सरकार 84,084 करोड़ रुपये की 'समुद्र मंथन योजना' के तहत ऊर्जा कंपनियों के साथ गहरे पानी में तेल और गैस की खोज का खर्च साझा करेगी।
सरकार समुद्र मंथन योजना से तेल-गैस खोज का खर्च बांटेगी
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सरकार 84,084 करोड़ रुपये की समुद्र मंथन योजना के तहत ऊर्जा कंपनियों के साथ गहरे पानी में तेल और गैस की खोज का खर्च साझा करेगी।इसके तहत, जोखिम भरे कुओं की खोज के खर्च का कुछ हिस्सा सरकार उठाएगी, अपतटीय क्षेत्रों की सिस्मिक मैपिंग के लिए फंड देगी और साझा उत्पादन सुविधाएं बनाने में मदद करेगी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने समुद्र मंथन कार्यक्रम के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसका मकसद भारत के गहरे और बहुत गहरे पानी वाले क्षेत्रों में तेल-गैस की खोज को आर्थिक रूप से बेहतर बनाना है। इन क्षेत्रों में ड्रिलिंग खर्च बहुत अधिक होता है और भूगर्भीय संभावनाएं अनिश्चित होती हैं, जिससे निवेश करने में कंपनियां हिचकिचाती हैं।
योजना का लक्ष्य हाइड्रोकार्बन के आयात पर भारत की भारी निर्भरता को कम करना है। यह योजना वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगी। इसमें वित्त वर्ष 2026-27 को तैयारी के वर्ष के रूप में रखा गया है, जबकि वित्त वर्ष 2027-28 से 2030-31 तक की अवधि को ‘चरण-1’ माना जाएगा, जिसमें खर्च किया जाएगा।
पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने दिशानिर्देशों की प्रस्तावना में इस योजना को हाल के समय में शुरू की गई तेल और गैस क्षेत्र की सबसे महत्वाकांक्षी पहल बताया और कहा कि इससे भारत के भंडार में 600 मिलियन टन से अधिक तेल के बराबर की वृद्धि हो सकती है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)