लाइव अमेरिका ने कहा, ईरानी टीम का स्वागत है – BBC

इसराइल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने सेना को बिना किसी रणनीति के युद्ध में भेज दिया है.
चंदन कुमार जजवाड़े
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इसराइल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने सेना को बिना किसी रणनीति के युद्ध में भेज दिया है.
उनका कहना है कि सेना को कम सैनिकों के साथ युद्ध के मैदान में उतारा गया है.
हिब्रू भाषा में दिए गए एक वीडियो बयान में लैपिड ने कहा, "आईडीएफ़ अपनी क्षमता की सीमा तक पहुँच चुकी है और उससे भी आगे निकल गई है. सरकार सेना को घायल हालत में ही युद्ध के मैदान में छोड़ रही है."
लैपिड का कहना है कि सरकार सेना को "बिना किसी रणनीति, बिना ज़रूरी संसाधनों और बहुत ही कम सैनिकों के साथ कई मोर्चों वाले युद्ध" में भेज रही है.
उन्होंने आगे कहा, "रिज़र्व सैनिक पूरी तरह से थक चुके हैं और अब हमारी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं हैं."
उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि वह अति रूढ़िवादी हरेदी समुदाय के पुरुषों को सेना में भर्ती करे – ये वे लोग हैं जो अपना पूरा समय पवित्र यहूदी ग्रंथों के अध्ययन में समर्पित करते हैं, और जिन्हें 1948 में इसराइल के गठन के बाद से आम तौर पर अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट मिलती रही है.
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इसराइली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उनका यह बयान सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल ज़मीर की उस चेतावनी के बाद आया है, जो उन्होंने कल सुरक्षा कैबिनेट को दी थी.
एयाल ज़मीर ने कहा था कि "आईडीएफ़ पतन के कगार पर है."
ठीक एक महीने पहले 28 फ़रवरी को इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले किए थे. उसके बाद से ही इसराइल लगातार मध्य पूर्व में जंग लड़ रहा है.
इस दौरान इसराइली सेना लगातार ईरान और लेबनान में हमले कर रही है. इसके साथ ही उसने सीरिया में भी अपने दुश्मन के ठिकानों पर हमले किए हैं.
इसके साथ ही इसराइली सेना को हिज़्बुल्लाह और ईरान की ओर से हो रहे हमलों से भी निपटना पड़ रहा है, जिससे सेना कई मोर्चों पर एक साथ उलझी हुई है.
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ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी 'मेहर' के अनुसार, तेहरान में धमाकों की आवाज़ें सुनी गई हैं और देश के एयर डिफ़ेंस सिस्टम "दुश्मन के हमलों को नाकाम करने में लगे हुए हैं."
हालांकि इसराइल ने ईरान पर नए हमलों की घोषणा नहीं की है. लेकिन आईडीएफ़ के प्रवक्ता अविचाई अद्राई ने एक्स पर लिखा, "ईरानी शासन के हथियार बनाने वाले उद्योगों के ख़िलाफ़ इसराइल अपने हमलों को तेज़ कर रहा है, और एक हज़ार से ज़्यादा उत्पादन केंद्रों को निशाना बना रहा है."
इससे पहले गुरुवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा था कि ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले दस दिनों के लिए रोके जा रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि ईरान समझौता करना चाहता है.
ट्रंप पहले भी ऐसे दावे कर चुके हैं. हालांकि, ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनका देश अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं कर रहा है.
बीबीसी पर्शियन की वरिष्ठ रिपोर्टर ग़ोचेह हबीबीज़ाद ने बताया है कि उन्हें कई लोगों ने तेहरान में धमाकों की आवाज़ सुनने की जानकारी दी है.
30 साल के एक शख़्स ने उन्हें बताया, "ऐसा लगता है जैसे हमारे दिमाग़ को अब इन धमाकों की आदत होती जा रही है. ठीक वैसे ही जैसे हम इंटरनेट बंद होने के आदी हो गए हैं. हम एक अलग ही तरह से जीना सीख रहे हैं… प्रतिबंधों, महँगाई, ख़तरे, सामाजिक दबाव, युद्ध और बिना इंटरनेट की ज़िंदगी."
ईरान में इस समय इंटरनेट लगभग बंद है, लेकिन फिर भी कुछ लोग किसी तरह इंटरनेट से जुड़ने में कामयाब हो जाते हैं.
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