भारत की आबादी में एक-चौथाई से अधिक Gen Z होने के बावजूद, संसद और विधानसभाओं में उनकी उपस्थिति नगण्य है, केवल 6 सांसद और 20 विधायक हैं। …और पढ़ें
संसद और विधानसभाओं में Gen Z की कम भागीदारी। (फोटो-रॉयटर्स)
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सड़कों, सोशल मीडिया और विरोध-प्रदर्शनों पर Gen Z की आवाज सबसे जोरदार सुनाई देती है। लेकिन देश की संसद और राज्य विधानसभाओं में यही आवाज हल्की गूंज बनकर रह जाती है।
देश की आबादी में एक-चौथाई से ज्यादा हिस्सा Gen Z का है, लेकिन पूरे देश में उनके सिर्फ 6 सांसद और 20 विधायक हैं। यानी कुल 26 जनप्रतिनिधि।
पहले तो यह जान लीजिए कि जनरेशन जेड यानी Gen Z कौन हैं। जेनरेशन जेड उन्हें कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुआ है। अब वापस लौटते हैं…। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुमान के आधार पर 2026 में भारत की 142.6 करोड़ आबादी है।
इस आबादी में Gen Z की संख्या 36.74 करोड़ यानी 25.8 प्रतिशत है। इनमें 25 साल से ऊपर वाले जो चुनाव लड़ सकते हैं, वो देश की आबादी का 8.9 प्रतिशत हैं। चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 साल होने के कारण इस आबादी का बड़ा हिस्सा अभी राजनीत से बाहर है।
2024 का लोकसभा चुनाव Gen Z के लिए पहला मौका था। 8,360 उम्मीदवारों में से सिर्फ 98 Gen Z मैदान में थे, यानी 1.2 प्रतिशत। इनमें से भी महज 6 ही जीते।
बड़ी बात यह है कि इन 6 में से भी 4 महिलाएं हैं। इनमें 6 में 4 ग्रेजुएट, 2 पोस्ट ग्रेजुएट हैं। प्रिया, खंड्रे और जाटव वकील हैं। शाम्भवी के पास MA Sociology, जारकीहोली MBA और पुष्पेंद्र के पास लंदन से डिग्री है।
इन 6 में से 5 बड़े राजनीतिक घरानों से हैं। सिर्फ भरतपुर की संजना जाटव ही गैर-राजनीतिक परिवार से हैं और दलित समुदाय से आती हैं। पुष्पेंद्र के पिता समाजवादी पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी, प्रिया के पिता 3 बार सांसद। खंड्रे और जारकीहोली कर्नाटक के बड़े कांग्रेस परिवारों से। शाम्भवी के पिता बिहार सरकार में मंत्री हैं।
लोकसभा में कुल 40 सांसद 40 साल से कम हैं। इसमें UP के 10, कर्नाटक और AP के 5-5 शामिल हैं। विधानसभा में हाल और भी कमजोर है। 28 राज्य + 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 4,131 विधायकों में सिर्फ 20 Gen Z हैं।
इनमें 8 महिलाएं हैं। 9 SC/ST सीटों से हैं। 12 नए चेहरे हैं, जिनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है। इनमें तमिलनाडु के डॉक्टर धिलिपन जयशंकर, बंगाल के पूर्व पत्रकार संतु पान, बिहार की सिंगर मैथिली ठाकुर शामिल हैं।
8 विधायक राजनीतिक परिवारों से। इनमें हरियाणा के आदित्य सुरजेवाला, महाराष्ट्र के रोहित पाटिल, पुडुचेरी के विग्नेश कन्नन प्रमुख नाम हैं।
वहीं 40 साल या उससे कम उम्र के 397 विधायक और 40 सांसद हैं। इसमें छत्तीसगढ़ में अनुपात सबसे ज्यादा 35.6 प्रतिशत है। कुल संख्या में तमिलनाडु 49 के साथ टॉप पर है।
यह आंकड़े इसलिए भी अहम हैं क्योंकि 2029 के लोकसभा चुनाव तक Gen Z वोटर्स की सबसे बड़ी ताकत बन जाएंगे। 2031 के अनुमान के मुताबिक Gen Z आबादी 26.3 प्रतिशत होगी। मिलेनियल्स 21.7% और पुरानी पीढ़ियां 24 प्रतिशत रह जाएंगी।
ऐसे में वोट देने वाले सबसे ज्यादा Gen Z होंगे, लेकिन कानून बनाने वाली जगहों पर अभी उनकी आवाज बहुत कम है।