राजस्थान में 67 KM रेलवे ट्रैक पर शुरू हुई कवच तकनीक, आमने-सामने ट्रेन आने पर टक्कर रोकने में मिलेगी मदद – AajTak

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अब राजस्थान में ट्रेन हादसे हादसे नहीं होंगे. उत्तर पश्चिम रेलवे के कानौता-बांदीकुई रेलखंड पर कवच टेक्नोलॉजी शुरू की गई है. 67 किमी रेलखंड में 7 ब्लॉक सेक्शनों पर आधुनिक कवच प्रणाली से ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है. उत्तर पश्चिम रेलवे में पहली बार कवच तकनीक शुरू हुई है. कई बार के ट्रायल के बाद यह शुरू किया गया. पहले फेस में 250 किलोमीटर रेलवे लाइन पर कवच टेक्नोलॉजी लगाई गई है.
उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल के कानौता-बांदीकुई 67 किलोमीटर रेलखंड पर स्टैंडर्ड कवच प्रणाली का सफलतापूर्वक शुरू की गई है. इस तकनीक में 7 ब्लॉक सेक्शन कानौता-बस्सी, बस्सी-झर, झर-जटवाड़ा, जटवाड़ा-दौसा, दौसा-भांकरी, भांकरी-अरनिया तथा अरनिया-बांदीकुई शामिल हैं.
कवच प्रणाली की फील्ड इंस्टॉलेशन के बाद फील्ड ट्रायल सफलतापूर्वक किए गए. इस दौरान ट्रेन की ब्रेकिंग सिस्टम, स्पीड, सिग्नल क्रॉस करना सहित अन्य सभी एंगल से ट्रेन का ट्रायल किया गया. इसके अलावा झर-जटवाड़ा रेलखंड में 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की स्पीड पर तथा कानौता-बस्सी रेलखंड में निर्धारित पूर्ण सेक्शनल गति पर स्पीड टेस्टिंग और संबंधित सभी मापदंडो परीक्षण किया गया.
उत्तर पश्चिम रेलवे की जनसंख्या अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि उत्तर पश्चिम रेलवे के पूरे क्षेत्र में कवच प्रणाली लागू होगी. लेकिन पहले फेस में 1586 किलोमीटर रेलवे ट्रैक पर कवच टेक्नोलॉजी लगाई जाएगी. इसमें लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. इस वित्तीय वर्ष में 250 किलोमीटर से ज्यादा रेलवे ट्रैक पर कवच प्रणाली शुरू कर दी जाएगी. इसका सीधा फायदा ट्रेन संचालन में मिलेगा.
स्टैंडर्ड कवच प्रणाली की प्रमुख खासियत
• स्टैंडर्ड कवच एक आधुनिक ट्रेन संरक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य रेल परिचालन के दौरान संरक्षा को और मजबूत करना है. यह प्रणाली निर्धारित परिस्थितियों में संभावित आमने-सामने अथवा पीछे से होने वाली टक्कर के जोखिम को रोकने के लिए आटोमैटिक तरीके से कार्य करती है.

• इसके अतिरिक्त, निर्धारित कवच कार्यप्रणाली के अनुसार जरूरत पड़ने पर ओवरस्पीडिंग की स्थिति में स्वचालित ब्रेकिंग सिस्टम कार्य करता है.

• ब्लॉक सेक्शन में ट्रेन के अनचाहे या  अनधिकृत रूप से रुकने की स्थिति में आटोमैटिक SOS सुविधा जरूरी सुरक्षा कार्रवाई में सहायता करती है. वहीं, रोल-बैक और रोल-फॉरवर्ड जैसी ट्रेन गतिविधियों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए भी प्रणाली में विशेष प्रावधान हैं. इमरजेंसी में लोको पायलट द्वारा मैनुअल SOS अलर्ट भेजने की सुविधा भी उपलब्ध है.

कानौता-बांदीकुई रेलखंड पर स्टैंडर्ड कवच का सफल कमीशनिंग उत्तर पश्चिम रेलवे में आधुनिक तकनीक के माध्यम से रेल संरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम है. इससे ट्रेन संरक्षा को बेहतर बनाने तथा सुरक्षित एवं विश्वसनीय रेल परिचालन के प्रयासों को और मजबूती मिलेगी.
कवच तकनीक से होने वाले फायदे

स्वचालित ब्रेकिंग
कवच तकनीक की मदद से अगर ट्रेन के लोको पायलट सिग्नल क्रॉस करते हैं. तो कवच तकनीक अपने आप ट्रेन की रफ्तार धीरे कर देगी और ट्रेन के ब्रेक लग जाएंगे.

टक्कर से बचाव
अगर एक रेलवे ट्रैक पर दो ट्रेनिंग आमने-सामने आ जाएंगे तो कवच तकनीक दोनों ट्रेनों को रोक देगा और इसकी जानकारी रेलवे के अधिकारियों के साथ ट्रेनों के लोको पायलट को भी मिलेगी.

खराब मौसम में मददगार
खराब मौसम के दौरान सिग्नल की जानकारी लोको पायलट को मिलती रहेगी. साथ ही कोहरे के समय ट्रेन संचालन प्रभावित नहीं होगा और ट्रेन में लेट नहीं होगी. स्टेशन व प्लेटफार्म के बारे में भी ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट को पूरी जानकारी समय-समय पर कब्ज तकनीक की मदद से मिलेगी.

कम लागत
यह तकनीक स्वदेशी है और कम लागत में तैयार हुई है. उत्तर पश्चिम रेलवे के ट्रैक को पूरी तरह से कवच तकनीक लेस किया जा रहा है.
लाल सिग्नल पार करने से रोकना
अगर लोको पायलट गलती से रेलवे लाइन के सिग्नल को क्रॉस करता है. तो कवच तकनीक से तुरंत ट्रेन के इमरजेंसी ब्रेक लग जाएंगे.
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