हजारीबाग, हमारे प्रतिनिधि। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से आयोजित तुलसी सप्ताह एक आकर्षक अंतर-विभागीय भाषण प्रतियोगिता के साथ संपन्न हो गया। वर्तमान संदर्भ में रामचरितमानस की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित इस प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि तुलसीदास का साहित्य किसी पंथ विशेष का ग्रंथ नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने के साथ-साथ उनके जैसी शालीनता को अपनाना भी उतना ही आवश्यक है।
वर्तमान समय में फैल रहे भ्रष्टाचार और व्यभिचार जैसी कुप्रथाओं के बीच रामचरितमानस की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ जाती है।हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ सुबोध सिंह ‘शिवगीत ने कहा कि तुलसीदास का संपूर्ण साहित्य मूल रूप से लोकमंगल की भावना को समर्पित है। वहीं मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ. सैयद जैन उल हक़ ने राम को किसी एक पंथ या भाषा का नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत का सांस्कृतिक नायक बताया। डॉ केदार सिंह ने भी समाज को मानवीय मूल्यों से जोड़ने में तुलसी साहित्य के योगदान को रेखांकित किया।अर्थशास्त्र विभाग के डॉ देवनारायण राम, शिक्षाशास्त्र के डॉ मृत्युंजय प्रसाद और अंग्रेजी विभाग के डॉ नीरज दांग की निर्णायक मंडली ने परिणामों की घोषणा की। जिसमें प्रथम स्थान ऋतु राव शिक्षाशास्त्र विभाग,द्वितीय स्थान राहुल कुमार राजनीति विज्ञान विभाग, तृतीय स्थान नम्रता कुमारी विश्वकर्मा और सांत्वना पुरस्कार मिष्टी कुमारी को दिया गया।कार्यक्रम में कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा और अन्य शिक्षकों ने सामूहिक रूप से रामचरितमानस के उत्तरकांड का पाठ किया। इस अवसर पर डॉ. सुकल्याण मोइत्रा, डॉ. गंगानंद सिंह, डॉ. विजय कुजूर, डॉ. राजकुमार चौबे और डॉ. अमित कुमार सिंह सहित कई गणमान्य शिक्षक उपस्थित रहे। यह आयोजन तुलसी साहित्य के संदेशों को समकालीन जीवन से जोड़ने के संकल्प के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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