Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की सियासत में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखा जाता है. अब चर्चा है कि उद्धव गुट में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. पार्टी के कई नेता उद्धव गुट का साथ छोड़ सकते हैं. तीन नेताओं ने के दूसरे पार्टी के नेताओं के साथ मीटिंग्स की भी चर्चा है.
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Uddhav Thackeray: राजनीति में कब क्या हो जाए, इसका कोई भी भरोसा नहीं रहता है. एक तरफ आम आदमी पार्टी तो दूसरी तरफ महाराष्ट्र में उद्धव गुट को लेकर सियासी माहौल गरम है. इन दिनों उद्धव गुट में सबकुछ ठीक नहीं है, कयास लगाए जा रहे हैं कई नेता पार्टी का साथ छोड़ सकते हैं. चर्चा है कि हाल में ही उद्धव के तीन सांसदों ने दूसरी पार्टियों के नेताओं के साथ ‘कर्टेसी’ (शिष्टाचार) मीटिंग्स की हैं. अचानक इन नेताओं को लेकर चर्चा क्यों शुरू हुई आइए जानते हैं.
तेज हुई अटकलें
ये चर्चा ऐसे समय पर शुरू हुई है जब मुंबई में उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री में एक जरूरी मीटिंग में तीन बार के सांसद और मराठवाड़ा इलाके में की शान संजय जाधव शामिल नहीं हुए. जिसके बाद से शिवसेना में फूट की अटकलें तेज हो गई. जाधव की गैरमौजूदगी से पार्टी के हलकों में चिंता बढ़ गई. यहां तक कहा जाने लगा है कि उसके बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है. हालांकि, शिवसेना (UBT) के सीनियर नेता अंबादास दानवे ने दावा किया कि नेता एक फैमिली फंक्शन में गए थे. उन्होंने आगे कहा कि यह मीटिंग सभी जिलों के रेगुलर रिव्यू का हिस्सा थी. बाकी सभी ऑफिस बेयरर्स मौजूद थे और पार्टी पूरी तरह से ठीक है.
नाराजगी की ओर इशारा
जाधव का मामला अकेला ऐसा मामला नहीं था जब शिवसेना (UBT) नेताओं के कामों से यह अफवाह फैली कि ठाकरे की लीडरशिप वाली यूनिट में सब ठीक नहीं है. पिछले कुछ महीनों में, शिवसेना (UBT) के MPs में नाराजगी की बातें सामने आई हैं, सूत्रों ने पार्टी के काम करने के तरीके और लीडरशिप तक पहुंच को लेकर नाराजगी का इशारा दिया है, अरविंद सावंत और अनिल देसाई जैसे नेताओं को छोड़कर, MPs का एक ग्रुप दूसरे पॉलिटिकल ऑप्शन देख रहा है.
चल रही है राजनीतिक हलचल
इस महीने की शुरुआत में, हिंगोली से पार्टी MP नागेश पाटिल अष्टीकर और यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख, नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के दिए डिनर में शामिल हुए थे. इसके तुरंत बाद, संजय जाधव के राष्ट्रीय राजधानी में BJP नेता अमित शाह से मिलने की भी खबर आई, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि कुछ राजनीतिक बातचीत चल रही है.
शिंदे गुट के नेता बरत रहे हैं सावधानी
हालांकि इसमें शामिल लोगों का कहना था कि ये बातचीत नॉन-पॉलिटिकल थी, लेकिन ये अफवाहों को हवा देने के लिए काफी थीं. जिसे अक्सर राजनीतिक हलकों में ‘ऑपरेशन टाइगर’ कहा जाता है, यह शब्द एकनाथ शिंदे के कैंप से जुड़ा है. दिलचस्प बात यह है कि एकनाथ शिंदे गुट के नेताओं ने हाल के हफ्तों में सावधानी बरती है, पार्टी ने शिवसेना (UBT) MPs के उसके संपर्क में होने की खबरों को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया है, और उन्हें बेबुनियाद बताया है.
बढ़ गई है अनिश्चितता
इन अटकलों ने इशारा किया कि टॉप लीडरशिप और उसके सांसदों (पार्लियामेंट्री विंग) के बीच काफी कम्युनिकेशन गैप है. कुछ सांसदों ने टॉप लीडरशिप से कम संपर्क होने की चिंता जताई है. उनका मानना है कि स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी का खराब प्रदर्शन इसी का एक नतीजा था. जिन सांसदों को लेकर चर्चा थी कि वो पार्टी छोड़ सकते हैं वो सीधा जवाब नहीं दे रहे हैं, ऐसे में पार्टी की फूट को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है.
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Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2023 से (Zee Media) से हुआ. डिजिटल डेस्क पर खबरें लिखने के लिए अलावा साहित्य से भी गहरा नाता है. खबरों के अल…और पढ़ें
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