रोचक तथ्य: भारत में 'रावण' नाम के 34 गांव! राजस्थान सबसे आगे, यूपी भी पीछे नहीं – Hindustan

आज दशहरा है। दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और देशभर में प्रमुख त्योहार के रूप में मनाया जाता है। दशहरे पर जिस रावण का पुतला देशभर में जलाया जाता है, उसी नाम से मिलते-जुलते गांव भारत के अलग-अलग हिस्सों में भी मौजूद हैं। इस मामले में राजस्थान सबसे आगे, छत्तीसगढ़ और यूपी भी पीछे नहीं हैं। वेबसाइट vlist.in पर ‘Rawan’ नाम की खोज में 34 गांव और गांवों से जुड़े नाम सामने आए हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये गांव एक-दो राज्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देश के कई हिस्सों में फैले हुए हैं। जबकि, Ravan के नाम से केवल एक गांव अंबेउकर
राजस्थान सबसे आगे: vlist.in पर दिए गए डेटा के मुताबिक राजस्थान सबसे आगे है। यहां Rawan नाम या उससे जुड़े 10 गांव दर्ज हैं। इनमें रावण गुरारी, केरियां रावण, इसरवास (रावण), बरबरी रावण, बगरू रावण, महेशपुरा रावण, खेरली रावण और देओली रावण जैसे नाम शामिल हैं। बता दें vlist.in पर दिया गया डेटा 2011 की जनगणना के अनुसार है। आज के डेट में इसमें बहुत सारे बदलाव हो चुके होंगे। यह तब पता चलेगा, जब अगली जनगणना के रिजल्ट आ जाएंगे।
दूसरी ओर छत्तीसगढ़ में 7 और उत्तर प्रदेश में 6 ऐसे गांव या स्थान मिलते हैं, जिनके नाम में रावण है। छत्तीसगढ़ में रायपुर के अलावा भेजरी रावण, रावण खोंद्रा, रावण (रावड़) और सावन रावण जैसे नाम लिस्ट में हैं।
उत्तर प्रदेश में खीरी का रावण, रावण उर्फ बरागांव, रावण बुजुर्ग, कंद रावण, बहू रावण और रावण खुर्द उर्फ बीबीपुर शामिल हैं। पंजाब में 3, जबकि बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा में 2-2 नाम दर्ज हैं। जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में भी एक-एक स्थान सूची में दिखाई देता है।
दिलचस्प बात यह है कि पूरी लिस्ट में केवल ‘Rawan’ नाम वाले 10 गांव हैं। इनमें कैमूर (बिहार), विदिशा (मध्य प्रदेश), होशियारपुर और कपूरथला (पंजाब), रायपुर (छत्तीसगढ़), खीरी (उत्तर प्रदेश), झुंझुनूं और उदयपुर (राजस्थान) शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के रायपुर में इस नाम के एक से अधिक रिकॉर्ड भी दिखाई देते हैं। vlist.in पर विदिशा का Rawan गांव अलग से दर्ज है और भारत सरकार के जनगणना रिकॉर्ड में भी Rawan नाम के गांव मिलते हैं।
सिर्फ नाम देखकर ऐसा कहना सही नहीं होगा। ‘Rawan’ अंग्रेजी वर्तनी है और अलग-अलग क्षेत्रों में इसका स्थानीय उच्चारण या हिंदी वर्तनी अलग हो सकती है। इसलिए इन सभी गांवों का नाम लंकापति रावण के नाम पर रखा गया है, ऐसा कोई प्रमाण इस लिस्ट से नहीं मिलता।
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में ‘लाइव हिन्दुस्तान’ की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए ‘कुछ अलग’ और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
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