संकट के मुहाने से सुरक्षित निकला भारतीय जहाज, आखिरी लम्हों में होर्मुज पर बड़ी हलचल – Live Hindustan

लेबनान में इज़राइल के हमले जारी रहने से नाराज ईरान ने शनिवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद करने की घोषणा की। हालांकि, भारत के लिए राहत की बात है कि इस ऐलान से कुछ समय पहले ही एक भारतीय जहाज अल हामरा इस जलमार्ग को पार कर गया। यह जहाज LNG यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस लेकर आ रहा है। खास बात है कि इसके साथ ही भारत पहुंचने वाले जहाजों की संख्या 4 हो गई है।

अल हामरा जहाज भारत के बड़े एलएनजी टर्मिनल में से एक एन्नोर पहुंच रहा है। यह तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के पास स्थित है, जिसका संचालन इंडियन ऑयल एलएजी प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से किया जाता है। खास बात है कि इसे दक्षिण भारत में एनर्जी सपलाई का बड़ा रास्ता माना जाता है। टेलीग्राफ से बातचीत में केप्लर के सीनियर एनर्जी एनालिस्ट सुमित रितोलिया ने बताया, ‘अल हामरा मध्य पूर्व खाड़ी को पार कर गया है और भारत की तरफ बढ़ रहा है।’

एलएनजी कार्गो का एक बड़ा हिस्सा इस चैनल से गुजरता है। वहीं, खाद बनाने समेत कई उद्योगों के लिए एलएनजी बेहद जरूरी है। वहीं, भारत दूसरे देशों से आयात की गई नेचुरल गैस और LNG पर खासा निर्भर है। खास बात है कि एन्नोर टर्मिनल के पास ही कई फर्टिलाइजर और पावर प्लांट मौजूद हैं।

तेहरान की तरफ से होर्मुज बंद किए जाने से ठीक पहले 55 जहाज गुजरे थे, जिनमें अल हामरा भी शामिल है। यह जहाज अबु धाबी नेशनल ऑयल कंपनी या ADNOC से माल लेकर निकला है। रिपोर्ट में रितोलिया के हवाले से बताया गया है कि इसमें 1 लाख 32 हजार 890 क्यूबिक मीटर एलएनजी लदी हुई है। ये खबर है कि ये सभी 55 जहाज करीब 17 मिलियन बैरल कच्चा तेल लेकर होर्मुज से निकले हैं।

कहा जा रहा है कि यात्रा पर निकलने से पहले ही अल हामरा ने अपनी ट्रैकिंग बंद कर दी थी। दरअसल, इसके जरिए जहाज संवेदनशील जलमार्गो में खुद को सुरक्षित करते हैं। भारत अपने 10 से 15 फीसदी एलएनजी अबु धाबी से मंगाता है। अधिकांश सप्लाई दास आइलैंड प्रोजेक्ट के जरिए होती है। जबकि, भारत का सबसे बड़ा सप्लायर कतर ही है, जहां से 40 से 45 फीसदी एलएनजी आती है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शनिवार को बताया कि भारत के ध्वज वाले कच्चे तेल के तीन टैंकर 94 भारतीय चालक दल के सदस्यों के साथ होर्मुज पार कर भारत की ओर रवाना हो गए हैं। इन जहाजों में 8.6 लाख टन से अधिक कच्चा तेल लदा हुआ है। उन्होंने बताया कि ‘देश वैभव’, ‘देश विभोर’ और ‘सनमार हेराल्ड’ नामक तीनों टैंकर के 24 जून से एक जुलाई के बीच भारत पहुंचने की संभावना है।

देश वैभव के 24 जून को वाडीनार बंदरगाह पहुंचने की संभावना है, जबकि देश विभोर के उसी दिन सिक्का बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है। तीसरा भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर सनमार हेराल्ड, जिसने शनिवार को होर्मुज पार किया, एक जुलाई को पारादीप बंदरगाह पहुंच सकता है।

केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने लिखा, ‘भारत के ध्वज वाले तीन कच्चे तेल के टैंकर…’देश वैभव’, ‘देश विभोर’ और ‘सनमार हेराल्ड’ 94 भारतीय चालक दल के सदस्यों के साथ 8.6 लाख टन से अधिक माल लेकर आज होर्मुज को सफलतापूर्वक पार कर चुके हैं और अब भारत की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।’

वार्ता के अनुसार, खातम-अल अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने ईरानी सरकारी मीडिया द्वारा रिपोर्ट किए गए एक बयान में कहा, ‘यह घोषणा की जाती है कि होर्मुज जहाजों के आने-जाने के लिए बंद रहेगा। यह पहला कदम दुश्मन के वादे तोड़ने का जवाब है और अगर हमला जारी रहता है, तो दुश्मन को अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए मजबूर करने के लिए आगे कदम उठाए जाएंगे।’

पश्चिम एशिया में शांति बहाली के उद्देश्य से अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेताओं के बीच रविवार को स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में महत्वपूर्ण वार्ता शुरू हुई। दोनों देश 10 सप्ताह बाद आमने-सामने की बैठक कर रहे हैं। वार्ता में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष बाघेर गालिबफ प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। खबरें हैं कि अमेरिका-ईरान वार्ता फिलहाल ठहराव की स्थिति में पहुंच गई है, लेकिन बातचीत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। भाषा की रिपोर्ट में सीएनएन सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दोनों पक्षों को फिर से वार्ता की मेज पर लाने के लिए बैकचैनल संपर्क जारी हैं।

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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