नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की तरफ से गठित एक समिति ने खुलासा किया है कि सरिस्का टाइगर रिजर्व के संवेदनशील …और पढ़ें
एआई से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर।
सरिस्का के कोर आवास से 1.6 किमी दूर 7 खदानें सक्रिय।
एनजीटी की जांच में वन्यजीव नियमों का उल्लंघन सामने आया।
खनन से सरिस्का के 50 से अधिक बाघों को गंभीर खतरा।
डिजिटल डेस्क, जयपुर। राजस्थान के प्रसिद्ध सरिस्का टाइगर रिजर्व से एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा बनाई गई एक संयुक्त जांच समिति ने खुलासा किया है कि सरिस्का के संवेदनशील बाघ आवास के महज 4 किलोमीटर के दायरे में 7 खदानें चल रही हैं। इनमें से सबसे पास वाली खदान तो बाघों के इस घर से सिर्फ 1.6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इस पूरे मामले को ऐसे समझिए कि अलवर जिले के झिरी और उसके आसपास के इलाकों में बाघों की आवाजाही बहुत ज्यादा है। ऐसे में भोपाल स्थित एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने 1 जुलाई को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए इस कमेटी का गठन किया था।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिस खदान को पहले नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (NBWL) की अनुमति न मिलने के कारण बंद कर दिया गया था, उसे बाद में दूरी का फर्जी या बदला हुआ सर्टिफिकेट बनवाकर फिर से चालू कर दिया गया।
बता दें कि मुख्य वन्यजीव वार्डन, अलवर जिला प्रशासन और राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधियों वाली इस कमेटी ने 20 अगस्त को मौके पर जाकर जमीनी सच्चाई की जांच की और पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंप दी।
जांच कमेटी की तरफ से सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि ये सातों खदानें सरिस्का के कोर टाइगर हैबिटेट (CTH) की मौजूदा सीमा से 1.6 किमी से 3.9 किमी की दूरी के बीच स्थित हैं।
सरकार द्वारा 10 नवंबर 2025 को अधिसूचित सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य (SWS) से इनकी दूरी 2.8 किमी से 5.12 किमी के बीच है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि सरिस्का में बाघों की संख्या अब बढ़कर 50 से ज्यादा हो गई है, ऐसे में बाघों के इतने करीब खनन होने से उनकी सुरक्षा और शांति को बहुत बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
गौरतलब है कि वन विभाग ने कमेटी के सामने यह बात स्वीकार की है कि ये सातों खदानें सरिस्का टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अभयारण्य और डिगोटा-61 ब्लॉक के 10 किलोमीटर के दायरे में आती हैं। नियमों के मुताबिक, इन सीमाओं से 1 से 10 किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह के खनन के लिए नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ (NBWL) की मंजूरी लेना अनिवार्य है।