यूपी में भीषण गर्मी को देखते हुए योगी सरकार ने श्रमिकों को बड़ी राहत दी है। उन्हें हीट से बचाने के लिए अब पांच घंटे का दोपहर विश्राम मिलेगा। यह विश्राम पूर्वाह्न 11 बजे से शाम चार बजे तक का होगा। श्रमिकों से सुबह छह बजे से 11 बजे तक और शाम चार से सात बजे के बीच काम कराया जा सकेगा। इसके साथ ही श्रमिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। इस पर कोई भी श्रमिक शिकायत दर्ज करा सकता है। श्रम एवं सेवायोजन विभाग ने इसे लेकर सभी सेवायोजकों, प्रतिष्ठानों और ठेकेदारों के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। माना जा रहा है कि पिछले दिनों नोएडा में हुए बवाल को देखते हुए सरकार ने यह फैसले किए हैं।
प्रदेश में बढ़ती गर्मी और हीट वेव के खतरे के बीच सरकार ने श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। खास बात यह है कि श्रमिकों से 11 बजे से शाम चार बजे के बीच खुले में कतई काम नहीं लिया जाएगा। इस दौरान कार्य स्थगित रखने या इंडोर ही काम कराया जा सकेगा। तापमान कम होने पर शाम चार से सात बजे के बीच काम कराया जा सकेगा।
इसके अलावा सरकार ने कार्यस्थल पर स्वच्छ पेयजल, छायादार विश्राम स्थल, प्राथमिक उपचार किट और ओआरएस की उपलब्धता अनिवार्य कर दी है। श्रमिकों को सिर ढंकने, हल्के सूती कपड़े पहनने और समय-समय पर पानी पीने की सलाह दी गई है। साथ ही गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार श्रमिकों को विशेष सुरक्षा देने के निर्देश दिए गए हैं।
किसी भी श्रमिक को चक्कर आने, तेज बुखार, उल्टी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत काम बंद कराकर उपचार कराए जाने और जरूरत पड़ने पर श्रमिक को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजना होगा। इन आदेशों का सख्ती से पालन कराने और निगरानी के लिए अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।
मई दिवस पर योगी सरकार ने प्रदेश के कामगारों को एक और तोहफा दिया है। राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम शुरू किया गया है। इसका टोल फ्री नंबर 1800-180-5160 जारी किया गया है। इसके अलावा 0512-2295176 व 2297142 व मोबाइल नंबर 9695892592 और 9889892592 पर संपर्क किया जा सकता है। इन नंबरों पर श्रमिक अपनी किसी भी समस्या या जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हैं।
वहीं गौतमबुद्ध नगर के लिए अलग हेल्पलाइन (0120-4126892) शुरू की गई है। साथ ही तीन मोबाइल नंबर 8796311216, 8796355216 व 8796321216 भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा ईमेल पर भी जानकारी लेने के साथ ही शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
लखनऊ। बीते 20 सालों की बात करें तो यूपी के कामगारों (श्रमिकों) की जिंदगी में काफी कुछ बदला है। दो दशक पहले वे सिर्फ कृषि या बेहद असंगठित क्षेत्र में काम करते थे। वो सामाजिक सुरक्षा से वंचित थे। मगर अब हालात बदले हैं। महंगाई के साथ उनकी मजदूरी में भी इजाफा हुआ है। यह बढ़ोत्तरी तकरीबन ढाई गुनी तक है। वे अब संगठित क्षेत्र का हिस्सा बने हैं और उन्हें सामाजिक सुरक्षा का कवच मिला है। यूपी के श्रमिक डिजिटल बैंकिंग से जुड़े हैं। श्रम सुधारों के जरिए उनके जीवन में परिवर्तन दिखाई देते हैं।
बीते एक दशक में इस दिशा में क्रांतिकारी बदलाव हुए। सरकार ने असंगठित क्षेत्र के कामगारों का पंजीकरण कराया। फिर रेहड़ी, पटरी वालों से लेकर गिग वर्करों तक के लिए योजनाएं शुरू की गई। यूपी में ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 8 करोड़ 44 लाख से अधिक है। निर्माण श्रमिकों के लिए बीओसीडब्ल्यू बोर्ड अलग से काम करता है। बोर्ड में तकरीबन एक करोड़ 90 लाख श्रमिक पंजीकृत हैं। बोर्ड शीघ्र ही इसमें नये श्रमिकों के पंजीकरण की योजना बना रहा है।
बात 1991 से शुरू करें तो तब प्रदेश में अकुशल श्रमिक का बेसिक वेतन शहरी क्षेत्र में 750 और ग्रामीण में 725 रुपये था। वर्ष 2006 में यह बेसिक बढ़कर 2600 रुपये हो गया जबकि अकुशल श्रमिक का मासिक मजदूरी 5200 रुपये थी। फिर 2014 में मजदूरी का रिवीजन हुआ। अकुशल श्रमिक की मजदूरी बढ़कर 6016 रुपये प्रति माह हो गई थी। मार्च 2026 में वेतन 11020 रुपये हुआ। नोएडा में हुए हालिया श्रमिक विवाद के बाद योगी सरकार द्वारा 17 अप्रैल को मजदूरी में करीब 21 फीसदी की अंतरिम वृद्धि की गई है। प्रदेश को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। सी केटेगरी में शामिल शहरों की बात करें तो मासिक मजदूरी 12356 रुपये हो गई है। ‘ए’ श्रेणी में शामिल गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों का वेतन 11313 से बढ़ाकर₹ 13690 रुपये प्रति माह किया गया है।
-प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना-इससे जुड़ने वाले 18 से 40 साल तक के श्रमिकों के लिए 60 साल का होने पर 3000 पेंशन
-दुर्घटना में मृत्यु के लिए एग्रेशिया योजना-ई-श्रम कार्ड धारकों को दो लाख की सहायता (अभी योजना का रिन्यूअल नहीं)
-प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना- 12 रुपये अंशदान
-अटल पेंशन योजना- एक हजार रुपये तक पेंशन का प्रावधान
-निर्माण श्रमिकों के परिवारों को आयुष्मान योजना का लाभ- पांच लाख रुपये सालाना तक
-श्रमिकों की बेटियों के विवाह में एक लाख की आर्थिक सहायता-सामान्य विवाह पर 65 हजार व अंतरजातीय पर 75 हजार
-सामूहिक विवाह योजना- 85 हजार डीबीटी के जरिए व 15 हजार आयोजन व्यय
-मेधावी छात्र पुरस्कार योजना- दो हजार से 10 हजार रुपये प्रतिमाह तक
-महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसव के दौरान आर्थिक सहायता- तीन माह के वेतन के बराबर राशि, पुरुष को छह हजार।
बालक शिशु को 20 हजार व बालिका को 25 हजार। प्रथम बालिका पर 25 हजार की एफडी भी मिलेगी।
यूपी बीते वर्षों में एक्सप्रेस-वे प्रदेश बनकर उभरा है। एक्सप्रेस-वे और औद्योगिक गलियारों के निर्माण से खासतौर पर नोएडा-गाजियाबाद क्षेत्र में, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में श्रमिकों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
देश में एक अप्रैल से 29 पुराने श्रम कानूनों को खत्म कर 4 नई श्रम संहिताओं में बदला गया है। इसका उद्देश्य काम के घंटे, ओवरटाइम और सुरक्षा नियमों को अधिक पारदर्शी बनाना है। औद्योगिक प्रतिष्ठानों की निरीक्षण प्रक्रिया पूरी तरह बदली गई है। प्रदेश में इन संहिताओं को लागू किए जाने के बाद नियोक्ताओं के साथ ही कामगारों को भी लाभ मिलेगा।
बीते कुछ सालों में सरकारी स्तर पर श्रमिकों के साथ ही उनके परिवारों खासकर बच्चों के लिए योजनाएं बनीं हैं। यूपी ने निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए अटल आवासीय स्कूलों का शानदार मॉडल देश के सामने पेश किया है। जहां छठी से 12वीं तक बच्चों के पढ़ने और रहने की नि:शुल्क व्यवस्था सरकार ने की है। अभी यह स्कूल मंडल स्तर पर खुले हैं, मगर सरकार ने इन्हें जिला स्तर पर खोले जाने का ऐलान किया है। इसके अलावा श्रमिकों की बेटियों के विवाह में सरकार एक लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दे रही है। वहीं मई दिवस के मौके पर शुक्रवार को गोरखपुर, अयोध्या, गाजियाबाद और गोंडा में चार जगह सामूहिक विवाह कार्यक्रम होंगे। वहीं निर्माण श्रमिकों के परिवारों को आयुष्मान योजना के तहत पांच लाख रुपये मुफ्त इलााज की सुविधा भी दी गई है।
योगेश यादव लाइव हिन्दुस्तान में पिछले छह वर्षों से यूपी सेक्शन को देख रहे हैं। यूपी की राजनीति, क्राइम और करेंट अफेयर से जुड़ी खबरों को कवर करने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यूपी की राजनीतिक खबरों के साथ क्राइम की खबरों पर खास पकड़ रखते हैं। यूपी में हो रहे विकास कार्यों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में आ रहे बदलाव के साथ यहां की मूलभूत समस्याओं पर गहरी नजर रखते हैं।
पत्रकारिता में दो दशक का लंबा अनुभव रखने वाले योगेश ने डिजिटल से पहले प्रिंट में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। लम्बे समय तक हिन्दुस्तान वाराणसी में सिटी और पूर्वांचल के नौ जिलों की अपकंट्री टीम को लीड किया है। वाराणसी से पहले चड़ीगढ़ और प्रयागराज हिन्दुस्तान को लांच कराने वाली टीम में शामिल रहे। प्रयागराज की सिटी टीम का नेतृत्व भी किया।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से बीकॉम में ग्रेजुएट और बनारस की ही काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट योगेश ने कई स्पेशल प्रोजेक्ट पर काम भी किया है। राष्ट्रीय नेताओं के दौरों को कवर करते हुए उनके इंटरव्यू किये। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्यों पर हिन्दुस्तान के लिए सीरीज भी लिख चुके हैं।
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