पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से ही टीएमसी में भूचाल आया हुआ है। ममता बनर्जी ने भी नहीं सोचा होगा कि आलम यह हो जाएगा। 15 साल तक प्रदेश में एकछत्र राज करने के बाद आज ममता, अलग-थलग होती नजर आ रही हैं। कहां तो लग रहा था कि ममता अपने भतीजे अभिषेक के हाथ में पार्टी की बागडोर सौंपेंगी, कहां अब उनकी ही सत्ता खतरे में जाती नजर आ रही। यहां तक कि नेता प्रतिपक्ष के चयन में भी ममता बनर्जी को बगावत का सामना करना पड़ा है। खबरें यह भी हैं कि बागियों का एक गुट पार्टी में टूट की तैयारी में जुटा है। इन सबके बीच सवाल यह भी उठने लगा है कि इन हालात को भाजपा किस तरह से देखती है?
कैसे मिलेगा फायदा
अगर बात करें तो टीएमसी के कमजोर होने का सीधा फायदा भाजपा को मिलता नजर आ रहा है। अगर टीएमसी एकजुट रही तो ममता ताकतवर बनी रहेंगी। ऐसे में वह फिर से पार्टी को सत्ता में ला सकती हैं। इतना ही नहीं, बतौर मजबूत विपक्ष भी वह भाजपा की सरकार को लगातार चुनौती दे सकती हैं। लेकिन अगर टीएमसी दो-फाड़ हो जाती है तो ऐसे में भाजपा के लिए चीजें काफी आसान हो जाएंगी। भाजपा को सीधे चुनौती नहीं मिलेगी। ममता इतनी कमजोर रहेंगी कि वह सत्ताधारी दल पर हमला करेंगी भी तो वह इतना असरदार नहीं होगा।
भाजपा जानती है ममता की ताकत
असल में भाजपा को भी बखूबी पता है कि ममता बनर्जी वापसी करने में सक्षम हैं। अगर टीमसी के सभी विधायक ममता के साथ रहते हैं तो वह मजबूत बनी रहेंगी। लेकिन अगर टीएमसी के कुछ विधायक टूटकर अलग पार्टी बना लेते हैं तो यह ममता को कमजोर बनाएगा। इसलिए भाजपा हमेशा एक टूटी हुई टीएमसी को अपने विपक्षी पार्टी के रूप में देखना चाहेगी, बनिस्बत एकजुट और मजबूत टीएमसी के।
एक नहीं कई फायदे
टूटी हुई टीएमसी से भाजपा को एक फायदा और होगा। इसके दम पर वह कांग्रेस और लेफ्ट को मजबूत बनने से भी रोक सकेगी। असल में टीएमसी में टूट का फायदा कांग्रेस भी उठाने की फिराक में है। उसे उम्मीद है कि जिन लोगों को कांग्रेस से तोड़कर दीदी ने बंगाल में तृणमूल कांग्रेस बनाई थी, वह लोग फिर से अपनी मूल पार्टी में लौट आएंगे। लेकिन भाजपा ऐसा नहीं चाहती है। वह चाहती है कि मुख्य विपक्षी दल टीएमसी ही नहीं, भले ही सिम्बोलिक तौर पर ही सही।
अंदर से तोड़ने का खेल
असल में भाजपा की रणनीति टीएमसी को अंदर से तोड़ने की है। इस तरह ममता बनर्जी के खिलाफ बोलते टीमएसी नेता, अभिषेक बनर्जी का कम होता कद। ममता बनर्जी का अंदरखाने बढ़ता विरोध, भाजपा के लिए हर तरह से फायदेमंद है। भाजपा को पता है कि हार के बाद ममता तात्कालिक तौर पर भले कमजोर पड़ी हों, लेकिन वह खत्म नहीं हुई हैं। लेकिन अगर वह पार्टी पर अपना दबदबा खो देती हैं तो उनका सियासी रसूख भी दांव पर लग जाएगा।
दिल्ली का टूटेगा सपना
सिर्फ बंगाल ही नहीं, कमजोर होने के बाद ममता की पूछ इंडिया गठबंधन में भी कम हो जाएगी। अब यह बात तो जग-जाहिर है कि ममता बनर्जी हमेशा से दिल्ली में बड़ी भूमिका की आकांक्षी रही हैं। लेकिन बंगाल चुनाव में जो हाल हुआ है, उसने ममता के इस इरादे पर भी पानी फेरा है। भाजपा भी यही चाहेगी कि ममता बंगाल तक ही सीमित रह जाएं। वह टूटती टीएमसी को संभालने में इस कदर खो जाएं कि राष्ट्रीय स्तर पर उभरने की उनकी मंशा धरी की धरी रह जाए। अब देखना यह है कि भाजपा की यह चाहत पूरी होती है या ममता फिर से कमबैक करने में कामयाब हो पाती हैं।
मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।
आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।
यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।
जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।
अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।
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