेवलपमेंट प्रोग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. भविष्य की तकनीकों के लिए आधार तैयार किया था.
ब्रह्मोस दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में गिनी जाती है. इसे भारत और रूस ने संयुक्त रूप से विकसित किया है. इसकी अधिकतम गति लगभग Mach 2.8 से Mach 3 तक होती है.ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत इसकी मल्टी-प्लेटफॉर्म क्षमता है. इसे जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और लड़ाकू विमान से लॉन्च किया जा सकता है. इसकी सटीकता और कम प्रतिक्रिया समय इसे बेहद प्रभावी बनाते हैं. भारत लगातार इसके नए संस्करण विकसित कर रहा है.
शौर्य भारत की ओर से विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली एडवांस मिसाइल है. इसकी गति लगभग Mach 7 से Mach 7.5 तक पहुंच सकती है. इसे DRDO ने विकसित किया है. यह भारत की रणनीतिक मिसाइल क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है. इस मिसाइल की खासियत इसकी उच्च गति और कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है.
रूस की Kh-47M2 Kinzhal एक एयर-लॉन्च्ड हाइपरसोनिक मिसाइल है. इसे MiG-31K और कुछ अन्य लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जाता है. इसकी गति लगभग Mach 10 तक पहुंच सकती है. किंझाल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बेहद तेज गति से उड़ते हुए उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती है.रूस ने दावा किया है कि यह पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के वारहेड ले जा सकती है. इसकी मारक क्षमता लगभग 2,000 किलोमीटर तक बताई जाती है.
Hwasong-15 उत्तर कोरिया की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी रेंज 13,000 किलोमीटर तक होने का अनुमान लगाया जाता है, जबकि इसकी गति हाइपरसोनिक स्तर के करीब पहुंच सकती है. इस मिसाइल के परीक्षणों ने दुनिया का ध्यान उत्तर कोरिया की बढ़ती मिसाइल क्षमता की ओर खींचा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल अमेरिकी मुख्य भूमि तक पहुंचने की क्षमता रख सकती है, हालांकि इसकी वास्तविक क्षमता को लेकर अलग-अलग आकलन हैं.
Minuteman III अमेरिका की सबसे लंबे समय से सेवा में मौजूद इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी अधिकतम गति लगभग Mach 23 तक पहुंच सकती है. इसकी रेंज 13,000 किलोमीटर के आसपास मानी जाती है. यह मिसाइल भूमिगत साइलो में तैनात रहती है. जरूरत पड़ने पर कुछ ही मिनटों में लॉन्च की जा सकती है. वर्षों से इसमें आधुनिक गाइडेंस सिस्टम, नई इलेक्ट्रॉनिक्स और सुरक्षा तकनीक जोड़ी गई है.
Trident II D5 सबमरीन से लॉन्च होने वाली बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM) है. इसका इस्तेमाल अमेरिका और ब्रिटेन दोनों करते हैं. इसकी गति लगभग Mach 20 तक पहुंच सकती है. इसकी रेंज 12,000 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है. इस मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी 'सेकेंड स्ट्राइक' क्षमता है. यानी अगर किसी देश पर पहले हमला हो जाए, तब भी समुद्र में मौजूद परमाणु पनडुब्बियां Trident-II D5 के जरिए जवाबी हमला कर सकती हैं.
RS-28 Sarmat, जिसे अक्सर 'सैटन-2' भी कहा जाता है, रूस की नई पीढ़ी की भारी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल है. यह पुराने R-36M सिस्टम की जगह लेने के लिए विकसित की गई है. इसकी रफ्तार लगभग Mach 20 के आसपास मानी जाती है. यह हजारों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य तक पहुंच सकती है. सरमत की सबसे बड़ी खासियत इसकी भारी पेलोड क्षमता है. यह कई परमाणु वारहेड, डिकॉय और हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल ले जाने में सक्षम बताई जाती है.
DF-41 चीन की सबसे आधुनिक इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों में शामिल है. इसकी अनुमानित रेंज 12,000 से 15,000 किलोमीटर तक मानी जाती है, जिससे यह एशिया, यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक लक्ष्य भेद सकती है. इसकी अधिकतम गति लगभग Mach 25 तक पहुंचने की बात कही जाती है. इस मिसाइल की सबसे खास बात यह है कि यह कई स्वतंत्र परमाणु वारहेड (MIRV) ले जाने में सक्षम मानी जाती है.चीन ने DF-41 को अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का प्रमुख हथियार बनाया है. इसकी लंबी दूरी, तेज रफ्तार और कई वारहेड ले जाने की क्षमता इसे दुनिया की सबसे घातक रणनीतिक मिसाइलों में शामिल करती है.
रूस की अवांगार्ड (Avangard) को दुनिया के सबसे खतरनाक हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल्स में गिना जाता है. यह पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइल नहीं, बल्कि एक हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन है, जिसे इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के जरिए लॉन्च किया जाता है. इसके बाद यह वायुमंडल में बेहद ऊंचाई से प्रवेश कर दिशा बदलते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ता है. इसकी अधिकतम गति करीब Mach 27 बताई जाती है, यानी ध्वनि की गति से 27 गुना अधिक. अवांगार्ड की सबसे बड़ी ताकत इसकी अनिश्चित उड़ान है। पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों का रास्ता पहले से अनुमानित होता है, लेकिन अवांगार्ड रास्ता बदल सकता है. यही कारण है कि मौजूदा मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना बेहद कठिन माना जाता है.
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