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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हाथों करारी हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस बिखरती हुई नजर आ रही है. पहले पार्टी के 60 विधायकों ने बागी तेवर दिखाते हुए अलग गुट बनाने का फैसला किया था. अब तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने भी बगावती रुख अपना लिया है. बारासात से लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने सोमवार को दावा किया कि पार्टी के लगभग 20 सांसदों ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने की इच्छा जताई है और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र सौंपा है.
तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी के बागी सांसदों को आड़े हाथों लेते हुए उन पर तीखी टिप्पणी की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, ‘2024 में सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल की. एनडीए को जनादेश नहीं मिला था. पीले रंग से सने पैंट पहने सभी लालची, स्वार्थी और गद्दार अब बीजेपी में शामिल हो जाएं- अपनी सीटें छोड़ दें और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ें. देखते हैं आप कितने बड़े हीरो साबित होते हैं.’ महुआ मोइत्रा ने बहरामपुर के तृणमूल सांसद युसुफ पठान को भी आड़े हाथों लिया है.
उन्होंने X पर एक अलग पोस्ट में लिखा, ‘युसुफ पठान, आप दिल्ली क्यों जा रहे हैं क्योंकि अमित शाह ने आपको बुलाया है? थोड़ी हिम्मत रखो. आपने भारत के लिए खेला है. हमारे जिले ने आपको भारी बहुमत से जिताया है. थोड़ी शर्म और थोड़ा साहस रखो.’ महुआ के इस पोस्ट से संकेत मिलते हैं कि तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों में युसुफ पठान भी शामिल हैं. इससे पहले तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी सांसदों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि वे केवल ममता बनर्जी की लोकप्रियता के सहारे चुनाव जीतते रहे हैं और विपक्ष में बैठने का साहस नहीं रखते.
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ममता बनर्जी नई दिल्ली में मौजूद हैं. उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद हैं. ममता जब सोमवार को इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल हो रही थीं, तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों का गुट केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा के चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव के मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर जुटा था. इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी शामिल हुए.
सूत्रों ने बताया कि बैठक में प्रसून बनर्जी (हावड़ा), शर्मिला सरकार (बर्धमान पूर्व), जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार), अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा), कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम), बापी हलदार (मथुरापुर) और असीत माल (बोलपुर) समेत कई बागी सांसद मौजूद थे. लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 सांसद हैं. अगर 20 सांसद अलग गुट बनाते हैं तो वे दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई के जद में नहीं आएंगे. क्योंकि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद या विधायक टूटकर अलग गुट बनाते हैं, तो उन पर दल बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता. यदि तृणमूल सांसदों के इस बागी गुट को मान्यता मिल जाती है, तो वे संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से बचाव का दावा कर सकते हैं.
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