रोजाना भोजन में इस्तेमाल होने वाले नमक में सोडियम की मात्रा कम करके पोटैशियम मिलाया जाए, तो भारत में हर साल करीब चार लाख लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। इससे दिल और किडनी की बीमारियों के नए मामलों को भी रोका जा सकता है। नेचर हेल्थ पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट में 193 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसके मुताबिक, दुनियाभर में पोटैशियम युक्त नमक के इस्तेमाल से हर साल करीब 30 लाख मौतों और दिल व किडनी की बीमारियों के एक करोड़ नए मामलों को रोका जा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया के जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के वरिष्ठ शोधकर्ता ब्रूस नील ने कहा कि पोटैशियम युक्त नमक अपनाने से बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। इससे ज्यादातर देशों में दिल की बीमारी से होने वाली हर 10 में से एक मौत को रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भोजन में सोडियम की अधिक मात्रा और पोटैशियम की कम मात्रा हाई ब्लड प्रेशर के प्रमुख कारण हैं। पोटैशियम युक्त नमक अपनाने से खानपान की इन दोनों समस्याओं का एक साथ समाधान हो सकता है और स्वास्थ्य को काफी फायदा मिल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सामान्य नमक की जगह पोटैशियम वाले कम सोडियम युक्त विकल्प इस्तेमाल करने की सलाह देता है।
अलग-अलग दावे
1. अगर सिर्फ घरों में रोजाना खाना बनाने और खाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान्य नमक की जगह पोटैशियम युक्त नमक इस्तेमाल किया जाए, तो दुनियाभर में हर साल 18.5 लाख मौतें और दिल व किडनी की बीमारियों के 62 लाख मामले रोके जाने का दावा किया गया है।
2. अन्य दावे में शोधकर्ताओं ने कहा कि अगर सिर्फ पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और रेस्तरां के भोजन में इस्तेमाल होने वाले नमक को बदला जाए, तो दुनियाभर में हर साल 15.6 लाख मौतें और 54.6 लाख बीमारी के मामले रोके जा सकते हैं।
दोनों में अंतर
– सोडियम क्लोराइड : यही सामान्य खाने वाला नमक है। इसमें सोडियम होता है, जिसकी अधिक मात्रा से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।
– पोटैशियम क्लोराइड : यह नमक जैसा ही एक पदार्थ है। इसमें सोडियम की जगह पोटैशियम होता है। इसका इस्तेमाल सामान्य नमक में सोडियम की मात्रा कम करने के लिए किया जाता है।
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