सड़क, संघर्ष और संवाद… जिस फॉर्मूले पर केजरीवाल ने जीता था पहला चुनाव, उसी पर फिर से लौटे – Aaj Tak

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आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मु्ख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार का लंच एक खास व्यक्ति के घर किया. केजरीवाल मंगलवार दोपहर अपनी पत्नी के साथ दिल्ली के न्यू कोंडली पहुंचे. यहां पर उनके मेजबान थे 34 साल के नवनीत कुमार. नवनीत कुमार दिल्ली में ऑटो रिक्शा चलाते हैं और आम आदमी पार्टी के समर्थक हैं. 
केजरीवाल की मेजबानी करते हुए नवनीत बेहद खुश दिखे. केजरीवाल के लिए उनकी पत्नी पूजा ने दाल, रोटी, पनीर कई सब्जियां पकाई थीं. आम आदमी पार्टी ने केजरीवाल के इस लंच का खूब प्रचार किया और इसकी तस्वीरें एक्स पर शेयर कीं. बिहार के लखीसराय के रहने वाले नवनीत ने AAP सरकार की तारीफ की और कहा कि वो जो कुछ भी करते हैं लोगों की बेहतरी के लिए करते हैं, वो हमारी समस्या परिवार के सदस्यों की तरह सुनते हैं और पूरी गंभीरता से परेशानियां दूर करते हैं.
जब ऑटो पर पोस्टर चिपकाया करते थे केजरीवाल
दिल्ली के ऑटोवाले केजरीवाल की राजनीतिक यात्रा के सहयात्री रहे हैं. 2011-12 में जब अरविंद केजरीवाल दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जड़ें रोपने की कोशिश कर रहे थे तो दिल्ली के ऑटो ड्राइवर उनके आंदोलन और अभियान में सबसे आगे रहे. ये वो दौर था जब पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया स्वयं ऑटो पर अपनी पार्टी के पोस्टर चिपकाया करते थे. 
ऑटो चालकों से केजरीवाल का अपनापन 🛺❤️

दिल्ली के Auto चालकों के भाई @ArvindKejriwal जी और उनकी धर्मपत्नी @KejriwalSunita जी ने आज एक ऑटो चालक भाई के घर जाकर भोजन किया व उनके परिवार से मुलाक़ात की। pic.twitter.com/Sc5vvEgvuN
अब दिल्ली में कुछ ही दिनों में चुनाव होने को हैं. केजरीवाल खुद सीएम की कुर्सी से दूर हैं, उनकी पार्टी के कई बड़े नेता भी AAP से अलग हो चुके हैं. केजरीवाल और सिसोदिया शराब घोटाले में जेल जा चुके हैं और इस वक्त बेल पर बाहर हैं. ऐसे मुश्किल समय में अरविंद केजरीवाल ने AAP के इन फूट सोल्जर्स को फिर से याद किया है. ताकि दिल्ली की सत्ता में तीसरी बार वापसी की जा सके. 
रामलीला मैदान से ही ऑटो वालों का साथ
ऑटो चालकों से अपने जुड़ाव को याद करते हुए केजरीवाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ये रिश्ता रामलीला मैदान से शुरू हुआ था और आज भी उतना ही मजबूत है. याद रखें कि रामलीला मैदान भारत में केजरीवाल ब्रांड पॉलिटिक्स का उदगम स्थल है. इसी मैदान में अन्ना हजारे के साथ लोकपाल बिल को लेकर आंदोलन कर केजरीवाल ने अपनी पहचान देश भर में बनाई थी.
सड़क, संघर्ष और संवाद
केजरीवाल ने रामलीला मैदान की दुहाई की देकर संकेत दे दिया है कि वे फिर से बैक टू बेसिक्स (Back to basics) की ओर जा रहे हैं. यानी कि सड़क, संघर्ष और संवाद की राजनीति. अगर केजरीवाल की शुरुआती दिनों की राजनीति की बात करें तो दिल्ली की कानून व्यवस्था, बिजली-पानी और ट्रांसपोर्ट उनकी प्राथमिकता में रहे हैं. 
2012 में जब निर्भया कांड हुआ तो लॉ एंड ऑर्डर को लेकर दिल्ली की राजनीति में तूफान आ गया. याद कीजिए इंडिया गेट और संसद के आस-पास प्रदर्शनकारियों की भीड़ और निर्भया के लिए इंसाफ की मांग. आंदोलनकारी केजरीवाल सहज ही जनता क्या चाहती है ये समझ गये और 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर शीला सरकार को घेर दिया. साथ ही उन्होंने बीजेपी से भी सवाल पूछा. निर्भया कांड की बर्बरता के आगे कांग्रेस की शीला सरकार को जवाब देते नहीं बन रहा था और बीजेपी के भरोसे में जनता को दम नजर नहीं आया और दिल्ली ने आंदोलनकारी केजरीवाल को अपना नेता चुन लिया. 
2013 में केजरीवाल लॉ एंड ऑर्डर के मुद्दे पर शीला सरकार को घेर रहे थे तो इस बार उनके निशाने पर हैं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह. केजरीवाल दिल्ली में जो आपराधिक मामले हो रहे हैं उसके लिए सीधे दिल्ली पुलिस के बहाने अमित शाह से सवाल पूछ रहे हैं. हाल ही में दिल्ली में जो आपराधिक घटनाएं हो रही है तो उनके पीड़ितों के घर केजरीवाल पहुंच रहे हैं और केंद्र से सवाल कर रहे हैं. 
इसके साथ ही उन्होंने सड़क की राजनीति का भी विकल्प खुला रखा है. केजरीवाल ने कहा है कि अगर लॉ एंड ऑर्डर के मुद्दे पर आंदोलन की जरूरत पड़ी तो वो भी करुंगा. 
अमित शाह जी ने दिल्ली को बर्बाद कर दिया। दिल्ली को जंगल राज बना दिया। चारों तरफ़ लोग दहशत की ज़िंदगी जी रहे हैं। बीजेपी से अब दिल्ली की क़ानून व्यवस्था नहीं संभल रही। दिल्ली वालों को एकजुट होकर आवाज़ उठानी होगी। https://t.co/UDmn45100o
 
सड़क और संघर्ष के अलावा केजरीवाल ने संवाद की अपनी पुरानी राजनीति को फिर से सक्रिय किया है और चुनाव से पहले AAP के अभियान को आक्रामक बनाने के लिए ऑटो वालों को याद किया है. 
ये बहुत पुरानी तस्वीर है। जब नई नई पार्टी शुरू की थी। मैं और मनीष ख़ुद एक एक ऑटो के पीछे पोस्टर चिपकाया करते थे। तब से ही ऑटो वालों ने हर बार खूब साथ दिया है। https://t.co/EPXzMdiMu4 pic.twitter.com/trbvcbjyKO
केजरीवाल ने एक्स पर अपनी और सिसोदिया की वो तस्वीर डाली है जब वो न तो सीएम थे और न ही राष्ट्रीय स्तर के नेता. तब वो आंदोलनकारी थे. इस तस्वीर में केजरीवाल मनीष सिसोदिया के साथ ऑटो पर आम आदमी पार्टी का पोस्टर चिपका रहे हैं. इस पोस्टर को शेयर करते हुए केजरीवाल ने ऑटो वालो पुराने रिश्ते की याद दिलाई और लिखा, “ये बहुत पुरानी तस्वीर है. जब नई नई पार्टी शुरू की थी. मैं और मनीष खुद एक एक ऑटो के पीछे पोस्टर चिपकाया करते थे. तब से ही ऑटो वालों ने हर बार खूब साथ दिया है.”
ऑटोवालों को दी 5 गारंटी
दरअसल केजरीवाल की ये तस्वीर ऑटो वालों से वोट की अपील है. इसके एवज में केजरीवाल ने अगली सरकार बनने पर दिल्ली के 1.5 लाख ऑटो वालों को 5 गारंटियां दी है. ये गारंटी केजरीवाल ने ऑटो चालक नवनीत के घर लंच के बाद दी. ये गारंटी हैं- 
1.हर चालक का 10 लाख तक का जीवन बीमा और 5 लाख का एक्सीडेंट इंश्योरेंस.
2. बेटी की शादी में 1 लाख की सहायता.
3. वर्दी के लिए साल में 2 बार ₹2500.
4. बच्चों को कॉम्पिटिशन एग्ज़ाम की तैयारी के लिए कोचिंग का खर्च.
5. ‘PoochO app’ फिर से चालू होगा.
लंच से पहले सोमवार को केजरीवाल ने अपने दफ्तर में लगभग 100 ऑटो वालों के साथ चाय पी थी. इस दौरान केजरीवाल ने फिर से पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, ‘उनके साथ सुख-दुख बांटना मेरे लिए बेहद खास है. ऑटो चालकों से तो मेरा पुराना और गहरा रिश्ता है. समय चाहे कैसा भी रहा हो, हमने हमेशा एक-दूसरे का साथ दिया. उनके जीवन की चुनौतियां और उनकी मेहनत मुझे हमेशा प्रेरित करती रही हैं. हमने हमेशा उनके लिए काम किया है और भविष्य में भी उनकी सहूलियत के लिए काम करते रहेंगे.’
नमक याद दिलाकर वोट मांग गये केजरीवाल
चाय की इसी मुलाकात के दौरान नवनीत ने केजरीवाल को अपने घर लंच का न्यौता दिया था. नवनीत के घर लंच के बाद केजरीवाल ने उनकी खूब तारीफ और कहा कि ‘भाभी जी ने बहुत स्वादिष्ट खाना खिलाया… अब मैं कह सकता हूं कि मैंने ऑटोवालों का नमक खाया है.उनके स्नेह और आदर-सत्कार से ऐसा लगा मानो अपने परिवार के बीच ही हूं. हमें आमंत्रित करने के लिए नवनीत भाई और उनके परिवार का बहुत-बहुत शुक्रिया.”
दिल्ली में 1 लाख ऑटो, 1.5 लाख ऑटो चालक
बता दें कि 2011 के सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार राजधानी दिल्ली में ऑटो रिक्शा की संख्या 1 लाख तय की गई है. इसमें इजाफा नहीं किया जा सकता है. यहां ध्यान देने की बात है कि दिल्ली में ऑटो चालक शिफ्ट में काम करते हैं इसलिए राजधानी में 1 लाख ऑटो को चलाने के लिए लगभग 1.5 लाख ड्राइवर हैं. अगर इन 1.5 लाख ऑटो चालकों के हर परिवार में ऑटो चालक के अलावा 3 से 4 लोग होंगे तो संख्या 5 से 6 लाख के बीच होती है. लिहाजा केजरीवाल की ये कवायद लगभग 5 से 6 लाख एकमुश्त वोटर्स के लिए है. 
 
इस बार झाड़ू चलेगी’ से ‘फिर लाएंगे केजरीवाल’ तक
2011-12 में जब केजरीवाल ऑटोवालों से समर्थन की अपील कर रहे थे तब उन्होंने ऑटो रिक्शा पर जो पोस्टर चिपकाये थे उस पर लिखा था- इस बार झाड़ू चलेगी. याद रखें ये वो दौर था जब शीला दीक्षित 15 सालों से दिल्ली की सत्ता में थीं. और केजरीवाल उन्हें हटाने का दम भर रहे थे. तब न सिर्फ ऑटोवालों ने बल्कि दिल्ली की जनता ने केजरीवाल को भरपूर साथ दिया और उन्हें बंपर बहुमत मिला. 2020 में भी यही कहानी दोहराई गई. लेकिन 10 साल बाद इस बार आम आदमी पार्टी ऑटो में जो पोस्टर लगा रही है उस पर लिखा है ‘फिर लाएंगे केजरीवाल’. हालांकि इन 10 सालों से दिल्ली से लेकर देश की राजनीति बहुत बदल चुकी है. 
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