रावण के वध के बाद विभीषण ने अंतिम संस्कार से किया था इनकार, तो किस दिया 'दशानन' को आग? जानें पूरी कहानी – Bharat24live

Shubham Raja
Date: 29-09-26 16:37
Ramayana Story: रामायण की कथा के मुताबिक, लंका के युद्ध में जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया तो मंदोदरी और लंका की दूसरी रानियां शोक में डूब गईं. रावण के छोटे भाई विभीषण भी अपने बड़े भाई की मौत से दुखी थे. इसके बाद रावण के अंतिम संस्कार को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रसंग सामने आता है.
वाल्मीकि रामायण के युद्धकांड में बताया गया है कि रावण की मृत्यु के बाद श्रीराम ने विभीषण से कहा कि अब उन्हें अपने भाई के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करनी चाहिए. हालांकि, विभीषण ने शुरुआत में इससे इनकार कर दिया. सवाल उठता है कि आखिर विभीषण ने ऐसा क्यों किया और फिर रावण का अंतिम संस्कार किसने किया?
विभीषण ने अंतिम संस्कार से क्यों किया इनकार?
वाल्मीकि रामायण के अनुसार, विभीषण ने श्रीराम से कहा कि रावण ने अपने जीवन में धर्म का पालन नहीं किया. उसने दूसरे की पत्नी का हरण किया और अधर्म का रास्ता अपनाया. विभीषण का यह भी कहना था कि रावण ने भाई होने के बावजूद उनके साथ शत्रु जैसा व्यवहार किया और उन्हें काफी दुख पहुंचाया.
इसी वजह से विभीषण रावण का अंतिम संस्कार करने के लिए तैयार नहीं थे. उनका विरोध केवल भाई के साथ हुए मतभेदों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह रावण के कर्मों को देखते हुए उसके अंतिम संस्कार को लेकर भी दुविधा में थे.
श्रीराम ने विभीषण को क्या समझाया?
विभीषण की बात सुनने के बाद श्रीराम ने उन्हें समझाया कि रावण ने जीवन में गलत काम किए हों, लेकिन मृत्यु के बाद उससे शत्रुता रखना ठीक नहीं है. श्रीराम ने कहा कि मृत्यु के साथ ही शत्रुता खत्म हो जाती है.
उन्होंने विभीषण को याद दिलाया कि रावण उनका बड़ा भाई था और अब उसका अंतिम संस्कार करना उनका कर्तव्य है. श्रीराम ने रावण की वीरता और उसके पराक्रम का भी उल्लेख किया. उनकी बात सुनकर विभीषण मान गए और बड़े भाई के अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी.
फिर किसने किया रावण का अंतिम संस्कार?
श्रीराम की बात मानने के बाद विभीषण ने ही रावण का अंतिम संस्कार किया. वह लंका गए और अंतिम संस्कार के लिए जरूरी सामग्री की व्यवस्था की. इसके बाद उन्होंने विधि-विधान के अनुसार रावण का अग्नि संस्कार किया.
इस तरह जिस विभीषण ने शुरुआत में रावण के अंतिम संस्कार से इनकार किया था, वही बाद में भाई होने का अपना कर्तव्य निभाते हुए उसके अंतिम संस्कार में शामिल हुए.
श्रीराम के इस प्रसंग से क्या मिलता है संदेश?
रावण के अंतिम संस्कार से जुड़ा यह प्रसंग रामायण में एक अहम संदेश देता है. श्रीराम ने युद्ध में रावण का वध किया, लेकिन उसकी मृत्यु के बाद उसके प्रति शत्रुता नहीं रखी. उन्होंने समझाया कि किसी के गलत कर्मों का विरोध अपनी जगह है, लेकिन मृत्यु के बाद उसके प्रति निभाए जाने वाले कर्तव्य अलग होते हैं.
इसी सोच के साथ श्रीराम ने विभीषण को अपने बड़े भाई का अंतिम संस्कार करने के लिए कहा. यह प्रसंग बताता है कि युद्ध और शत्रुता खत्म होने के बाद मानवीय कर्तव्य को भी महत्व दिया जाना चाहिए.
रावण की मृत्यु के बाद राजा बने विभीषण
रावण के अंतिम संस्कार के बाद श्रीराम ने विभीषण को लंका का राजा बनाया. वाल्मीकि रामायण में आगे उनके राज्याभिषेक का वर्णन मिलता है. इस तरह रावण की मृत्यु के बाद लंका की सत्ता विभीषण के हाथ में आई. युद्ध के दौरान विभीषण ने श्रीराम का साथ दिया था और रावण के बाद उन्होंने लंका का शासन संभाला.
Disclaimer: इस खबर में बताई गई बातें धार्मिक मान्यताओं और रामायण में वर्णित प्रसंगों पर आधारित हैं. इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है. Bharat 24 इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है.
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