सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि अगर कोई लिव-इन रिलेशनशिप ‘शादी जैसी प्रकृति’ का है, तो उस रिश्ते में महिला के साथ क्रूरता करने वाले पुरुष पर भी आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है. कोर्ट ने माना कि केवल इस आधार पर किसी महिला को कानूनी सुरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता कि उसकी शादी औपचारिक रूप से नहीं हुई है.
सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि घरेलू हिंसा और मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना जैसी समस्याएं केवल विवाह तक सीमित नहीं हैं. अगर कोई रिश्ता लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह निभाया गया हो और उसमें शादी जैसे सभी प्रमुख तत्व मौजूद हों, तो उस रिश्ते में रहने वाली महिला भी कानून के तहत सुरक्षा की हकदार है.
कोर्ट ने ये भी साफ किया कि ये फैसला हर लिव-इन रिलेशनशिप पर खुद लागू नहीं होगा. केवल वही रिश्ता इस कानूनी दायरे में आएंगे, जो असल में शादी जैसे रहते हों. इसके लिए महिला को शुरुआती स्तर पर ये दिखाना होगा कि दोनों पक्षों के बीच शादी जैसा रिश्ता बनाने की साफ मंशा थी और वे लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे थे.
ये फैसला कर्नाटक से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें लड़के ने ये दलील दी थी कि दोनों के बीच कानूनी विवाह नहीं हुआ था, इसलिए उसके खिलाफ क्रूरता से संबंधित आपराधिक प्रावधान लागू नहीं हो सकते. सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि कानून की व्याख्या उसके सामाजिक मकसद को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए.
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 498A, जिसका मकसद महिलाओं को घरेलू क्रूरता से बचाना है, अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के रूप में लागू है. इस कानून का मकसद महिलाओं को सुरक्षा देना है, इसलिए इसकी संकीर्ण व्याख्या नहीं की जा सकती.
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से कहा गया था कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को पहले से ही घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत पर्याप्त सुरक्षा प्राप्त है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से असहमति जताई. अदालत ने कहा कि घरेलू हिंसा कानून मुख्य रूप से संरक्षण, निवास, भरण-पोषण और मुआवजे जैसे नागरिक अधिकार प्रदान करता है, जबकि क्रूरता से जुड़े मामलों में आपराधिक जिम्मेदारी तय करने का मकसद अलग है.
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हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक… तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी … और पढ़ें
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