गुजरात के भुज में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पाकिस्तान को जिस अंदाज़ में ललकारा, उसने पूरे देश में जोश भर दिया. एक तरफ़ जहां भारत पर्यटन और विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ पाकिस्तान आतंकवाद को अपना राष्ट्रीय एजेंडा बना बैठा है, पीएम मोदी ने यह बात खुलकर कही.
उन्होंने कहा कि भारत पर्यटन में विश्वास करता है, पाकिस्तान को लगता है कि आतंकवाद ही पर्यटन है. ये मानसिकता दुनिया के लिए खतरा है. इतना सच सुनने का पाकिस्तान आदी कहां है, यही वजह है कि उसने तिलमिलाकर इस बयान को नफरत भरा कहा. उसे अपनी नफरत भूल गई, जब उसके पाले हुए आतंकियों ने पहलगाम में धर्म पूछकर नरसंहार किया था.
पीएम मोदी का यह बयान शायद अब तक का सबसे सख्त लहज़ा था, जिसमें उन्होंने सीधी चेतावनी दी -‘सुख-चैन से जीओ, रोटी खाओ वरना मेरी गोली तो तैयार है’. यह सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि एक स्पष्ट संदेश था कि भारत अब आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपना चुका है. 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तान-समर्थित आतंकियों ने 26 निर्दोष नागरिकों की जान ले ली थी. इसके बाद भारत ने 6-7 मई की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू कर दिया. इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठनों के गढ़ पर सीधा प्रहार किया. पाकिस्तान और पीओके में स्थित 9 ठिकानों को तबाह कर दिया गया.
इस पूरे ऑपरेशन में भारत से मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान वैसे ही परेशान है. इसी बीच पीएम मोदी की इस चेतावनी के बाद पाक बौखला गया है. इस्लामाबाद ने मोदी के बयानों को ‘नफरत भरा’ बताया और यूएन चार्टर की दुहाई देने लगा. इतना ही नहीं खुद धर्म और जिहाद के नाम पर आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला पाकिस्तान भारत में धर्मिक उन्माद का पहाड़ा रट रहा है.
पाकिस्तान का ये दावा बिल्कुल झूठा है क्योंकि पीएम मोदी ने खुद ही बताया कि भारत ने 15 दिन तक इंतज़ार किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने 15 दिन में आतंकियों पर कोई कार्रवाई नहीं की, इससे साफ है कि आतंकवाद अब उनका ‘बिज़नेस मॉडल’ बन चुका है. उन्होंने सरकार का रुख स्पष्ट किया है कि अब आतंकवाद के लिए कोई जगह नहीं. पाकिस्तान जैसे देश अगर इसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल करेंगे, तो भारत चुप नहीं बैठेगा.