श्रावस्ती में एनीमिया और कुपोषण से निपटने के लिए संचालित एनीमिया मुक्त भारत और सैम (SAM) प्रबंधन कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने इसकी अध्यक्षता की। यह बैठक एम्स गोरखपुर और यूनिसेफ के सहयोग से संचालित एसआरसीएन (SRCN) परियोजना के तहत हुई।
बैठक में जिला स्तरीय स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ जनपद के सभी ब्लॉकों से चिकित्सा अधीक्षक/एमओआईसी, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर (बीपीएम), ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर (बीसीपीएम), आरबीएसके टीम के सदस्य और एमसीटीएस ऑपरेटरों ने सहभागिता की। समीक्षा के दौरान कार्यक्रम के तहत किए जा रहे कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और फील्ड स्तर पर आ रही समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों और बच्चों की एनीमिया जांच, आयरन-फोलिक एसिड टैबलेट के वितरण, पोषण परामर्श तथा सैम बच्चों की पहचान और उपचार की स्थिति की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कार्यक्रम की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
समयबद्ध डेटा फीडिंग के भी निर्देश दिए
सीएमओ ने सभी ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि फील्ड स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। आरबीएसके टीमों द्वारा स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्क्रीनिंग को और तेज किया जाए तथा सैम बच्चों के उपचार और फॉलोअप में निर्धारित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन हो। साथ ही, एमसीटीएस पोर्टल पर शत-प्रतिशत सही और समयबद्ध डेटा फीडिंग के भी निर्देश दिए गए।
बैठक में एसआरसीएन टीम द्वारा तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि एम्स गोरखपुर एवं यूनिसेफ के सहयोग से जनपद में कुपोषण और एनीमिया की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।
सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से आपसी समन्वय के साथ जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने का आह्वान किया गया। सीएमओ ने विश्वास जताया कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण अभियान है, जिसे सफल बनाने में निरंतर प्रयासों से श्रावस्ती को एनीमिया मुक्त जनपद बनाने की दिशा में ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
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