वार्ता फेल, ट्रंप की धमकियां और नेतन्याहू का एकला चलो… क्या मिडिल ईस्ट फिर जंग का अखाड़ा बनने जा रहा? – AajTak

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अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में शुरू हुई शांति वार्ता बीच में ही अटकती दिख रही है. भले ही दोनों देशों के बीच समझौते पर साइन हो गए हों, लेकिन ग्राउंड पर ये फेल हो गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता के बीच ईरान पर दोबारा हमले करने की धमकी दी. ऐसे में ईरान ने बातचीत की मेज से उठकर चला गया.
स्विट्जरलैंड में वार्ता के दौरान ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान को चेतावनी दी कि अगर उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कोई भी बाधा डाली या उसके ‘प्रॉक्सिस’ ने लेबनान में गड़बड़ी की, तो अमेरिका ईरान को पूरी तरह तबाह कर देगा.
ट्रंप की इन धमकियों पर ईरान भड़क गया और इसे सीजफायर समझौते के ‘अनुच्छेद 1’ का उल्लंघन बताया. ट्रंप की इस धमकी के बाद ईरानी डेलिगेशन ने वार्ता से वॉकआउट कर दिया और वापस लौटने से भी साफ इनकार कर दिया. हालांकि, कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देश स्थिति को संभालने में जुटे हैं.
अब तक की वार्ता ‘बेनतीजा’ 
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, भले ही ईरान और अमेरिका की मीटिंग बीच में ही रुक गई हो, लेकिन मध्यस्थों के जरिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है. हालांकि, अभी तक इस वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला है. ऐसे में एक बार फिर ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता फेल होती दिख रही है.
नेतन्याहू का ‘एकला चलो’ रवैया
दूसरी तरफ, इजरायल का ‘एकला चलो’ रवैया इस मामले में आग में घी डालने का काम कर रहा है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका के साथ मिलकर ये जंग शुरू की थी. लेकिन अब वो ट्रंप की किसी भी सलाह को मानने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं. उन्होंने साफ लफ्जों में कहा है कि वो अपनी सुरक्षा के मामले में किसी के दबाव में नहीं आएंगे.
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नेतन्याहू ने अमेरिकी रुख से अलग रास्ता अपना लिया है और ट्रंप के मना करने के बावजूद लगातार लेबनान पर हमले कर रहे हैं. इसे लेकर नेतन्याहू ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप वो सब कुछ नहीं करते जो मैं चाहता हूं, और न ही मैं वो सब करता हूं जो वो चाहते हैं. हम स्वतंत्र और गौरवान्वित देशों के नेता हैं; कभी-कभी हमारी सोच आपस में मेल नहीं खाती.
फिर जंग का अखाड़ा बन सकता है मिडिल-ईस्ट
नेतन्याहू के इस बयान से साफ है कि इजरायल अब अमेरिका-ईरान वार्ता से खुद को अलग करके चल रहा है और वो लेबनान में हमले जारी रखेगा. अगर ऐसा हुआ तो मिडिल ईस्ट के दोबारा जंग का अखाड़ा बनने में देर नहीं लगेगी और इसका नतीजा पहले से ज्यादा भयानक हो सकता है.
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