'लोग देखते हैं कि मैं बच गया, लेकिन…', एअर इंडिया विमान हादसे में एकमात्र बचे व्यक्ति ने बयां किया अपना दर्द – Jagran

एअर इंडिया विमान हादसे के एकमात्र जीवित बचे विश्वकुमार रमेश ने अपनी पहली बरसी पर मानसिक पीड़ा साझा की है। …और पढ़ें
एअर इंडिया विमान हादसे के एकमात्र बचे व्यक्ति ने बयां किया अपना दर्द(फाइल फोटो)
रमेश विमान हादसे के एकमात्र जीवित बचे व्यक्ति हैं।
वे PTSD, नींद न आने और एंग्जायटी से जूझ रहे हैं।
पीड़ित परिवार अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एअर इंडिया की उड़ान AI-171 के मलबे से सुरक्षित बाहर निकलने के एक साल बाद विमान में सवार 260 लोगों में से एकमात्र जीवित बचे व्यक्ति विश्वकुमार रमेश का कहना है कि दुनिया उनके बचने को तो देखती है, लेकिन उस मानसिक बोझ को नहीं समझती जो वह हर दिन उठाते हैं।
पीटीआई के अनुसार, रमेश ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि लोग देखते हैं कि मैं बच गया हूं, लेकिन वे उन चुनौतियों को नहीं देख पाते जो बंद दरवाजों के पीछे आज भी जारी हैं। मैं अभी भी नींद न आने, एंग्जायटी और भयानक यादों से जूझ रहा हूं। एक साल बीत जाने के बाद भी मैं अपनी जिंदगी को फिर से संवारने और अपने परिवार को हर संभव सहारा देने की कोशिश कर रहा हूं।
पिछले साल 12 जून को एअर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद अहमदाबाद के मेघानीनगर में एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर पर क्रैश हो गया था। इस भयानक हादसे में कुल 260 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें विमान में सवार 241 लोग और जमीन पर मौजूद 19 लोग शामिल थे।
ब्रिटिश नागरिक विश्वकुमार रमेश विमान की 11A सीट पर बैठे थे। हादसे के वक्त वह टूटे हुए इमरजेंसी एग्जिट से बाहर निकलने में सफल रहे थे। हादसे के बाद वायरल हुए फुटेज में उन्हें खून से लथपथ और गहरे सदमे की हालत में धधकते मलबे से लंगड़ाते हुए दूर जाते देखा गया था।
बीबीसी न्यूज के अनुसार, इस हादसे में उनके भाई अजय की भी मौत हो गई थी, जो उनसे बस कुछ ही पंक्तियां आगे बैठे थे। क्रैश के पांच महीने बाद रमेश ने कहा था कि मैं सबसे भाग्यशाली इंसान हूं, लेकिन साथ ही, मैंने अपना सब कुछ खो दिया। मेरे लिए, मैंने अपना भाई खो दिया।
रमेश को पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर डायग्नोस हुआ था। उन्होंने बताया कि वह अपने पारिवारिक जीवन से पूरी तरह कट चुके हैं। उन्होंने बताया कि अब मैं अकेला हूं। मैं बस अपने कमरे में अकेला बैठता हूं, अपनी पत्नी या बेटे से बात नहीं करता। मुझे बस अपने घर में अकेला रहना पसंद है।
पहली बरसी पर अपनी स्थिति के बारे में बात करते हुए रमेश ने कहा कि मैं जिंदा बचने के लिए आभारी हूं, लेकिन जीवित बचना इस कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है। उसके बाद से मैंने जो झेला है, उसे शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है।
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, एअर इंडिया ने पुष्टि की है कि एयरलाइन और टाटा समूह के प्रतिनिधियों ने रमेश से मुलाकात की है और वे लगातार उनके संपर्क में हैं। कंपनी का कहना है कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है कि उन्हें उचित समर्थन मिलता रहे।
शुक्रवार को पीड़ितों के परिवारों ने इस दर्दनाक हादसे की पहली बरसी मनाई। हालांकि, ये परिवार अभी भी अंतिम जांच रिपोर्ट के आने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि उन्हें यह जवाब मिल सके कि दशकों में भारत की इस सबसे भीषण विमानन आपदा की असली वजह क्या थी।
 
यह भी पढ़ें- अहमदाबाद प्लेन हादसे का एक साल: बुजुर्ग दंपती का पहला हवाई सफर ही बना आखिरी, आसमान में टूटा बेटे से मिलने का सपना

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News