Shreeom Singh
Date: 18-10-26 15:23
India Fuel Exports to Europe: भारत में रूसी कच्चे तेल से तैयार ईंधन की पश्चिमी देशों में मांग बढ़ रही है. सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की रिफाइनरियों से यूरोपीय संघ, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को करीब 1 अरब यूरो यानी 1.2 अरब डॉलर के तेल उत्पाद निर्यात किए गए. यह आंकड़ा अगस्त के मुकाबले 43 फीसदी ज्यादा है.
रिपोर्ट के अनुसार, इस निर्यात में करीब 295 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद ऐसे थे, जिन्हें रूसी कच्चे तेल से तैयार किया गया था. भारत में मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज की गुजरात स्थित जामनगर रिफाइनरी इस कारोबार में सबसे आगे रही.
यूरोपीय संघ बना सबसे बड़ा खरीदार
सितंबर में यूरोपीय संघ ने भारत, तुर्किये और ब्रुनेई से 667 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद खरीदे. वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने 168 मिलियन यूरो, अमेरिका ने 154 मिलियन यूरो और न्यूजीलैंड ने 19 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद आयात किए.
यूरोपीय संघ के बंदरगाहों पर सितंबर में पहुंचीं सात खेपों में से छह की आपूर्ति जामनगर रिफाइनरी ने की थी. अमेरिका को भेजे गए तेल उत्पादों में भी इसी रिफाइनरी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही. जामनगर से अमेरिका को 122 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद निर्यात किए गए.
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई से सितंबर के बीच जामनगर रिफाइनरी के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 32 फीसदी थी. यूरोप पहुंचीं सात खेपों में से तीन इटली, दो रोमानिया और एक-एक स्पेन तथा साइप्रस गईं. इनमें जामनगर से भेजा गया 1.04 लाख टन डीजल भी शामिल था, जो सितंबर में रॉटरडैम की ओर जा रहा था.
रूसी तेल से बने उत्पादों पर यूरोपीय संघ का प्रतिबंध
यूरोपीय संघ ने जनवरी 2026 से रूसी कच्चे तेल से तैयार तेल उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा रखा है. हालांकि, CREA के मुताबिक, नियमों में मौजूद एक छूट के कारण कुछ देशों की रिफाइनरियों में रूसी तेल से तैयार ईंधन पश्चिमी बाजारों तक पहुंच रहा है.
CREA का कहना है कि इस छूट के कारण प्रतिबंध का उद्देश्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पा रहा है. संबंधित देश रूसी कच्चे तेल को अपनी रिफाइनरियों में प्रोसेस करके उससे बने उत्पादों को दूसरे बाजारों में बेच सकते हैं.
इस कमी को दूर करने के लिए संगठन ने सुझाव दिया है कि प्रतिबंध रिफाइनरी के आधार पर लागू किया जाए. इसके तहत जिन रिफाइनरियों ने पिछले छह महीनों में रूसी कच्चे तेल का इस्तेमाल किया हो, वहां तैयार तेल उत्पादों के आयात पर रोक लगाई जा सकती है. हालांकि, यह CREA का सुझाव है, यूरोपीय संघ की मौजूदा नीति नहीं.
भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 13% घटा
पश्चिमी देशों को तेल उत्पादों का निर्यात बढ़ने के बीच भारत ने सितंबर में रूस से कच्चे तेल की खरीद कम की. CREA के मुताबिक, अगस्त की तुलना में सितंबर में भारत का रूसी तेल आयात 13 फीसदी घट गया. यह लगातार दूसरा महीना था, जब आयात में गिरावट दर्ज की गई. सितंबर में आयात अप्रैल 2026 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया.
रिपोर्ट के अनुसार, जामनगर रिफाइनरी में रूसी तेल का आयात अगस्त के मुकाबले 27 फीसदी कम हुआ. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) की पारादीप रिफाइनरी में यह गिरावट 21 फीसदी और नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी में 8 फीसदी रही. इसके बावजूद वाडिनार सितंबर में भारत की सबसे बड़ी रूसी तेल आयातक रिफाइनरी बनी रही.
वहीं, HMEL के मुंद्रा ऑयल टर्मिनल पर रूसी तेल का आयात 74 फीसदी और कोच्चि रिफाइनरी में 32 फीसदी घटा. दूसरी ओर, IOC के मुंद्रा ऑयल टर्मिनल ने सितंबर में 5.70 लाख टन रूसी कच्चा तेल खरीदा, जबकि अगस्त में यहां से कोई आयात नहीं हुआ था.
रूस का दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार
रूसी कच्चे तेल का आयात घटने के बावजूद भारत सितंबर 2026 में रूस का दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार रहा. CREA की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इस महीने रूस से कुल 4.1 अरब यूरो के जीवाश्म ईंधन खरीदे. इस सूची में चीन पहले स्थान पर रहा.
भारत की कुल खरीद में 3.6 अरब यूरो का कच्चा तेल शामिल था, जो करीब 88 फीसदी है. इसके अलावा भारत ने रूस से 309 मिलियन यूरो का कोयला और 161 मिलियन यूरो के तेल उत्पाद आयात किए.
रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2022 से रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 37 फीसदी रही है. वहीं, चीन की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है. ये आंकड़े दिखाते हैं कि रूसी तेल के अंतरराष्ट्रीय कारोबार में भारत अब भी एक बड़ा खरीदार बना हुआ है.
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