Shreeom Singh
Date: 26-09-26 13:06
वॉशिंगटन: सऊदी अरब ने भविष्य में परमाणु हथियार विकसित करने का विकल्प पूरी तरह छोड़ा नहीं है. अमेरिकी खुफिया आकलन से जुड़ी रिपोर्ट के बाद इस मुद्दे को लेकर वॉशिंगटन में चिंता बढ़ गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने परमाणु हथियार कार्यक्रम विकसित करने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है. इसी वजह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु समझौते को लेकर अमेरिकी सांसदों के बीच सवाल उठ रहे हैं.
ट्रंप प्रशासन ने सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु सहयोग समझौता किया है, जिसके तहत अमेरिकी कंपनियां वहां परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में काम कर सकती हैं. सरकार का कहना है कि इससे अमेरिका-सऊदी रिश्ते मजबूत होंगे और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों को बढ़त मिलेगी. वहीं, आलोचकों को आशंका है कि समझौते के कुछ प्रावधान सऊदी अरब को भविष्य में यूरेनियम संवर्धन की क्षमता दे सकते हैं.
सऊदी की परमाणु महत्वाकांक्षा को लेकर 5 बड़ी बातें
अमेरिकी खुफिया आकलन में यह चिंता सामने आई है कि सऊदी अरब ने भविष्य में परमाणु हथियार विकसित करने का विकल्प पूरी तरह बंद नहीं किया है. यह मुद्दा ऐसे समय उठा है जब ट्रंप प्रशासन का नागरिक परमाणु समझौता अमेरिकी कांग्रेस की 90 दिनों की समीक्षा प्रक्रिया में है.
समझौते में सऊदी अरब के लिए यूरेनियम संवर्धन का रास्ता खुला रहने को लेकर भी सवाल हैं. उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक शुरुआत में संवर्धन को 5 प्रतिशत तक सीमित रखा जा सकता है, जबकि एक आगे की समीक्षा के बाद इसे 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का रास्ता मौजूद है. 20 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम हथियार बनाने के लिए जरूरी स्तर के काफी करीब माना जाता है, हालांकि 20 प्रतिशत अपने आप में हथियार-स्तर का यूरेनियम नहीं है.
Scoop: Classified documents provided to Congress include an assessment by the U.S. intelligence community that Saudi Arabia has not ruled out the option of developing a nuclear weapons program, per U.S. officials…
एक और बड़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के अतिरिक्त प्रोटोकॉल को लेकर है. मौजूदा समझौते में इसे अनिवार्य शर्त नहीं बनाया गया है. आलोचकों का कहना है कि इससे सऊदी अरब की परमाणु गतिविधियों की निगरानी और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है.
सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु हथियार हासिल करता है तो सऊदी अरब भी ऐसा करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है. इसी बयान को अमेरिकी सांसद सऊदी परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी चिंताओं के संदर्भ में उठाते रहे हैं.
अमेरिकी सांसद कैसे रोक सकते हैं सऊदी परमाणु डील?
अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुआ नागरिक परमाणु समझौता फिलहाल अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा में है. कानून के तहत कांग्रेस के पास 90 दिनों की समीक्षा अवधि होती है. इस दौरान सांसद समझौते को मंजूरी दे सकते हैं, उसकी शर्तों में बदलाव की मांग कर सकते हैं या इसे रोकने के लिए संयुक्त प्रस्ताव ला सकते हैं. अगर कांग्रेस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती है तो तय प्रक्रिया के तहत समझौता आगे बढ़ सकता है.
सांसद एड मार्की और जेफ मर्कली के नेतृत्व में कई सीनेटरों ने 25 सितंबर को विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर ट्रंप प्रशासन से इस समझौते को छोड़ने की मांग की. उनका कहना है कि डील में यूरेनियम संवर्धन और परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हैं.
इससे पहले सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने समझौते से जुड़े दो गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की भी मांग की थी. उनका कहना है कि इन दस्तावेजों के बिना कांग्रेस और आम लोग समझौते की पूरी शर्तों का आकलन नहीं कर सकते.
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