समुद्र के नीचे फटी धरती, कुछ ही दिनों में अलग हो गए समुद्र तल के दो हिस्से, देखकर दंग रह वैज्ञानिक – India.Com

समुद्र की शांत गहराइयों में ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसे आज तक कोई इंसान अपनी आंखों से नहीं देख पाया था. वैज्ञानिकों ने पहली बार उस पल को रिकॉर्ड किया है, जब समुद्र की सतह के नीचे धरती की परत फटी, लावा बाहर निकला और कुछ ही दिनों में समुद्र का तल कई मीटर तक अलग हो गया. यह खोज पृथ्वी के इतिहास और उसके लगातार बदलते स्वरूप को समझने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. nature.com में छपी खबर के अनुसार, वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर में मौजूद साउथईस्ट इंडियन रिज नाम की जगह पर इस घटना को दर्ज किया.

यह वह क्षेत्र है जहां पृथ्वी की दो बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें. ऑस्ट्रेलियाई प्लेट और अंटार्कटिक प्लेट धीरे-धीरे एक-दूसरे से दूर जा रही हैं. आमतौर पर ये प्लेटें हर साल लगभग 6 सेंटीमीटर की दूरी बनाती हैं, लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ. कुछ ही दिनों के भीतर समुद्र की सतह के नीचे करीब 16 करोड़ घन मीटर लावा बाहर निकला, और समुद्र की पपड़ी के दो हिस्से कम से कम 2 मीटर तक अलग हो गए. यह पहली बार है जब वैज्ञानिकों ने समुद्र के तल के फैलने की पूरी प्रक्रिया को वास्तविक समय में रिकॉर्ड किया.

इस दुर्लभ घटना को पकड़ने के लिए वैज्ञानिकों ने फरवरी 2024 में करीब 100 किलोमीटर लंबे इलाके में 20 से अधिक आधुनिक उपकरण लगाए थे. इनमें पानी के भीतर आवाज सुनने वाले हाइड्रोफोन, ध्वनि संकेत भेजने और पकड़ने वाले अकॉस्टिक बीकन और अन्य मापने वाले यंत्र शामिल थे. हाइड्रोफोन समुद्र के अंदर आने वाले भूकंप और कंपन की आवाज रिकॉर्ड करते रहे. वहीं, अकॉस्टिक बीकन हर चार घंटे में एक-दूसरे को ध्वनि संकेत भेजते थे. और यह मापते थे कि संकेत वापस आने में कितना समय लगा. इन आंकड़ों की मदद से वैज्ञानिकों को पता चला कि समुद्र की पपड़ी कब और कितनी तेजी से खिसकी.

इंफोग्राफिक: notebooklm
पृथ्वी की सतह का लगभग दो-तिहाई हिस्सा समुद्र के नीचे मौजूद है. समुद्र के बीचों-बीच फैली लंबी पर्वतमालाएं, जिन्हें मिड-ओशन रिज कहा जाता है, नई समुद्री पपड़ी बनाने का काम करती हैं. जब टेक्टोनिक प्लेटें अलग होती हैं तो पृथ्वी के भीतर मौजूद गर्म मैग्मा ऊपर आता है. यही मैग्मा ठंडा होकर नई चट्टानों और नई समुद्री सतह का निर्माण करता है. वैज्ञानिक इस प्रक्रिया के बारे में लंबे समय से जानते थे, लेकिन इसे पहले कभी सीधे होते हुए नहीं देख पाए थे. अब इस घटना के रिकॉर्ड होने से यह समझना आसान होगा कि नई समुद्री सतह कितनी तेजी से बनती है, लावा कैसे फैलता है और समुद्र के नीचे भूकंप किस तरह आते हैं.

इस अध्ययन से वैज्ञानिकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि समुद्र के नीचे होने वाले ज्वालामुखी विस्फोट और टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियां कितनी बार और किस पैमाने पर होती हैं. इससे भविष्य में समुद्री भूकंप, ज्वालामुखी गतिविधियों और पृथ्वी की आंतरिक संरचना को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह उपलब्धि भूविज्ञान के क्षेत्र में एक नया अध्याय खोल सकती है. समुद्र की गहराइयों में होने वाली ऐसी घटनाएं हमारी धरती को लगातार नया आकार देती रहती हैं और अब पहली बार इंसानों ने इस अद्भुत प्रक्रिया को अपनी आंखों के सामने घटित होते हुए दर्ज किया है.
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नंदन सिंह ने पत्रकारिता में करियर की शुरुआत साल 2015 में ईनाडु डिजिटल यानी ईटीवी (हैदराबाद) से की. यहां इन्होंने बतौर कॉपी राइटर करीब 10 महीनों तक काम किया. सीखने … और पढ़ें
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