नई दिल्ली, एजेंसी। भारत-रूस संबंधों पर शनिवार को हुई परामर्श समिति की बैठक में रूस में मौजूद भारतीय नागरिकों का मुद्दा प्रमुखता से उठा। रूसी सेना में शामिल बताए जा रहे 55 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए भारत रूसी अधिकारियों के संपर्क में है।
बैठक में बताया गया कि रूस ने इस साल करीब 70,000 भारतीय कुशल कामगारों को लेने पर सहमति जताई है। इनमें निर्माण, लॉजिस्टिक्स समेत विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले लोग शामिल हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक की अध्यक्षता की। इसमें रूस में मौजूद भारतीय नागरिकों की जल्द रिहाई और रूसी सेना में शामिल बताए जा रहे भारतीयों के बारे में भी चर्चा हुई। सरकार ने भारतीय नागरिकों की जल्द रिहाई के लिए रूसी अधिकारियों के साथ उच्चतम स्तर पर बातचीत की है। अब तक करीब 140 भारतीय नागरिकों को रिहा किया जा चुका है। वहीं, रूसी सेना में शामिल बताए जा रहे 55 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए भारत रूसी अधिकारियों के संपर्क में है। भारतीय अधिकारियों ने ऐसे एजेंटों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है, जो भारतीय नागरिकों को रूस की सेना में शामिल कराने में कथित रूप से मदद कर रहे हैं।
बैठक में भारत-रूस संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। इनमें व्यापार, निवेश, ऊर्जा, संपर्क, संस्कृति और लोगों के बीच संबंध शामिल हैं। ऑटोमोबाइल, दवा, खाद्य पदार्थ, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और कपड़ा समेत सात क्षेत्रों में भारतीय निर्यात बढ़ाने पर चर्चा हुई। भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर भी विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए संवाद और कूटनीति के प्रति भारत के सक्रिय समर्थन पर भी चर्चा हुई। जयशंकर ने हाल में रूस और यूक्रेन के विदेश मंत्रियों के साथ अपनी बातचीत का भी उल्लेख किया। भारत ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए अपनी ओर से हरसंभव मदद की पेशकश की है।
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