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केरल के तिरुवनंतपुरम लोकसभा क्षेत्र में इस बार कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने चार सीटों पर जीत दर्ज की. शशि थरूर के गढ़ माने जाने वाले इस इलाके की 7 विधानसभा सीटों में से 3 अन्य पार्टियों के खाते में गईं. नैय्याट्टिनकारा, वट्टियूरकावु और कोवलम सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की.
तिरुवनंतपुरम भी गठबंधन में सहयोगी रही कम्युनिस्ट मार्क्सवादी पार्टी केरल राज्य समिति के पास गई. इसके अलावा कज़हक्कुट्टम और निमोन पर भारतीय जनता पार्टी और परसाला पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने जीत दर्ज की.
अगर पिछले चुनाव से तुलना करें, तो 2021 में यूडीएफ को यहां सिर्फ एक सीट मिली थी, जबकि इस बार उसने 4 सीटें जीतकर अपनी स्थिति मजबूत की है.
हालांकि, शशि थरूर का यह क्षेत्र होने के बावजूद पिछले कुछ वर्षों में यहां कांग्रेस की पकड़ कमजोर होती दिखी है. इसके पीछे संगठनात्मक समस्याएं और बीजेपी का बढ़ता जनाधार माना जा रहा है.
थरूर रहे स्टार प्रचारक
थरूर पहले संयुक्त राष्ट्र में राजनयिक रह चुके हैं. वे 2009 से लगातार इस सीट से सांसद हैं. हालांकि 2024 में उनकी जीत का अंतर घटकर करीब 16 हजार वोट रह गया था. पिछले साल पार्टी के साथ उनके रिश्तों में कुछ खटास भी आई थी, लेकिन इस साल राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात के बाद वह फिर सक्रिय हो गए.
केरल चुनाव में थरूर यूडीएफ के स्टार प्रचारक रहे और उन्होंने 12 जिलों की करीब 59 सीटों पर प्रचार किया.
कुल मिलाकर, इस बार तिरुवनंतपुरम में यूडीएफ की वापसी ने कांग्रेस के लिए राहत की खबर दी है, लेकिन बीजेपी की बढ़ती ताकत पार्टी के लिए आगे भी चुनौती बनी रहेगी.
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