संसद का मॉनसून सत्र शुरू होने जा रहा है। इससे पहले अटकलें हैं कि सरकार एक बार फिर संविधान संशोधन बिल लाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं बताया गया है। अब खास बात है कि दोनों ही सदनों में ऐसे विधेयक को पास कराने के दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है और सीटों के लिहाज से भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ा दल है। हालांकि, इसके बाद भी NDA दो तिहाई बहुमत से खासा दूर है।
पहले लोकसभा की बात करते हैं। यहां कुल सीटों की संख्या 543 है, जिसके चलते दो तिहाई बहुमत 362 हो जाती है। अब यहां तीन सीटें खाली हैं। इसके कारण यह आंकड़ा घटकर 360 पर आ जाता है। खाली सीटों में बशीरहाट, शिलॉन्ग और नौगांव शामिल हैं। 2024 लोकसभा चुनाव के बाद NDA की सीटें 293 पर थीं, जो हाल में मिले समर्थन के बाद बढ़ी हैं।
फिलहाल, निचले सदन का सबसे बड़ा दल 240 सीटों के साथ भाजपा है। वहीं, दूसरे स्थान पर विपक्ष की अगुवाई कर रही 98 सीटों वाली कांग्रेस है। एनडीए के बड़े दलों में शिवसेना, तेलुगु देशम पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी राम विलास समेत कई दल शामिल हैं। जबकि, विपक्ष के पास संख्याबल के लिहाज से बड़े दलों में समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक है। खास बात है कि एक ओर जहां टीएमसी टूट चुकी है। वहीं, DMK ने INDIA गठबंधन से दूरी बना ली है।
भाजपा- 240
कांग्रेस- 98
समाजवादी पार्टी- 37
टीएमसी- 28 (20 एनसीपी में विलय का प्रस्ताव दे चुके हैं)
डीएमके- 22
टीडीपी- 16
जेडीयू- 12
एनसीपी एसपी- 8
शिवसेना- 7
शिवसेना यूबीटी- 9 (6 शिंदे सेना को समर्थन दे रहे हैं)
निर्दलीय- 7
293 वाले एनडीए को टीएमसी के 20, शिवसेना यूबीटी के 6 सांसदों का समर्थन और मिल गया है। इस लिहाज से आंकड़ा 319 पर पहुंच गया है। खास बात है कि अगर डीएमकी वोटिंग से दूर रहती है, तो दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा घटकर 342 पर आ जाएगा। अप्रैल में जब सदन में संविधान संशोधन बिल पेश किया गया था, तब एनडीए को 298 सदस्यों का समर्थन मिला था।
उच्च सदन में मौजूदा सांसदों की संख्या 242 पर है। यहां एनडीए को दो तिहाई समर्थन हासिल करने के लिए 164 सीटों की जरूरत है। लोकसभा के मुकाबले सत्तारूढ़ गठबंधन उच्च सदन में ज्यादा मजबूत नजर आ रहा है। हालांकि, यहां भी जरूरी आंकड़े से वह काफी दूर है।
भाजपा- 114
कांग्रेस- 30
टीएमसी-10
डीएमके- 8
बीजू जनता दल- 5
AIADMK, जेडीयू, एनसीपी, समाजवादी पार्टी और टीडीपी के पास 4-4 सांसद हैं। वहीं, 7 नामित और 4 निर्दलीय या अन्य हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला संसद के आगामी मानसून सत्र की शुरुआत से पहले तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (UBT) में हुई बगावत के मामलों पर फैसला करेंगे। इन दलों ने अपने बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की है। भाषा को सूत्रों ने बताया कि संसद के विधि और संवैधानिक विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श जारी है और उनके सुझावों के आधार पर अध्यक्ष अंतिम निर्णय लेंगे।
सूत्रों ने कहा कि इसी तरह के मामलों में पीठासीन अधिकारियों द्वारा पहले लिए गए फैसलों और नजीर का भी अध्ययन किया जा रहा है, ताकि सभी संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर विचार कर कानूनी रूप से ठोस निर्णय लिया जा सके। इस बीच, लोकसभा सचिवालय मानसून सत्र के लिए संभावित बैठक व्यवस्था पर भी विचार कर रहा है।
तृणमूल और शिवसेना (यूबीटी) के बागी समूहों के अलावा द्रविड़ मुनेत्र कषगम ने भी कांग्रेस से अलग बैठने की व्यवस्था का अनुरोध किया है। कांग्रेस ने तमिलनाडु में दशकों पुराने गठबंधन को तोड़ते हुए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम से हाथ मिला लिया है।
निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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