राजस्थान में रोके गए 13 से अधिक बाल विवाह, 8 साल के बच्चे ने रोकी दोस्त की शादी – Hindustan Hindi News

अक्षय तृतीया के मौके पर राजस्थान में 12 से अधिक बाल विवाहों को सफलतापूर्वक रोक दिया गया। उदयपुर में 9, प्रतापगढ़ में 2 और सीकर में 2 बाल विवाह विफल किए गए। प्रशासन और गायत्री सेवा संस्थान ने मिलकर इसे अंजाम दिया। सुरक्षा की दृष्टि से एक लड़के और एक लड़की को आश्रय गृह भी भेजा गया। वहीं बूंदी में एक 8 साल के लड़के के सही समय पर प्रशासन से मदद मांगने के कारण उसकी 5वीं क्लास की दोस्त का बाल विवाह रुक गया। यह शादी अक्षय तृतीया की रात को होने वाली थी।
अक्षय तृतीया पर राजस्थान के उदयपुर, प्रतापगढ़ और सीकर में प्रशासन और गायत्री सेवा संस्थान ने मिलकर 12 से अधिक बाल विवाह रुकवाए। उदयपुर में 9 और अन्य जिलों में 2-2 शादियां रोकी गईं। जिला बाल कल्याण समिति ने स्थानीय अधिकारियों को कोर्ट के नियमों की जानकारी दी। इसके तहत बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी अब ग्राम पंचायतों की होगी। सुरक्षा के लिए एक लड़के और एक लड़की को शेल्टर होम भेजा गया है।
वहीं बूंदी जिले में एक 8 साल के लड़के की सूझबूझ से उसकी 5वीं कक्षा में पढ़ने वाली सहेली का बाल विवाह रुक गया। शादी अक्षय तृतीया की रात को होने वाली थी। लड़के ने चाइल्डलाइन 1098 के अधिकारियों से मदद मांगते हुए कहा कि भैया/दीदी कृपया मेरी दोस्त की शादी रुकवा दीजिए। वह अभी बहुत छोटी है। हम साथ में खेलते हैं और स्कूल जाते हैं। वह शादी नहीं करना चाहती है। वह पढ़ना चाहती है।
बच्ची की सूचना पर जिला चाइल्डलाइन कोऑर्डिनेटर रामनारायण गुर्जर और केस वर्कर अर्चना मीणा मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां देखा कि 5वीं कक्षा में पढ़ने वाली 8 साल की बच्ची की शादी की तैयारियां हो रही थीं। बाल विवाह कानूनी अपराध है। इसके बावजूद राजस्थान में हर साल अक्षय तृतीया पर ऐसी शादियां होती हैं। स्थानीय लोग इसे आखा तीज कहते हैं। कई गांवों में इसे शादी के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
हैरानी की बात यह थी कि उसी जगह पर एक और 16 साल की लड़की मिली जिसकी शादी भी उसी शाम होने वाली थी। डाबलाना एसएचओ प्रिया व्यास की मदद से दोनों नाबालिग लड़कियों को बचाया गया। दोनों बच्चियों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। बाल कल्याण समिति ने बाद में दोनों लड़कियों को शेल्टर होम भेजने का आदेश दिया। बूंदी बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने कहा कि लड़के ने बेहद सराहनीय काम किया है।
बूंदी बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने कहा कि बच्चे का काम उसके साहस और सूझबूझ को दिखाता है। इसकी वजह से दो बच्चियों का बचपन बच गया। बच्चे के साहसिक काम ने बाल अधिकार कार्यकर्ताओं को प्रेरित किया है। इससे पता चलता है कि बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान सफल हो रहा है। बूंदी जिले के गुर्जर, मीणा, मेघवाल, माली, रेगर, बरवा और भील समुदायों में अक्सर बाल विवाह की सूचनाएं मिलती हैं। अक्षय तृतीया पर ये शादियां चुपचाप सामूहिक या निजी कार्यक्रमों में कर दी जाती हैं।
कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।
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परिचय और अनुभव: कृष्ण बिहारी सिंह लोकमत, आज समाज, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला और दैनिक जागरण अखबार में विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने साल 2019 में जागरण डॉट कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा। कृष्ण बिहारी सिंह मौजूदा वक्त में भारत के प्रसिद्ध समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) की स्टेट टीम में डिप्टी चीफ एडिटर (कंटेंट क्रिएटर) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

रिपोर्टिंग एवं विशेषज्ञता: कृष्ण बिहारी सिंह राजनीति, जिओ पॉलिटिक्स, जन सरोकार और क्राइम की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। कृष्ण बिहारी सिंह ने अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में नेशनल, इंटरनेशनल, बिजनेस, रिसर्च एवं एक्सप्लेनर और संपादकीय टीमों के साथ लंबे समय तक काम किया है। यही वजह है कि खबर के पीछे छिपे एजेंडे की समझ रखने वाले केबी समसामयिक घटनाक्रमों पर गहरा विश्लेषण करते हैं।

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