लोढ़ा डेवलपर्स के पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र लोढ़ा पर एक और FIR, कंपनी को 6.67 करोड़ का चूना लगाने का आरोप – AajTak

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मुंबई में लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड के पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र लोढ़ा की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. उनके खिलाफ धोखाधड़ी के एक नए मामले में FIR दर्ज की गई है. इस बार उन पर साल 2019 में कंपनी को 6.67 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा है.
मुंबई के एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में यह मामला दर्ज किया गया है. राजेंद्र लोढ़ा पहले से ही पुराने मामलों में जेल में बंद हैं. इससे पहले मुंबई क्राइम ब्रांच और प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी उनके खिलाफ कार्रवाई कर चुके हैं.
आजतक/इंडिया टुडे के पास इस मामले में दर्ज FIR की कॉपी मौजूद है. लोढ़ा डेवलपर्स की ओर से 22 अक्टूबर को दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, यह पूरा मामला साल 2019 में भिवंडी की एक जमीन से जुड़ी डील और साउथ मुंबई में एक फ्लैट की बिक्री से शुरू हुआ था.
आरोप है कि राजेंद्र लोढ़ा ने कंपनी में अपने पद और अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इन दोनों सौदों को आपस में जोड़ दिया. इसके जरिए कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया. पुलिस अब इस पूरे लेनदेन की जांच कर रही है.
FIR के मुताबिक, साल 2019 में राजेंद्र लोढ़ा ने भिवंडी में एक जमीन के मालिकों के साथ डेवलपमेंट एग्रीमेंट कराने में भूमिका निभाई थी. इस सौदे के लिए उन्होंने 8.5 लाख रुपये की ब्रोकरेज भी दी थी. इसके कुछ दिन बाद उन्होंने सैकवीर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स एलएलपी नाम की कंपनी को इस मामले में शामिल किया.
आरोप है कि सैकवीर के डायरेक्टरों ने लोढ़ा डेवलपर्स के साउथ मुंबई प्रोजेक्ट में एक फ्लैट खरीदने में दिलचस्पी दिखाई थी. इस फ्लैट की शुरुआती कीमत 6.86 करोड़ रुपये बताई गई थी.
शिकायत के अनुसार, राजेंद्र लोढ़ा ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इस फ्लैट की कीमत में 1.5 करोड़ रुपये की छूट दे दी. इसके बाद फ्लैट की कीमत घटकर 5.36 करोड़ रुपये रह गई. सैकवीर बिल्डर्स के डायरेक्टरों ने लोढ़ा डेवलपर्स को 36 लाख रुपये का भुगतान भी किया.
आरोप है कि इसके बाद राजेंद्र लोढ़ा ने इस फ्लैट की खरीद-बिक्री को भिवंडी की जमीन के सौदे से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी.
FIR में आरोप लगाया गया है कि राजेंद्र लोढ़ा ने लोढ़ा डेवलपर्स को भेजे गए अपने कम्युनिकेशन में दावा किया कि सैकवीर बिल्डर्स भिवंडी की जमीन के सौदे में ब्रोकर थी. उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी ने जमीन का साफ और बाजार में बिक्री योग्य मालिकाना हक (Clear and Marketable Title) हासिल कराने में मदद की थी.
राजेंद्र लोढ़ा ने इस काम के बदले सैकवीर की सेवाओं की कीमत 5 करोड़ रुपये बताई थी. आरोप है कि उन्होंने कंपनी को निर्देश दिया कि सैकवीर बिल्डर्स को मिलने वाली 5 करोड़ रुपये की ब्रोकरेज को साउथ मुंबई के फ्लैट के बदले बकाया रकम में एडजस्ट कर दिया जाए.
शिकायत के मुताबिक, इसी व्यवस्था के तहत जरूरी दस्तावेज तैयार किए गए और फ्लैट सैकवीर बिल्डर्स के नाम आवंटित कर दिया गया. आरोप है कि राजेंद्र लोढ़ा यहीं नहीं रुके. उन्होंने एक अन्य व्यक्ति को भी इस सौदे में शामिल किया. उस व्यक्ति की पहचान नितिन नारायण केनी के रूप में की गई है.
राजेंद्र ने कथित तौर पर दावा किया कि नितिन नारायण केनी भिवंडी की संबंधित जमीन पर कब्जे में थे. इसके बाद लोढ़ा डेवलपर्स से उन्हें 17 लाख रुपये का भुगतान भी कराया गया.
लोढ़ा डेवलपर्स के मुताबिक, राजेंद्र लोढ़ा के कार्यकाल के दौरान किए गए इन सभी लेनदेन की हाल में जांच शुरू की गई थी. इसी जांच के दौरान कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया. कंपनी ने आरोप लगाया है कि राजेंद्र लोढ़ा ने पांच अन्य लोगों के साथ मिलकर 6.67 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया.
इस शिकायत के आधार पर एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(3), 318(4), 316(5) और 3(5) के तहत FIR दर्ज की गई है. पुलिस अब मामले में शामिल अन्य लोगों और कथित वित्तीय लेनदेन की भूमिका की जांच कर रही है.
राजेंद्र लोढ़ा के खिलाफ यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले लोढ़ा डेवलपर्स ने उन पर कंपनी के साथ करीब 85 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था. इसी मामले में सितंबर 2025 में मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल ने उन्हें गिरफ्तार किया था. बाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में उनके खिलाफ कार्रवाई की.
मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस मामले की जांच के बाद दिसंबर 2025 में चार्जशीट दाखिल की थी. पुलिस की चार्जशीट में कथित धोखाधड़ी के तरीके और इसमें इस्तेमाल किए गए अलग-अलग तरीकों का खुलासा किया गया था.
मुंबई पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, राजेंद्र लोढ़ा पर लगे आरोपों में कथित धोखाधड़ी की रकम करीब 181 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी. हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय की जांच में इस मामले का दायरा और बड़ा बताया गया. ED ने जांच के दौरान कथित अपराध से हासिल रकम यानी Proceeds of Crime का आंकड़ा 370 करोड़ रुपये से अधिक बताया.
मार्च में मुंबई की विशेष अदालत में ED ने दावा किया था कि यह रकम कथित तौर पर फर्जी जमीन सौदों, बार्टर अरेंजमेंट, फ्लैट खरीदारों से नकद वसूली और अलग-अलग कंपनियों व लोगों के जरिए पैसों की लेयरिंग करके जुटाई गई थी.
ED के मुताबिक, कथित तौर पर जुटाई गई रकम को कई कंपनियों और लोगों के जरिए इधर-उधर किया गया, ताकि पैसों के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके. एजेंसी इस पूरे मामले को मनी लॉन्ड्रिंग के नजरिए से देख रही है.
अब 2019 के भिवंडी जमीन सौदे और साउथ मुंबई फ्लैट से जुड़े 6.67 करोड़ रुपये के कथित फ्रॉड में नई FIR दर्ज होने के बाद राजेंद्र लोढ़ा के खिलाफ जांच का दायरा और बढ़ गया है.
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